न्याय, नागरिक सुरक्षा संहिता, साक्ष्य संबंधी विधेयकों पर संसदीय समिति ने बैठक की, गृह सचिव ने प्रस्तुति दी

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Thu, 24 Aug 2023 07:14 PM
न्याय, नागरिक सुरक्षा संहिता, साक्ष्य संबंधी विधेयकों पर संसदीय समिति ने बैठक की, गृह सचिव ने प्रस्तुति दी
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नयी दिल्ली. संसद की एक समिति ने भारतीय न्याय प्रणाली पर दूरगामी प्रभाव डालने वाले तीन विधेयकों…’न्याय संहिता 2023′, ‘भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023’ और ‘भारतीय साक्ष्य विधेयक 2023’ पर विचार करने के लिए बृहस्पतिवार को विचार विमर्श शुरू किया और प्रस्तावित कानून के विभिन्न आयामों को लेकर गृह सचिव अजय भल्ला ने विस्तृत प्रस्तुति दी.

सूत्रों ने बताया कि द्रमुक सांसद दयानिधि मारन ने बैठक के दौरान विधेयकों के हिन्दी नामों पर अपनी असहमति जतायी और सुझाव दिया कि समिति को विभिन्न राज्यों के बार काउंसिल के सदस्यों के साथ विचार विमर्श करना चाहिए . समझा जाता है कि उन्होंने इस बात का भी उल्लेख किया कि आपराधिक सुनवाई जिला स्तरीय अदालतों में होती है.

सूत्रों ने बताया कि द्रमुक सांसद ने कहा कि समिति को राज्यों का दौरा करना चाहिए ताकि विभिन्न पक्षकारों के विचार सुन सके. इसका तृणमूल कांग्रेस के डेरेक ओ ब्रायन जैसे कुछ विपक्षी सदस्यों ने समर्थन किया. इन विधेयकों में प्रस्तावित नये कानूनों में ‘मॉब लिचिंग (भीड़ द्वारा पीट पीटकर हत्या)’ के लिए सात साल या आजीवन कारावास या मृत्युदंड का प्रस्ताव किया गया है और साथ ही राजद्रोह कानून को समाप्त करने की बात कही गई है . इसमें भगोड़े आरोपियों की अनुपस्थिति में उन पर मुकदमा चलाने का प्रस्ताव भी किया गया है.

केंद्रीय गृह सचिव अजय भल्ला ने इन तीन विधेयकों पर संसद की गृह मामलों संबंधी स्थायी समिति के सामने प्रस्तुति दी. वे 25 अगस्त और 26 अगस्त को भी इस विषय पर प्रस्तुति देंगे. राज्यसभा सचिवालय के नोटिस के मुताबिक, इन विधेयकों पर गृह मामलों संबंधी संसद की स्थायी समिति की बैठक 24 अगस्त, 25 अगस्त और 26 अगस्त को निर्धारित है.

इसमें कहा गया है कि गृह सचिव (अजय भल्ला) द्वारा ‘न्याय संहिता 2023’, ‘भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023’ और ‘भारतीय साक्ष्य विधेयक 2023’ के संबंध में प्रस्तुति दी जायेगी. भारतीय जनता पार्टी के सांसद बृजलाल गृह संबंधी संसद की स्थायी समिति के अध्यक्ष हैं. गृह मंत्री अमित शाह ने 11 अगस्त को लोकसभा में इन तीनों विधेयकों को पेश किया था.

सदन ने गृह मंत्री के प्रस्ताव पर तीनों विधेयकों को संसदीय स्थायी समिति को भेजने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी ताकि इन पर व्यापक विचार-विमर्श हो सके. बाद में लोकसभा के संसदीय मामलों संबंधी बुलेटिन में कहा गया था कि ‘भारतीय न्याय संहिता 2023’, ‘भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023’ और ‘भारतीय साक्ष्य विधेयक 2023’ को आगे विचार विमर्श एवं अध्ययन के लिए गृह मामलों संबंधी स्थायी समिति को भेज दिया गया है. बुलेटिन में कहा गया है कि समिति को तीन महीने में रिपोर्ट देनी है. ऐसे में समिति के पास विधेयकों की पड़ताल करने और शीतकालीन सत्र में संसद को रिपोर्ट सौंपने के लिए तीन महीने का समय है.

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