हॉकी के गौरवशाली इतिहास पर और किताबें लिखी जानी चाहिये : दिलीप टिर्की

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Tue, 18 Mar 2025 08:29 PM
हॉकी के गौरवशाली इतिहास पर और किताबें लिखी जानी चाहिये : दिलीप टिर्की
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नयी दिल्ली. भारत के महान डिफेंडर और हॉकी इंडिया के अध्यक्ष दिलीप टिर्की ने कहा कि पिछले सौ साल में भारतीय हॉकी के गौरवशाली इतिहास पर लिखा जाना चाहिये ताकि मौजूदा पीढी को इसके बारे में पता चले . भारत के लिये 400 से अधिक अंतरराष्ट्रीय मैच खेल चुके टिर्की ने 1975 विश्व कप जीत की स्वर्ण जयंती पर आई किताब ‘मार्च टू ग्लोरी’ के विमोचन के मौके पर कहा ,”भारतीय हॉकी का यह सौवां साल है और इसके गौरवशाली इतिहास की कहानियां नयी पीढी के सामने आनी चाहिये .” आठ बार की ओलंपिक चैम्पियन भारतीय टीम ने 15 मार्च 1975 को कुआलालम्पुर में एकमात्र विश्व कप जीता था . इस जीत पर हॉकी इतिहासकार के अरूमुघम और पत्रकार एरोल्ड डि क्रूज ने यह किताब लिखी है जिसमें ढाई सौ के करीब दुर्लभ तस्वीरें भी हैं .

टिर्की ने कहा ,” इसमें हमारी एकमात्र विश्व कप जीत के बारे में कई कहानियां ऐसी भी होंगी जो हमें भी नहीं पता है . मुझे यकीन है कि इससे मौजूदा और आने वाले खिलाड़ियों को प्रेरणा मिलेगी . हॉकी में इस तरह की और किताबों की जरूरत है .” वहीं पाकिस्तान के खिलाफ फाइनल में विजयी गोल दागने वाले अशोक कुमार ने कहा ,” मेरे सामने सारी यादें फ्लैशबैक की तरह घूम गई . कैसे मैने वह गोल किया था , कैसे हम चंडीगढ में अभ्यास करके कुआलालम्पुर गए थे और पाकिस्तान के खिलाफ वह मैच कैसे भूल सकता हूं .”

अजित पाल सिंह की कप्तानी में विश्व कप जीतने वाली टीम के सदस्य एच जे एस चिमनी , मॉस्को ओलंपिक 1980 में स्वर्ण पदक जीतने वाली भारतीय टीम के कप्तान जफर इकबाल, तोक्यो ओलंपिक 1964 की स्वर्ण पदक विजेता टीम के सदस्य हरबिंदर सिंह, पूर्व कोच अजय बंसल भी शिवाजी स्टेडियम पर आयोजित समारोह में मौजूद थे. हॉकी सिटीजन ग्रुप द्वारा प्रकाशित इस किताब में भारत की उस ऐतिहासिक जीत के अहम मैचों का ब्यौरा, खिलाड़ियों के बयान, टीम का माहौल सभी कुछ शामिल है .

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