लंदन/नयी दिल्ली. ब्रिटेन की विदेश मंत्री लिज ट्रस ने भारतीय मूल के पूर्व वित्त मंत्री ऋषि सुनक को कंजरवेटिव पार्टी नेतृत्व के लिए मुकाबले में हराया और अब वह प्रधानमंत्री के तौर पर बोरिस जॉनसन का स्थान लेंगी. वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री ट्रस (47) के मुकाबले में पार्टी के सदस्यों की ओर डाले गए 170,000 आॅनलाइन और डाक मतों में से अधिकतर मत को प्राप्त करने की उम्मीद की गई थी. ट्रस ब्रिटेन की तीसरी महिला प्रधानमंत्री होंगी. इसके साथ ही, 10 डाउंिनग स्ट्रीट में शीर्ष पद संभालने के लिए सुनक का ऐतिहासिक अभियान खत्म हो गया.
चुनाव में 82.6 प्रतिशत मतदान हुआ जिसमें सुनक को 60,399 मत जबकि ट्रस को 81,326 मत मिले. मतदान के लिए कंजरवेटिव पार्टी के 172,437 सदस्य योग्य थे, वहीं 654 मत खारिज कर दिए गए. ट्रस ने अपने संबोधन में कहा, ‘‘हम वादे पूरे करेंगे.’’ मार्गरेट थैचर और टेरीजा मे के बाद ट्रस ब्रिटेन की तीसरी महिला प्रधानमंत्री होंगी. ट्रस ने कहा कि उनके पास करों में कटौती और ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था को बढ़ाने के लिए एक ‘‘साहसिक योजना’’ है. ट्रस ने बाद में ट्वीट कर कहा कि वह पार्टी का नेता चुने जाने पर सम्मानित महसूस कर रही हैं.
ट्रस ने एक ट्वीट में कहा, ‘‘मैं कंजरवेटिव पार्टी का नेता चुने जाने पर सम्मानित महसूस कर रही हूं. हमारे महान देश का नेतृत्व और वादों को पूरा करने को लेकर मुझ पर भरोसा करने के लिए धन्यवाद. मैं इन कठिन समय से हम सभी को निकालने, अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने और ब्रिटेन की क्षमता को उजागर करने के लिए साहसिक कदम उठाऊंगी.’’ कंजरवेटिव पार्टी के बैकबेंच सांसदों की 1922 समिति के अध्यक्ष और पार्टी के नेतृत्व संबंधी चुनाव के लिए निर्वाचन अधिकारी सर ग्राहम ब्रैडी ने डाउंिनग स्ट्रीट के करीब महारानी एलिजाबेथ द्वितीय सम्मेलन केंद्र में औपचारिक रूप से ट्रस की जीत की घोषणा की.
सर्वेक्षण संस्थानों, राजनीतिक विश्लेषकों और मीडिया संस्थानों को शायद ही कोई हैरानी हुई क्योंकि ट्रस चुनाव पूर्व कई सर्वेक्षणों में सुनक (42) से आगे रही थीं. कंजरवेटिव पार्टी के सदस्य सुनक के कदम को प्रधानमंत्री जॉनसन के साथ विश्वासघात के तौर पर देख रहे थे और कर में कटौती को लेकर ट्रस का संकल्प भी भारतवंशी सुनक की हार के मुख्य कारण रहे.
ब्रिटेन में 15 लाख से अधिक प्रवासी आबादी का अब भी सुनक में विश्वास बना हुआ है लेकिन पार्टी में जिन लोगों का संबंध उपमहाद्वीप के अन्य हिस्सों से है, उनके विभाजित होने की आशंका थी. ब्रिटेन में जन्मे सुनक यॉकशायर में रिचमंड से सांसद हैं.
ट्रस ने अपने अभियान में वित्त मंत्री के तौर पर सुनक की कर वृद्धि की योजनाओं को पलटने का संकल्प जताया और लगता है कि पार्टी के सदस्यों ने उनकी योजनाओं को प्राथमिकता दी.
सुनक का दृष्टिकोण बढ़ती महंगाई से निपटने पर ध्यान केंद्रित करने तथा संकट के लिए मदद की पेशकश करने के साथ लक्षित उपायों की पेशकश करना रहा. लेकिन लगता है कि अपने वादों से वह पार्टी के सदस्यों को अपनी ओर नहीं कर पाए. अब पार्टी की निर्वाचित पार्टी नेता के तौर पर विदेश मंत्री ट्रस स्कॉटलैंड के बाल्मोरल कैसल में महारानी को अपना औपचारिक इस्तीफा सौंपने के बाद प्रधानमंत्री पद संभालेंगी. महारानी (96) से भेंट के बाद वह लंदन लौटकर अपनी नयी कैबिनेट की घोषणा करेंगी.
प्रधानमंत्री मोदी ने लिज ट्रस को बधाई दी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिटेन का प्रधानमंत्री चुने जाने पर विदेश मंत्री लिज ट्रस को बधाई दी और भरोसा व्यक्त किया कि उनके नेतृत्व में भारत-ब्रिटेन व्यापक रणनीतिक साझेदारी और मजबूत होगी. मोदी ने एक ट्वीट में कहा, ‘‘ब्रिटेन का अगला प्रधानमंत्री चुने जाने पर लिज ट्रस को बधाइयां. मुझे विश्वास है कि आपके नेतृत्व में भारत-ब्रिटेन व्यापक रणनीतिक साझेदारी और भी मजबूत होगी.’’ प्रधानमंत्री मोदी ने ट्रस को नयी भूमिका और जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएं भी दीं.
ट्रस मौजूदा प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन की जगह लेंगी. कंजरवेटिव पार्टी के नेतृत्व की दौड़ में उन्होंने भारतवंशी पूर्व वित्त मंत्री ऋषि सुनक हराया. मार्गरेट थैचर और टेरीजा मे के बाद ट्रस ब्रिटेन की तीसरी महिला प्रधानमंत्री होंगी.
भारत के साथ संबंधों को मजबूत करने की पक्षधर लिज ट्रस होंगी ब्रिटेन की अगली प्रधानमंत्री
कंजर्वेटिव पार्टी की नवनिर्वाचित नेता और भावी प्रधानमंत्री लिज ट्रस ब्रिटेन के उन वरिष्ठ राजनेताओं में शामिल हैं, जिन्हें भारत-ब्रिटेन के रणनीतिक तथा आर्थिक संबंधों को और प्रगाढ़ बनाने के लिये जाना जाता है. वह ट्रस ही थीं, जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय व्यापार मंत्री रहने के दौरान पिछले साल मई में बोरिस जॉनसन के नेतृत्व वाली सरकार के लिये वृहद व्यापार साझेदारी (ईटीपी) पर मुहर लगवाई. यही ईटीपी अब चल रही मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) बातचीत के लिये शुरूआती आधार के तौर पर काम कर रही है.
वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री ट्रस (47) ने भारत की यात्राएं की हैं और वह वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के साथ डिजिटल वार्ता भी कर चुकी हैं, जिस दौरान उन्होंने देश को ‘‘बड़ा, प्रमुख अवसर’’ करार दिया था. ईटीपी पर हस्ताक्षर के बाद ट्रस ने कहा था, ‘‘मैं बनते व्यापार परिदृश्य में ब्रिटेन और भारत को एक बेहतरीन स्थिति में देख रही हूं.’’ उन्होंने कहा, ‘‘हम एक व्यापक व्यापार समझौते पर विचार कर रहे हैं जिसमें वित्तीय सेवाओं से लेकर कानूनी सेवाओं के साथ-साथ डिजिटल और डेटा समेत वस्तुएं और कृषि तक सब कुछ शामिल हैं. हमें लगता है कि हमारे शीघ्र एक समझौता करने की प्रबल संभावना है, जहां हम दोनों ओर शुल्क घटा सकते हैं और दोनों देशों के बीच अधिक वस्तुओं का आयात-निर्यात होते देख सकते हैं.’’
विदेश मंत्री के तौर पर अपनी पदोन्नति के बाद ट्रस ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार विभाग (डीआईटी) की कमान एनी मेरी ट्रेवेलयन को सौंप दी थी. यह उम्मीद की जा रही है कि वह (ट्रेवेलयन) अंतरराष्ट्रीय व्यापार मंत्री की अपनी भूमिका में ब्रिटेन-भारत एफटीए वार्ता पर आगे बढ़ेंगी. टोरी नेता के तौर पर निर्वाचित होने के लिये पूर्व ब्रिटिश वित्त मंत्री ऋषि सुनक के साथ अपने मुकाबले के दौरान ट्रस ने पार्टी के कंजर्वेटिव फ्रेंड्स आॅफ इंडिया (सीएफआईएन) प्रवासी समूह के समक्ष कहा था कि वह द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के लिये ‘‘बेहद प्रतिबद्ध’’ रहेंगी.
उन्होंने भारत-ब्रिटेन एफटीए के लिए भी अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की और उम्मीद जताई की दिवाली तक इसे पूरा करने की कोशिश की जाएगी, जो समयसीमा उनके पूर्ववर्ती बोरिस जॉनसन ने निर्धारित की थी. ट्रस ने कहा कि अगर तब तक संभव न हो सका तो ‘‘निश्चित तौर पर साल के अंत तक’’ इसे पूरा कर लिया जाएगा. उन्होंने रूस और चीन की आक्रामकता के खिलाफ अपने ‘स्वतंत्रता के नेटवर्क’ लक्ष्यों को पूरा करने के लिए ंिहद-प्रशांत क्षेत्र के साथ रक्षा और सुरक्षा सहयोग पर बार-बार सहमति जताई है.
इस साल के आरंभ में विदेश नीति को लेकर एक अहम वक्तव्य में उन्होंने घोषणा की थी, ‘‘रूस और चीन साथ मिलकर काम कर रहे हैं, क्योंकि वे कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसी प्रौद्योगिकियों में मानकों को स्थापित करने का प्रयास करते हैं, संयुक्त सैन्य अभ्यासों के माध्यम से पश्चिमी प्रशांत महासागर और घनिष्ठ संबंधों के माध्यम से अंतरिक्ष में अपना प्रभुत्व जमाते हैं.’’
ट्रस के अनुसार, ‘‘चीन और रूस ने एक वैचारिक शून्यता की स्थिति ढूंढी है और उनकी नजर इसे भरने पर है. वे काफी उत्साहित हैं . हमने शीत युद्ध के बाद से ऐसा नहीं देखा है. स्वतंत्रता के समर्थक लोकतांत्रिक देशों के रूप में हमें इन खतरों का सामना करने के लिए तैयार होना चाहिए.’’ उन्होंने कहा, ‘‘नाटो के साथ-साथ हम आॅस्ट्रेलिया, भारत, जापान, इंडोनेशिया और इजÞरायल जैसे साझेदारों के साथ काम कर रहे हैं ताकि स्वतंत्रता के वैश्विक नेटवर्क का निर्माण किया जा सके.’’ विदेश मंत्री के तौर पर उन्होंने रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर भी मुखरता से अपनी बात रखी.
ब्रिटेन में नए प्रधानमंत्री के तौर पर भी उनके पास चुनौतियां कम नहीं होंगी. खास तौर पर यूरोप में संघर्ष की स्थिति के कारण ऊर्जा और ईंधन के दाम बढ़ने से जीवन निर्वाह पर खर्च बढ़ गया है. उन्होंने एक हालिया साक्षात्कार में कहा था, ‘‘एक हफ्ते के अंदर मैं यह सुनिश्चित करूंगी कि यह घोषणा की जाए कि हम ऊर्जा संकट और दीर्घकालिक आपूर्ति की चुनौती से कैसे निपटने जा रहे हैं जिससे र्सिदयों के मौसम के लिहाज से सही तैयारी हो सके. ’’ ट्रस साउथ वेस्ट नोरफोल्क से सांसद हैं. आॅक्सफोर्ड में जन्मी ट्रस के पिता प्रोफेसर और मां नर्स-शिक्षिका थीं. ट्रस स्कॉटलैंड, लीड्स और लंदन समेत ब्रिटेन के अलग-अलग हिस्सों में रही हैं. ट्रस ने अकाउंटेंट हग ओ लीअरी से विवाह किया और उनकी दो बेटियां हैं.