शीर्ष क्रम में बल्लेबाजी करने में सबसे अधिक सहज हूं: केएल राहुल

नयी दिल्ली. केएल राहुल बल्लेबाजी क्रम में निचले स्थान पर खेलने के बावजूद लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं लेकिन अगर उन्हें विकल्प दिया जाए तो यह स्टाइलिश विकेटकीपर-बल्लेबाज शीर्ष क्रम में खेलने पर सबसे अधिक सहज होंगे. राहुल आमतौर पर पांचवें नंबर पर बल्लेबाजी करते हैं लेकिन चैंपियंस ट्रॉफी में उन्हें एक स्थान नीचे धकेल दिया गया था. उन्होंने दुबई में पांच पारियों में 174 रन बनाए. इस नई चुनौती के लिए उनकी तैयारी और अपने खेल पर काम करते रहने के समर्पण से राहुल सफल रहे.

उन्होंने कहा, ”मैं शीर्ष क्रम में खेलते हुए बड़ा हुआ हूं. 11 साल की उम्र में मेंगलोर में अपने पहले प्रतिस्पर्धी मैच से लेकर भारत के लिए खेलने के शुरुआती दिनों तक और अपने करियर के अधिकांश समय तक मैं शीर्ष क्रम का बल्लेबाज रहा हूं. यह वह स्थान है जिसमें मैं सबसे अधिक सहज हूं और जो मुझे सबसे अधिक स्वाभाविक लगता है. ” उन्होंने ‘जियो हॉटस्टार’ से बातचीत के दौरान कहा, ”जब आप ‘टीम खेल’ खेलते हैं तो आपको हमेशा यह चुनने का मौका नहीं मिलता कि आप क्या चाहते हैं. आपको लचीला होना चाहिए और टीम की जरूरतों के हिसाब से खुद को ढालने के लिए तैयार रहना चाहिए. पिछले कुछ वर्षों में मैंने इसे अपनाना और जो भी भूमिका मुझे सौंपी जाती है, उसमें अपना सर्वश्रेष्ठ देना सीखा है. ” राहुल इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) में पंजाब किंग्स और लखनऊ सुपर जायंट्स का नेतृत्व कर चुके हैं, उन्होंने कथित तौर पर आगामी आईपीएल में अपनी नयी फ्रेंचाइजी दिल्ली कैपिटल्स की कप्तानी करने का मौका ठुकरा दिया है.

आईपीएल नीलामी के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि यह खिलाड़ी के भविष्य को काफी हद तक प्रभावित कर सकता है.
उन्होंने कहा, ”पिछले तीन सत्र से कप्तान होने के नाते मैं टीम बनाने की प्रक्रिया में सक्रिय रूप से शामिल रहा हूं. मैं समझता हूं कि टीम बनाते समय फ्रेंचाइजी किस तरह के दबाव का सामना करती हैं. ” उन्होंने कहा, ”लेकिन एक खिलाड़ी के नजरिए से यह और भी कठिन है क्योंकि आपका करियर दांव पर लगा होता है. नीलामी खिलाड़ी के भविष्य को आकार दे सकती है या चुनौतियां पेश कर सकती है. ” राहुल ने कहा, ”मैं निश्चित रूप से पिछली नीलामी के दौरान नर्वस और चिंतित था. लेकिन साथ ही मैं जानता था कि यह मेरे करियर के लिए सही कदम था. थोड़ा उत्साह भी था, हालांकि ज्यादा लंबा नहीं रहा क्योंकि वास्तविकता जल्दी पता चल जाती है. ”

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