
नयी दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ व्यापक मुद्दों पर वार्ता की। इस वार्ता में मुख्य रूप से वर्ष 2030 तक वार्षिक द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाकर 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने तथा रक्षा, ऊर्जा और महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में सहयोग को और मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित किया जा सकता है।
पुतिन ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए तीन दिवसीय यात्रा पर शुक्रवार सुबह नई दिल्ली पहुंचे। दोनों नेता दोनों देशों के पहले से ही मजबूत रक्षा सहयोग के और विस्तार पर भी गहन चर्चा कर सकते हैं। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने मंगलवार को कहा था कि दोनों पक्ष ब्रह्मोस मिसाइल के उन्नयन पर विचार कर रहे हैं। इसके साथ ही मॉस्को अपनी शेष एस-400 मिसाइल प्रणाली की आपूर्ति को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है और प्रस्तावित सुखोई-57 लड़ाकू विमानों की आपूर्ति पर भी चर्चा कर रहा है।
रूसी अधिकारी ने बताया कि दोनों देशों के बीच ऊर्जा संबंध काफी मजबूत बने हुए हैं और दोनों पक्ष भारत में नए असैन्य परमाणु रिएक्टर स्थापित करने की योजना को लेकर बातचीत करने पर विचार कर रहे हैं। इससे पहले मोदी और पुतिन की मुलाकात पिछले सप्ताह बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के शिखर सम्मेलन के दौरान हुई थी। वहां प्रधानमंत्री ने संघर्ष को तुरंत समाप्त करने का आह्वान करते हुए रूसी नेता से ”अंतहीन युद्ध से युद्ध के अंत” की ओर बढ़ने का आग्रह किया था।
उनकी आज की बातचीत में यूक्रेन संघर्ष और शांति के रोडमैप के प्रमुखता से शामिल रहने की उम्मीद है। पिछले कुछ दिनों में संघर्ष को सुलझाने का रास्ता तलाशने के लिए अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन सहित अन्य माध्यमों से नए सिरे से प्रयास किए गए हैं।
मोदी-पुतिन वार्ता से पहले सूत्रों ने बताया कि दोनों पक्ष 2030 तक 100 अरब डॉलर के महत्वाकांक्षी व्यापार लक्ष्य को हासिल करने पर भी ध्यान केंद्रित करेंगे। उन्होंने कहा कि रूस के साथ औद्योगिक सहयोग का विस्तार, रेलवे क्षेत्र और सुरंग निर्माण में सहयोग, स्टील वैल्यू चेन का विकास और भारतीय निर्यातकों के लिए रूसी बाजार तक पहुंच बढ़ाना भी वार्ता का हिस्सा रह सकता है।
इसके अलावा, दोनों नेताओं के बीच असैन्य परमाणु सहयोग को मजबूत करने पर विचार-विमर्श की उम्मीद है, जिसमें ईंधन चक्र और जीवन चक्र का समर्थन शामिल है। सूत्रों के मुताबिक, रूस में कुशल भारतीय श्रमिकों की आमद बढ़ाने और महत्वपूर्ण खनिजों में सहयोग पर भी चर्चा होना तय है।



