मुंबई/बेंगलुरु/कोलकाता. ”एक राष्ट्र, एक चुनाव” की संभावनाएं तलाशने के लिए पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता में एक समिति गठित किये जाने के कुछ घंटे बाद शिवसेना (यूबीटी) के नेता संजय राउत ने इस कदम को देश में ‘चुनाव स्थगित करने की साजिश’ करार दिया. इसके साथ ही महा विकास आघाड़ी (एमवीए) में उनके सहयोगी और महाराष्ट्र विधानसभा में विपक्ष के नेता विजय वडेट्टीवार ने कहा कि इंडियन नेशनल डेवलपमेंट इंक्लूसिव एलायंस (इंडिया) की मौजूदा बैठक में उसके ‘लोगो’ का अनावरण नहीं हो पायेगा.
राउत ने यहां संवाददाताओं से कहा, ” हमें निष्पक्ष चुनाव की जरूरत है जो आजकल नहीं हो रहे हैं. एक राष्ट्र , एक चुनाव दरअसल चुनाव को स्थगित करने की एक साजिश है.” उन्होंने कहा कि जब रामनाथ कोविंद राष्ट्रपति थे तब भाजपा उनका सम्मान नहीं करती थी.
उन्होंने कहा , ” अब वह एक राष्ट्र, एक चुनाव की संभावना तलाशने के लिए एक समिति बनाकर उन्हें व्यस्त कर रही है.” राज्यसभा सदस्य राउत ने गणपति महोत्सव के दौरान 18 से 23 सितंबर तक संसद का विशेष सत्र बुलाने की आवश्यकता पर भी सवाल उठाया.
उन्होंने दावा किया, ” जब नियमित सत्र चल रहे होते हैं तब तो प्रधानमंत्री संसदीय कार्यवाही में कभी भाग लेते ही नहीं हैं.”
एक साथ चुनाव कराना वांछनीय लेकिन इसमें कई व्यावहारिक चुनौतियां : कृष्णमूर्ति
देश के पूर्व निर्वाचन आयुक्त टी एस कृष्णमूर्ति ने शुक्रवार को कहा कि लोकसभा और राज्यों के विधानसभा चुनाव एक साथ कराना वांछनीय है और खर्च में कमी सहित इसके कई फायदे भी हैं, लेकिन इसे लागू करने के लिए कई व्यावहारिक चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा.
सरकार ने ”एक राष्ट्र, एक चुनाव” की संभावनाएं तलाशने के लिए पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया है. इस संबंध में टिप्पणी के लिए संपर्क किए जाने पर कृष्णमूर्ति ने टेलीफोन पर पीटीआई-भाषा से कहा, ”संभावना पर विचार करना, उसकी जांच करना अच्छी बात है.” कृष्णमूर्ति के अनुसार एक साथ चुनाव कराने के फायदे और नुकसान दोनों हैं. पूर्व निर्वाचन आयुक्त कृष्णमूर्ति ने कहा, ” इसके (एक साथ चुनाव कराने के) कई फायदे हैं, इस अर्थ में कि आप चुनाव प्रचार आदि में इतना समय बर्बाद नहीं करेंगे. संभवत: चुनाव खर्च में भी कमी आयेगी.”
‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ की संभावना तलाशने के लिए समिति गठित किया जाना अलोकतांत्रिक: सीपीआई (एम)
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ की संभावना तलाशने के लिए पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता में समिति गठित किए जाने को शुक्रवार को “पूरी तरह अलोकतांत्रिक” करार दिया. पार्टी की केंद्रीय समिति के सदस्य सुजान सिंह चक्रवर्ती ने कहा कि ऐसे कदम से बहुलता में एकता की अवधारणा से “समझौता” किया जा रहा है. उन्होंने कहा, “इस तरह की समिति गठित करना बिल्कुल भी लोकतांत्रिक नहीं है.” चक्रवर्ती ने दावा किया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) संभवत: ” कांग्रेस और वाम दलों समेत विभिन्न पार्टियों के इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इनक्लूसिव अलायंस (इंडिया) से डर रही है.”