विपक्षी गठबंधन का नाम ‘इंडिया’ रखे जाने के कारण हिंदुस्तान को बुरा-भला कह रहे प्रधानमंत्री: राहुल

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Thu, 27 Jul 2023 10:09 PM
विपक्षी गठबंधन का नाम ‘इंडिया’ रखे जाने के कारण हिंदुस्तान को बुरा-भला कह रहे प्रधानमंत्री: राहुल
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नयी दिल्ली. कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने बृहस्पतिवार को आरोप लगाया कि विपक्षी गठबंधन का नाम ‘इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इन्क्लूसिव अलायंस’ (इंडिया) रखे जाने की वजह से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अब देश को ही बुरा-भला कह रहे हैं.
उन्होंने बेंगलुरु में भारतीय युवा कांग्रेस के अधिवेशन को डिजिटल माध्यम से संबोधित करते हुए यह दावा भी किया कि भारतीय जनता पार्टी एवं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) सत्ता पाने के लिए कुछ भी कर सकते हैं.

प्रधानमंत्री मोदी ने बृहस्पतिवार को राजस्थान के सीकर में एक सभा को संबोधित करते हुए कहा कि ‘यूपीए’ (संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन) का नाम बदला है ताकि ये आतंकवाद के सामने घुटने टेकने का अपना पाप छिपा सकें. मोदी ने कहा, ”इनका तरीका वही है जो हमेशा देश के दुश्मनों ने अपनाया है. पहले भी ‘इंडिया’ के नाम के पीछे अपने पाप को छुपाने का प्रयास किया गया है. इंडिया नाम तो ईस्ट इंडिया कंपनी में भी था. लेकिन वहां इंडिया नाम अपनी भारत भक्ति दिखाने के लिए नहीं, बल्कि भारत को लूटने के इरादे से लगाया गया था. कांग्रेस के शासनकाल में सिमी यानी स्टूडेंट इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया बना था. नाम में इंडिया था लेकिन मिशन, इंडिया को आतंकी हमलों से बर्बाद करने का था.”

राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री पर पलटवार करते हुए कहा, ”विपक्षी गठबंधन ने बहुत सुंदर नाम चुना, जो हमारे दिल से निकला, ‘इंडिया’. हम ‘इंडिया’ हैं. हमने जैसे ही यह नाम दिया, उसी ‘इंडिया’ को नरेन्द्र मोदी जी ने गाली देना शुरू कर दिया, उन्होंने ये भी नहीं सोचा कि वह इस पवित्र शब्द हिंदुस्तान को गाली दे रहे हैं.” कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने दावा किया कि यह ‘अहंकार’ है.

कांग्रेस नेता ने कहा, ”देश में विचारधारा की लड़ाई चल रही है. एक तरफ आरएसएस, भाजपा की विचारधारा और दूसरी तरफ कांग्रेस पार्टी की विचारधारा है. कांग्रेस की विचारधारा, संविधान की विचारधारा, देश को जोड़ने की विचारधारा, सबको एक साथ लेने की विचारधारा है. आरएसएस और भाजपा चाहते हैं कि कुछ चुने हुए लोग इस देश को चलाएं, पूरा का पूरा धन उन चुने हुए लोगों के हाथों में हो, सभी संस्थाएं उन्­हीं लोगों के नियंत्रण में रहें.”

उन्होंने दावा किया, ”आपको आश्­चर्य होगा कि प्रधानमंत्री जी मणिपुर के बारे में एक शब्­द नहीं बोले…आपको आश्­चर्य होगा कि प्रधानमंत्री, नरेन्­द्र मोदी मणिपुर क्­यों नहीं जा रहे हैं? मणिपुर के बारे में बोल क्­यों नहीं रहे हैं? क्­योंकि नरेन्­द्र मोदी जी कुछ गिने-चुने लोगों के प्रधानमंत्री हैं, आरएसएस के प्रधानमंत्री हैं, उनको मणिपुर से कोई लेना-देना नहीं हैं.” राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री जानते हैं कि उनकी विचारधारा ने मणिपुर को जलाया है.

उन्होंने कहा, ”आपको गारण्­टी देकर कह सकता हूं कि मणिपुर से प्रधानमंत्री के दिल में दर्द नहीं हुआ.” कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया, ”ये लोग मणिपुर को जला देंगे, बाकी देश को जला देंगे. इनको देश के दर्द से कुछ फर्क नहीं पड़ता, दुख से कोई फर्क नहीं पड़ता, इनको सिर्फ सत्ता चाहिए.” राहुल गांधी ने युवा कांग्रेस के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं का आह्वान करते हुए कहा, ”भाजपा-आरएसएस ने मणिपुर में नफरत के बाजार खोल लिए, चलिए हम जाकर मोहब्बत की दुकान खोलते हैं. ये लोग जहां भी नफरत फैलाते हैं, वहां जाकर आप मोहब्बत की दुकान खोलिए.”

इतने नकारात्मक क्यों हैं : ‘इंडिया’ को लेकर प्रधानमंत्री के तंज पर तृणमूल का सवाल

विपक्ष के 26 दलों के गठबंधन ‘इंडिया’ पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की टिप्पणियों पर पलटवार करते हुए बृहस्पतिवार को तृणमूल कांग्रेस ने सवाल किया कि आखिल वह इतने नकारात्मक क्यों हैं? राजस्थान में आज दिन में एक रैली में प्रधानमंत्री ने विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ (इंडियन नेशनल डेवेलपमेंट इनक्लूसिव एलायंस) पर निशाना साधते हुए ईस्ट इंडिया कंपनी और सिमी (स्टुडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया) का नाम लेकर लोगों को यह बताने का प्रयास किया कि वे दिग्भ्रमित ना हों.

प्रधानमंत्री द्वारा इस आलोचना पर तृणमूल कांग्रेस के सांसद डेरेक ओ’ब्रायन ने सवाल किया कि प्रधानमंत्री इतने ‘नकारात्मक क्यों हो रहे हैं’. ओ’ब्रायन ने एक वीडियो संदेश में कहा, ”हैलो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी! आप फिर ऐसा कर रहे हैं. हमारे नये नाम पर निशाना साध रहे हैं. इंडिया, जीतेगा भारत. क्या हुआ? आप इतने नकारात्मक क्यों हो रहे हैं? हम आपको एकदम वहीं ले आए हैं, जहां हम आपको लाना चाहते थे. प्रतिक्रिया दें. नकारात्मक रहें. और हम अपनी बात रखते रहेंगे. इंडिया, जीतेगा भारत.”

प्रधानमंत्री ने राजस्थान में अपने टिप्पणी में कहा था, ”पहले भी ‘इंडिया’ के नाम के पीछे अपने पाप को छुपाने का प्रयास किया गया है. इंडिया नाम तो ईस्ट इंडिया कंपनी में भी था. लेकिन वहां इंडिया नाम अपनी भारत भक्ति दिखाने के लिए नहीं बल्कि भारत को लूटने के इरादे से लगाया गया था. कांग्रेस के शासनकाल में सिमी यानी स्टूडेंट इस्लामिक मूवमेंट आफ इंडिया बना था, जिसने पाबंदी लगने के बाद अपना नाम बदलकर पीएफआई कर लिया. नाम में इंडिया था लेकिन मिशन, इंडिया को आतंकी हमलों से बर्बाद करने का था.” ओ’ब्रायन ने संसद में भारत के विदेशी संबंधों पर विदेश मंत्री एस. जयशंकर के बयान को लेकर उन पर तंज कसा और आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री के लिए मणिपुर के लोगों की तकलीफों से ज्यादा जरूरी पर्यटन है.

‘भारत की विदेशी नीति में ताजा विकास’ पर संसद के दोनों सदनों में दिए गए अपने बयान में जयशंकर ने कहा कि जी20 की भारत की अध्यक्षता ने देश की विदेश नीति को सक्रिय बनाने और ‘आत्मनिर्भर व विकसित भारत’ के लक्ष्य को प्राप्त करने में उत्प्रेरक का काम किया है.

तृणमूल कांग्रेस के प्रवक्ता व राज्यसभा में तृणमूल कांग्रेस के संसदीय दल के नेता ओ’ब्रायन ने कहा, ”संसद में आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मंत्री ने विदेश नीति पर 30 मिनट लंबा भाषण पढ.ा. सरकार की प्राथमिकताएं स्पष्ट हैं. मोदी के लिए मणिपुर में तकलीफ झेल रहे लोगों के मुकाबले पर्यटन ज्यादा जरूरी है.” संसद के बाहर मीडिया से बातचीत में जयशंकर ने अपने भाषण में व्यवधान डालने को लेकर विपक्षी दलों के नये गठबंधन की आलोचना की और कहा, वे ‘इंडिया’ होने का दावा करते हैं लेकिन वे लोग ‘इंडिया’ के राष्ट्र हित के बारे में सुनने को तैयार नहीं है, ऐसे में ”वे किस प्रकार का इंडिया हैं.”

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