भारत वैश्विक भूख सूचकांक में 111वें स्थान पर, सरकार ने त्रुटिपूर्ण करार देकर किया खारिज

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Thu, 12 Oct 2023 10:30 PM
भारत वैश्विक भूख सूचकांक में 111वें स्थान पर, सरकार ने त्रुटिपूर्ण करार देकर किया खारिज
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नयी दिल्ली. वैश्विक भूख सूचकांक-2023 के मुताबिक भारत दुनिया के 125 देशों में 111वें स्थान पर है. सरकार ने इस सूचकांक को खारिज करते हुए इसे त्रृटिपूर्ण और दुर्भावनापूर्ण मंशा से जारी किया गया करार दिया. वैश्विक भूख सूचकांक-2023 बृहस्पतिवार को जारी किया गया जिसके मुताबिक देश में ‘चाइल्ड वेस्टिंग’ की दर सबसे अधिक 18.7 प्रतिशत है जो अतिकुपोषण को इंगित करता है.

पिछले साल भारत का दुनिया के 121 देशों में 107वां स्थान था. वैश्विक भूख सूचकांक (जीएसआई) में वैश्विक, क्षेत्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर भूख को विस्तृत तरीके से आंका जाता है. सूचकांक के आधार पर तैयार रिपोर्ट के मुताबिक, वैश्विक भूख सूचकांक-2023 में भारत को 28.7 अंक मिले हैं जो भूख के गंभीर स्तर को इंगित करता है.

इस सूचकांक में भारत से बेहतर स्थिति पड़ोसी देशों की है और इसमें पाकिस्तान को 102वां, बांग्लादेश को 81वां, नेपाल को 69वां और श्रीलंका को 60वां स्थान दिया गया है. दक्षिण एशिया, अफ्रीका के सहारा क्षेत्र के दक्षिणी हिस्से दुनिया के वे इलाके हैं जहां भूख की उच्च दर है जिनका जीएचआई 27 (प्रत्येक की) है जो भूख की गंभीरता को इंगित करता है.

सूचकांक के आधार पर जारी रिपोर्ट मुताबिक, ”दुनिया में भारत ऐसा देश है जहां ‘चाइल्ड वेस्टिंग’ की दर सबसे अधिक 18.7 प्रतिशत है.” ‘चाइल्ड वेस्टिंग’ को बच्चों की लंबाई के अनुपात में ऊंचाई के आधार पर आंका जाता है. इस श्रेणी में वे बच्चे आते हैं जिनका वजन पर्याप्त रूप से बढ. नहीं पाता या अपर्याप्त भोजन, अथवा डायरिया और श्वास जैसी बीमारियों के कारण उनका वजन कम हो जाता है.
सूचकांक के मुताबिक, भारत में कुपोषण की दर बढ.कर 16.6 प्रतिशत हो गई है और पांच साल से कम उम्र के बच्चों में मृत्यु दर 3.1 प्रतिशत है. रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 15 से 24 साल की महिलाओं में अनीमिया की दर बढ.कर 58.1 प्रतिशत हो गई है.

सरकार ने हालांकि सूचकांक को खारिज करते हुए ‘भूख’ का गलत आकलन करार दिया जो भारत की वास्तविक स्थिति को प्रतिबिंबित नहीं करता. महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने कहा कि सूचकांक तय करने में ‘गंभीर प्रविधि (मेथडलाजिकल) की समस्या है और यह दुर्भावनापूर्ण मंशा प्रर्दिशत करती है.”

मंत्रालय ने कहा, ” सूचकांक में त्रृटिपूर्ण तरीके से भूख का आकलन किया गया है और इसमें प्रविधि की गंभीर समस्या है. चार में से तीन संकेतक बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़े हैं और पूरी आबादी का प्रतिनिधित्व नहीं कर सकते. चौथा सबसे अहम संकेतक ”आबादी में कुपोषितों का अनुपात” महज 3000 नमूनों के आधार पर किए गए ओपिनियन पोल पर आधारित है.” मंत्रालय ने कहा कि अप्रैल 2023 से ‘पोषण ट्रैकर’ पर पांच साल तक के बच्चों के आंकड़े अपलोड किए जा रहे हैं जिसमें बच्चों के आंकड़े बढ. रहे हैं और यह संख्या अप्रैल 2023 के 6.34 करोड़ से बढ.कर सितंबर 2023 में 7.27 करोड़ हो गई है.

मंत्रालय ने बयान में कहा, ” पोषण ट्रैकर पर माहवार आंकड़ों को देखें तो ‘चाइल्ड वेस्टिंग’ का प्रतिशत लगातार 7.2 प्रतिशत से नीचे है जबकि वैश्विक भूख सूचकांक 2023 में चाइल्ड वेस्टिंग 18.7 प्रतिशत बताई गई है.” मंत्रालय ने आगे कहा कि दो संकेतक ‘स्टंटिंग’ (आयु के हिसाब से लंबाई नहीं बढ.ना) और वेस्टिंग कई पहलुओं के जटिल मेल पर निर्भर करता है जिनमें भूख के अलावा स्वच्छता, अनुवांशिकी, पर्यावरण और खाद्य सामग्री पर निर्भर करता है.

इसमें कहा गया कि चौथे संकेतक बाल मृत्युदर में ऐसा कोई सबूत नहीं दिया गया है कि जिससे साबित हो कि यह भूख से जुड़ा है.
वैश्विक भूख सूचकांक से संकेत मिलता है कि 2015 तक वैश्विक भूख में सुधार होने के बाद से मोटे तौर पर स्थिति स्थिर बनी हुई है.

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