चीन के साथ भारत का संबंध ‘जटिल’ : विदेश मंत्रालय

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Mon, 13 Mar 2023 07:32 PM
चीन के साथ भारत का संबंध ‘जटिल’ : विदेश मंत्रालय
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नयी दिल्ली. विदेश मंत्रालय अपनी एक रिपोर्ट में सोमवार को कहा कि चीन के साथ भारत का संबंध ‘जटिल’ है और अप्रैल-मई 2020 में पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर एकतरफा ढंग से यथास्थिति बदलने के चीनी प्रयास के कारण सीमावर्ती क्षेत्रों में अमन एवं शांति को गंभीर रूप से क्षति पहुंची.

रिपोर्ट में कहा गया है कि इन प्रयासों का भारतीय सशस्त्र बलों से उपयुक्त प्रतिक्रिया मिली. विदेश मंत्रालय के वार्षिक रिपोर्ट 2022 में कहा गया है, ‘‘ चीन के साथ भारत का संबंध ‘जटिल’ है. दोनों पक्ष इस बात पर सहमत हुए कि सीमा से जुड़े विषयों का अंतिम समाधान होने तक द्विपक्षीय संबंधों के सम्पूर्ण विकास का आवश्यक आधार सीमा क्षेत्रों में अमन एवं शांति बनाये रखना होगा.’’

इसमें कहा गया है कि हालांकि अप्रैल-मई 2020 में पश्चिमी सेक्टर में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर एकतरफा ढंग से यथास्थिति बदलने के लिए चीनी पक्ष ने कई प्रयास किये, जिसके कारण सीमावर्ती क्षेत्रों में अमन एवं शांति को गंभीर रूप से क्षति पहुंची और संबंधों का विकास प्रभावित हुआ.

विदेश मंत्रालय ने कहा कि दोनों पक्षों ने पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर मुद्दों का समाधान शांतिपूर्ण बातचीत के जरिये करने पर सहमति व्यक्त की है और संघर्ष के सभी बिन्दुओं से पूरी तरह से पीछे हटने और भारत-चीन सीमा पर जल्द अमन एवं शांति कायम करने के लिए चीनी पक्ष के साथ बातचीत जारी है.

रिपोर्ट के अनुसार, ‘‘ हालांकि यथास्थिति बदलने के चीन के एकतरफा प्रयास जारी रखने से इसके पश्चात द्विपक्षीय संबंध प्रभावित हुए हैं.’’ इसमें कहा गया है कि दोनों पक्षों ने पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर मुद्दों के समाधान की दिशा में कुछ प्रगति की है. फरवरी 2021 में पैंगोंग सो में और अगस्त 2021 में गोगरा क्षेत्र में पीछे हटने के कदम उठाये गए हालांकि कुछ लंबित मुद्दे अभी भी हैं और इनका समाधान निकालने की जरूरत है.

मंत्रालय ने कहा कि भारत ने शेष मुद्दों के समाधान के लिए चीन के साथ राजनयिक और सैन्य माध्यमों से सम्पर्क बनाये रखने की बात कही है ताकि सीमावर्ती क्षेत्रों में जल्द अमन एवं शांति बहाल की जा सके.

घरेलू मुद्दों से ध्यान बंटाने के लिए भारत के खिलाफ शत्रुतापूर्ण दुष्प्रचार कर रहा है पाक

विदेश मंत्रालय ने सोमवार को एक रिपोर्ट में कहा कि पाकिस्तान प्रायोजित सीमा पार आतंकवाद में कोई कमी नहीं आयी है तथा इस्लामाबाद ने 26 नवंबर (2008) के मुंबई आतंकवादी हमले के पीड़ितों के परिवारों को न्याय दिलाने के मामले में अभी तक कोई गंभीरता नहीं दिखायी है.

मंत्रालय ने 2022 की अपनी वार्षिक रिपोर्ट में कहा कि भारत को बदनाम करने और अपनी घरेलू राजनीतिक एवं आर्थिक विफलताओं से ध्यान बंटाने के लिए पाकिस्तान ‘‘शत्रुतापूर्ण एवं मनगढ़ंत दुष्प्रचार’’ को जारी रखे हुए है. इसमें कहा गया कि भारत की मंशा पाकिस्तान के साथ सामान्य पड़ोसी वाले संबंध रखने की है तथा नयी दिल्ली का यह सतत रुख रहा है कि यदि कोई मुद्दा है, तो उसका समाधान आतंकवाद एवं ंिहसा से मुक्त माहौल में शांतिपूर्ण एवं द्विपक्षीय आधार पर निकाला जाना चाहिए.

विदेश मंत्रालय ने कहा, ‘‘भारत ने उन समस्त मामलों पर पाकिस्तान की सभी कार्रवाई और बयानों को पूरी तरह से खारिज किया है, जिनका संबंध भारत के अंदरूनी मामलों से है.’’ उसने यह भी कहा कि विभिन्न देशों के बीच इस बात को लेकर व्यापक समझ है कि जम्मू कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है तथा इससे संबंधित मामले देश के अंदरूनी मामले हैं.

मंत्रालय ने कहा, ‘‘भारत द्वारा पाकिस्तान को जनवरी 2004 में व्यक्त की गयी उसकी प्रतिबद्धता का पालन करने के लिए लगातार अनुरोध किये जाने के बावजूद सीमा पार आतंकवाद, घुसपैठ तथा नियंत्रण रेखा के पार से हो रही हथियारों की गैरकानूनी तस्करी में कोई कमी नहीं आयी है. पाकिस्तान ने जनवरी 2004 में प्रतिबद्धता व्यक्त की थी कि वह अपनी भूमि का उपयोग भारत के विरूद्ध आतंकवाद के लिए नहीं होने देगा.’’

इसने कहा, ‘‘पाकिस्तान द्वारा 26/11 के मुंबई आतंकवादी हमलों के (पीड़ितों के) परिवारों को न्याय दिलाया जाना अभी शेष है. ’’ विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत इस बात की आवश्यकता पर बल देता रहा है कि पाकिस्तान को सीमा पार आतंकवाद को समाप्त करने के लिए विश्वसनीय, अपरिवर्तनीय एवं पुष्टि योग्य कदम उठने चाहिए.

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