
पुरी/भुवनेश्वर/कोलकाता. समुद्र तटीय तीर्थ नगरी पुरी में 27 जून को भगवान जगन्नाथ की वार्षिक रथ यात्रा के मद्देनजर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करते हुए करीब 10 हजार सुरक्षाकर्मी तैनात किये गये हैं. पुलिस ने बुधवार को जानकारी दी. एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि इसके अलावा, निगरानी के लिए शहर में विभिन्न स्थानों पर 250 से अधिक कत्रिम मेधा (एआई) युक्त कैमरे लगाए गए हैं .
उन्होंने बताया कि केंद्रीय सशस्त्र बलों सहित सुरक्षार्किमयों ने भगवान बलभद्र, देवी सुभद्रा और भगवान जगन्नाथ की एक झलक पाने के लिए देश-विदेश से शहर में आने वाले लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ को संभालने तथा खुद को तैयार करने के लिए बुधवार को एक रिहर्सल में भाग लिया. रथयात्रा के दौरान देवताओं को साल में एक बार 12 वीं सदी में निर्मित इस मंदिर से बाहर लाया जाता है. भगवान के दर्शन के लिए इस मंदिर में पूरे साल हजारों की संख्या में श्रद्धालु आते हैं. एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि पहलगाम आतंकी हमले के बाद इस साल की रथयात्रा का आयोजन हो रहा है इसलिए विभिन्न पहलुओं को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा व्यवस्था की गई है.
ओडिशा के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) वाई बी खुरानिया ने इस वृहद महोत्सव के लिए किए गए सुरक्षा इंतजामों को अंतिम रूप देने के बाद कहा, ”पुरी में पहली बार एक एकीकृत कमान और नियंत्रण कक्ष स्थापित किया गया है. उत्तरा चक और पुरी शहर के बीच तथा पुरी और कोणार्क के बीच मार्ग पर लगभग 275 एआई-सक्षम सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं. इन कैमरों से लाइव विजुअल की चौबीसों घंटे निगरानी की जाएगी.” खुरानिया ने कहा कि एआई संचालित निगरानी प्रणाली यातायात की गतिविधियों, भीड़ की बढ़ती संख्या पर नजर रखेगी और सुरक्षार्किमयों को तत्काल निर्णय लेने और किसी भी आपात स्थिति का सामना करने में मदद करेगी. डीजीपी ने कहा कि प्रमुख स्थानों पर उप-नियंत्रण कक्ष भी स्थापित किए गए हैं.
प्रदेश पुलिस प्रमुख ने कहा खतरे के आकलन के बाद पहली बार इमारतों की छतों पर एनएसजी (राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड) के निशानेबाज (स्नाइपर्स) भी तैनात किए गए हैं, जबकि हवाई निगरानी के लिए ड्रोन रोधी तकनीक और पुलिस संचालित ड्रोन का भी इस्तेमाल किया जाएगा. उन्होंने कहा कि तोड़फोड़ रोधी टीमें, बम निरोधक दस्ते और श्वान दस्तों को भी तैनात किए गया गया है. त्योहार के लिए तैनात किए गए 10,000 सुरक्षार्किमयों में ओडिशा पुलिस और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) की आठ कंपनियां शामिल हैं.
उन्होंने कहा कि समुद्र के किनारे पूरी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ओडिशा की मरीन पुलिस, तटरक्षक बल और भारतीय नौसेना की तैनाती की गई है. खुरानिया ने कहा कि आगंतुकों को पार्किंग की उपलब्धता, रूट मैप और खाली पार्किंग स्थलों की जानकारी देने में सहायता के लिए एक रियल-टाइम चैटबॉट एप्लिकेशन भी लॉन्च किया गया है.
त्योहार के पहले और दूसरे दिन करीब 15 लाख लोगों के जुटने की उम्मीद करते हुए डीजीपी खुरानिया ने जोर देकर कहा कि भक्तों की उचित सेवा और सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाएगी. उन्होंने कहा, ”श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए व्यापक प्रबंध किए गए हैं. रथ यात्रा की ड्यूटी के लिए अनुभवी पुलिस अधिकारियों को तैनात किया गया है.” खुफिया निदेशक आर पी कोचे ने बताया कि चूंकि श्री जगन्नाथ मंदिर उच्च सुरक्षा वाले क्षेत्र में स्थित है, इसलिए रथयात्रा के दौरान इसका महत्व काफी बढ़ जाता है.
कोचे ने बताया कि इसके अलावा श्री गुंडिचा मंदिर और तीनों रथों के लिए विशेष सुरक्षा व्यवस्था की गई है. अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (आधुनिकीकरण) सौमेंद्र प्रियदर्शी ने बताया कि भीड़ को नियंत्रित करने के लिए समुचित व्यवस्था की गई है. एडीजी (कानून व्यवस्था) संजय कुमार ने बताया कि रथ यात्रा को व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराने के लिए पुलिस प्रशासन के अधिकारियों/कर्मचारियों का सहयोग जरूरी है. श्री जगन्नाथ की रथ यात्रा 27 जून को शुरू होगी और आठ जुलाई को भगवान की वापसी के साथ समाप्त होगी.
पुरी जगन्नाथ मंदिर से मोदक की चोरी नहीं हुई: मंत्री
ओडिशा के कानून मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन ने स्पष्ट किया कि पुरी के जगन्नाथ मंदिर से मोदक की कोई चोरी नहीं हुई है. इससे पहले सेवायतों के एक वर्ग ने मोदक चोरी होने का आरोप लगाया था. मोदक एक विशेष प्रकार का लड्डू होता है जिसका रथ यात्रा उत्सव से पहले एक अनुष्ठान के तहत मंदिर के देवताओं को भोग लगाया जाता है.
मंत्री ने मंगलवार को कहा, ह्लश्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (एसजेटीए) के मुख्य प्रशासक अरबिंद पाधी द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार मंदिर से मोदक की कोई चोरी नहीं हुई है.ह्व विवाद सामने आने पर पाधी ने एसजेटीए अधिकारियों को जांच का आदेश दिया, जिसमें पाया गया कि मोदक की कोई चोरी नहीं हुई है. वैद्य सेवकों (आयुर्वेदिक चिकित्सकों) का एक समूह भगवान के ‘अनासर’ काल के दौरान मंदिर में मोदक की आपूर्ति करता है. ऐसा माना जाता है कि ‘अनासर’ काल के दौरान देवता बीमार पड़ जाते हैं. यह भी माना जाता है कि मोदक खाने के बाद भगवान ठीक हो जाते हैं.
विवाद उस समय शुरू हुआ जब भगवान बलभद्र के ‘बड़ाग्रही’ (अंगरक्षक) हलधर दास महापात्रा ने दावा किया कि कड़ी सुरक्षा में रखे गए 313 ‘मोदकों’ में से 70 गायब हो गए हैं. माना जाता है कि मोदक चोरी होने से उनकी पवित्रता खत्म हो जाती है. उन्होंने एसजेटीए में औपचारिक लिखित शिकायत दर्ज कराई. पत्रकारों से बात करते हुए पाधी ने भी चोरी के आरोपों को खारिज कर दिया.
पुरी जगन्नाथ मंदिर का प्रसाद तमलुक शहर में वितरित किया जाएगा: शुभेंदु अधिकारी
पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने बुधवार को कहा कि पुरी के जगन्नाथ मंदिर का प्रसाद 27 जून को रथयात्रा के दिन से पांच दिनों तक तमलुक शहर के एक मंदिर से लोगों के बीच वितरित किया जाएगा. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता ने यह घोषणा ऐसे समय में की है जब राज्य की तृणमूल कांग्रेस सरकार दीघा के जगन्नाथ मंदिर का प्रसाद पूरे पश्चिम बंगाल में लोगों में वितरित कर रही है. इस मंदिर का उद्घाटन 30 अप्रैल को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने किया था.
तमलुक और दीघा दोनों ही राज्य के पूर्व मेदिनीपुर जिले में स्थित हैं. अधिकारी ने सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस पर दीघा में जगन्नाथ मंदिर के प्रसाद के नाम पर स्थानीय मिठाइयां बांटने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि पुरी जगन्नाथ मंदिर का प्रसाद तमलुक स्थित गौरांग महाप्रभु मंदिर से रथ यात्रा के दिन से पांच दिनों तक लोगों के बीच वितरित किया जाएगा.
तृणमूल कांग्रेस ने शुभेंदु अधिकारी पर धर्म और राजनीति के घालमेल का आरोप लगाया. तृणमूल कांग्रेस के प्रवक्ता जयप्रकाश मजूमदार ने कहा, ”केवल शुभेंदु अधिकारी ही धर्म को लेकर प्रतिस्पर्धा कर सकते हैं.” उन्होंने यह भी कहा कि जब आम बंगाली लोग दुर्गा पूजा उत्सव के दौरान देवी को प्रणाम करने जाते हैं, तो वे स्थानीय दुकानों से ही मिठाइयां खरीदते हैं. तृणमूल नेता ने इस मुद्दे पर राजनीति नहीं करने का आग्रह करते हुए कहा कि ”अधिकारी धर्म के नाम पर फुटबॉल खेल रहे हैं”.
ओडिशा पुलिस ने पुरी रथ यात्रा से पहले पर्यटकों को फर्जी होटल वेबसाइटों के प्रति आगाह किया
ओडिशा के पुरी में वार्षिक रथ यात्रा से पहले राज्य पुलिस के अपराध जांच विभाग (सीआईडी) ने बुधवार को पर्यटकों को फर्जी होटल वेबसाइटों को लेकर आगाह किया. पुलिस ने कहा कि उसने 11 ऐसी वेबसाइटों को हटा दिया है, क्योंकि ओडिशा में विशेषकर पुरी, भुवनेश्वर और कटक जैसे स्थानों में होटल बुकिंग से संबंधित फर्जीवाड़ा के मामले बढ़ रहे हैं.
आपराधिक जांच विभाग (सीआईडी) ने एक बयान में कहा कि धोखेबाज नकली वेबसाइट और सोशल मीडिया पेज बनाते हैं जो वास्तविक लगते हैं और लोगों को सस्ती दरों, तत्काल सौदों और गारंटीकृत होटल बुकिंग की पेशकश करते हैं. सीआईडी ??ने कहा कि फर्जी वेबसाइटें पूरा भुगतान मांगती हैं और पर्यटकों को लुभाने के लिए फर्जी ग्राहक सेवा फोन नंबर और रसीद का इस्तेमाल करती हैं.
सीआईडी ने कहा, ” इनमें से कई फर्जी वेबसाइट ऑनलाइन सबसे ऊपर दिखाई देती हैं, जिससे उन्हें पहचानना मुश्किल हो जाता है और पीड़ितों को अक्सर गंतव्य तक पहुंचने के बाद ही धोखाधड़ी का एहसास होता है.” पुलिस को साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 के जरिए ऐसी 317 शिकायतें मिली हैं. ऐसी शिकायतों पर कार्रवाई करते हुए सीआईडी के अधिकारियों ने तुरंत 11 फर्जी होटल बुकिंग वेबसाइटों को हटा दिया.



