सड़कें नमाज के लिए नहीं, यातायात के लिए हैं, बाकियों को हिंदुओं से अनुशासन सीखना चाहिए: आदित्यनाथ

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Tue, 01 Apr 2025 10:17 PM
सड़कें नमाज के लिए नहीं, यातायात के लिए हैं, बाकियों को हिंदुओं से अनुशासन सीखना चाहिए: आदित्यनाथ
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लखनऊ. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सड़कों पर नमाज अदा करने के खिलाफ मुसलमानों को प्रशासन द्वारा दी गई चेतावनी का बचाव करते हुए कहा है कि सड़कें यातायात के लिए होती हैं. आदित्यनाथ ने मुसलमानों से यह भी कहा कि वे हिन्दुओं से धार्मिक अनुशासन सीखें, जो विशाल महाकुंभ मेले में शामिल हुए लेकिन इस दौरान अपराध, तोड़-फोड़ या उत्पीड़न की कोई घटना नहीं हुई.

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने ‘पीटीआई-भाषा’ से एक विशेष साक्षात्कार के दौरान वक्फ (संशोधन) विधेयक के आलोचकों पर भी निशाना साधा. उन्होंने कहा कि वक्फ बोर्ड स्वार्थी हितों के साथ-साथ ”लूट खसोट” के अड्डा बन गए हैं और इन्होंने मुसलमानों के कल्याण के लिए बहुत कम काम किया है.

योगी आदित्यनाथ ने हिंदू मंदिरों और मठों द्वारा शिक्षा एवं स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में किए गए दान का उदाहरण देते हुए सवाल किया कि क्या कई गुना अधिक संपत्ति होने के बावजूद किसी वक्फ बोर्ड ने इस तरह का कल्याणकारी कार्य किया है? उन्होंने कहा, ” देखिए, हर अच्छे कार्य का विरोध होता है. वैसे ही वक्फ संशोधन विधेयक पर भी हो-हल्ला हो रहा है. ये जो हो-हल्ला कर रहे हैं, मैं उनसे पूछना चाहता हूं कि क्या कोई ऐसा कल्याणकारी काम है जो वक्फ बोर्ड के माध्यम से किया गया हो? सारे समाज की बात तो छोड़िए, क्या वक्फ संपत्तियों का इस्तेमाल मुसलमानों के कल्याण के लिए किया गया है?”

मुख्यमंत्री ने कहा, ”ये व्यक्तिगत स्वार्थ के अड्डे बने हुए हैं. चंद लोगों की लूट- खसोट के अड्डे बने हुए हैं. यह (वक्फ) किसी भी सरकारी संपत्ति पर जबरन कब्जा करने का माध्यम बना हुआ है और सुधार इस समय की मांग है तथा हर सुधार का विरोध होता है. देश, काल और परिस्थिति के अनुसार हमें उसके लिए तैयार होना चाहिए और मुझे लगता है कि इसका लाभ मुस्लिम समाज को भी होगा.” योगी एवं नेता आदित्यनाथ हिंदुत्व को लेकर अपने कट्टर विचारों और अपराधियों के खिलाफ सख्त प्रशासक की छवि के कारण भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सबसे लोकप्रिय नेताओं में से एक बनकर उभरे हैं. उन्होंने मुसलमानों के खिलाफ भेदभाव को लेकर आलोचनाओं को खारिज किया.

जिन राज्यों के नेता भाषा विवाद को हवा दे रहे हैं, वे पिछड़ रहे है: योगी आदित्यनाथ
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भाषा को लेकर की जा रही राजनीति की आलोचना की और कहा कि जिन राज्यों के नेता इस विवाद को हवा दे रहे हैं, वे राज्य पिछड़ते जा रहे हैं. आदित्यनाथ ने ‘पीटीआई-भाषा’ के साथ एक साक्षात्कार में यह भी कहा कि उत्तर प्रदेश में रोजगार के बड़े अवसर पैदा हो रहे हैं और इस तरह की संकीर्ण राजनीति युवाओं की संभावनाओं को नुकसान पहुंचा सकती है.

मुख्यमंत्री ने कहा, ”उत्तर प्रदेश में रोजगार के नए अवसर खुल रहे हैं, नौकरियां सृजित की जा रही हैं. जो लोग भाषा को लेकर विवाद पैदा कर रहे हैं, वे अपने राजनीतिक हितों को पूरा कर सकते हैं लेकिन एक तरह से युवाओं के लिए रोजगार के अवसरों पर प्रहार कर रहे हैं.” जब उनसे पूछा गया कि क्या वह तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन का जिक्र कर रहे हैं, तो उन्होंने कहा, ”वो कोई भी हों, वे यही कर रहे हैं. यही कारण है कि ये राज्य धीरे-धीरे पिछड़ते जा रहे हैं.” उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने कहा, ”उनके पास कोई अन्य मुद्दा नहीं है और वे अपने राजनीतिक हितों को हासिल करने के लिए भावनाओं को भड़का रहे हैं.” आदित्यनाथ ने कहा कि तमिल, तेलुगु, मलयालम, कन्नड़, बंगाली या मराठी जैसी भाषाएं राष्ट्रीय एकता की आधारशिला बन सकती हैं.

राजनीति मेरे लिए ‘फुल टाइम जॉब’ नहीं, मैं असल में योगी हूं: आदित्यनाथ

खरी खरी बोलने वाले और हमेशा अपने विचारों को लेकर मुखर उत्तर प्रदेश के संन्यासी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मुसलमानों के लिए एक स्पष्ट संदेश दिया है: आपको राज्य के विकास में उचित हिस्सा मिलेगा, लेकिन सिर्फ इसलिए विशेष रियायतों की उम्मीद न करें कि आप अल्पसंख्यक हैं.

इसका मतलब साफ है कि आप सड़कों पर नमाज नहीं पढ़ सकते, या कोई अवैध गतिविधि नहीं कर सकते. अगर आप ऐसा करते हैं, तो ”बुलडोजर न्याय” का सामना करने के लिए तैयार रहें. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने ‘पीटीआई-भाषा’ के साथ एक विशेष साक्षात्कार के दौरान वक्फ (संशोधन) विधेयक के आलोचकों पर भी निशाना साधा. उन्होंने कहा कि वक्फ बोर्ड स्वार्थी हितों के साथ-साथ ”लूट खसोट” के अड्डा बन गए हैं और इन्होंने मुसलमानों के कल्याण के लिए बहुत कम काम किया है.

साक्षात्कार में उन्होंने देश में अपनी बढ़ती लोकप्रियता, आरएसएस (जिसके वह कभी सदस्य नहीं रहे) के साथ अपने संबंधों, कुछ केंद्रीय नेताओं के साथ उनकी कथित अनबन, प्रधानमंत्री बनने की उनकी महत्वाकांक्षा, राष्ट्रीय भाषा के रूप में हिंदी और कांग्रेस पार्टी के भविष्य के बारे में भी बात की.

आदित्यनाथ ने संभावित प्रधानमंत्री के रूप में उनके प्रति बढ़ते समर्थन के बारे में पूछे जाने पर कहा, ”राजनीति मेरे लिए एक ‘फुल टाइम जॉब’ नहीं है. इस समय मैं यहां काम कर रहा हूं लेकिन वास्तविकता में मैं हूं तो एक योगी ही.” यह पूछे जाने पर कि उनकी राजनीति में कब तक बने रहने की योजना है, मुख्यमंत्री ने कहा, ”इसकी भी एक समयसीमा होगी.” मुख्यमंत्री ने कहा कि उनका प्राथमिक काम उत्तर प्रदेश के लोगों की सेवा करना है जो उनकी पार्टी ने उन्हें सौंपा है.

उन्होंने कहा, ”मैं उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री हूं और पार्टी ने मुझे राज्य के लोगों की सेवा करने के लिए यहां रखा है.” योगी आदित्यनाथ हिंदुत्व को लेकर अपने कट्टर विचारों और अपराधियों के खिलाफ सख्त प्रशासक की छवि के कारण भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सबसे लोकप्रिय नेताओं में से एक बनकर उभरे हैं. उन्होंने मुसलमानों के खिलाफ भेदभाव को लेकर आलोचनाओं को खारिज किया.

उन्होंने कहा कि राज्य की आबादी में मुसलमानों की संख्या 20 प्रतिशत है लेकिन सरकारी कल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थियों में उनकी हिस्सेदारी 35 से 40 प्रतिशत है. आदित्यनाथ ने कहा कि वह न तो भेदभाव में विश्वास करते हैं और न ही तुष्टीकरण में. मेरठ में सड़कों पर नमाज अदा करने के खिलाफ उनके प्रशासन द्वारा दी गई चेतावनी पर उठे विवाद के बारे में पूछे जाने पर मुख्यमंत्री ने सरकार के कदम का दृढ़ता से बचाव करते हुए कहा कि इसमें कुछ भी गलत नहीं है.

उन्होंने कहा, ”सड़क चलने के लिए होती है और जो लोग (इस फैसले के खिलाफ) बोल रहे हैं उन्हें हिंदुओं से अनुशासन सीखना चाहिए. कुल 66 करोड़ लोग प्रयागराज में (महाकुंभ में) आए. कहीं कोई लूटपाट नहीं, कहीं कोई आगजनी नहीं, कहीं कोई छेड़खानी नहीं, कहीं कोई तोड़फोड़ नहीं, कहीं कोई अपहरण नहीं, यह होता है अनुशासन…यह है धार्मिक अनुशासन…अगर आपको सुविधा चाहिए तो उस अनुशासन को भी मानना सीखिए.” वक्फ (संशोधन) विधेयक के आलोचकों को निशाने पर लेते हुए उन्होंने कहा कि वक्फ बोर्ड स्वार्थी हितों के साथ-साथ ”लूट खसोट” के अड्डा बन गए हैं और इन्होंने मुसलमानों के कल्याण के लिए बहुत कम काम किया है.

आदित्यनाथ ने हिंदू मंदिरों और मठों द्वारा शिक्षा एवं स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में किए गए दान का उदाहरण देते हुए सवाल किया कि क्या कई गुना अधिक संपत्ति होने के बावजूद किसी वक्फ बोर्ड ने इस तरह का कल्याणकारी कार्य किया है? उन्होंने कहा, ”ये व्यक्तिगत स्वार्थ के अड्डे बने हुए हैं. चंद लोगों की लूट- खसोट के अड्डे बने हुए हैं. यह (वक्फ) किसी भी सरकारी संपत्ति पर जबरन कब्जा करने का माध्यम बना हुआ है और सुधार इस समय की मांग है तथा हर सुधार का विरोध होता है. देश, काल और परिस्थिति के अनुसार हमें उसके लिए तैयार होना चाहिए और मुझे लगता है कि इसका लाभ मुस्लिम समाज को भी होगा.”

त्वरित न्याय के तौर पर उनके ”बुलडोजर मॉडल” को अब अन्य राज्यों द्वारा भी अपनाया जा रहा है, हालांकि इसकी वैधता पर लगातार सवाल उठते रहे हैं. आदित्यनाथ ने इस मामले में ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा कि वह इस मॉडल को उपलब्धि नहीं बल्कि आवश्यकता मानते हैं. उन्होंने कहा कि बुलडोजर का उपयोग बुनियादी ढांचे का निर्माण करने और अतिक्रमण हटाने के लिए भी किया जा सकता है. मुख्यमंत्री ने कहा, ”मुझे लगता है कि हमने उसका बेहतर तरीके से इस्तेमाल करना सिखाया है.” आदित्यनाथ ने दावा किया कि ‘बुलडोजर कार्रवाई’ के खिलाफ उच्चतम न्यायालय की कोई भी प्रतिकूल टिप्पणी उनके राज्य से संबंधित नहीं है.

हालांकि, उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को फिर से उत्तर प्रदेश सरकार और प्रयागराज प्रशासन की खिंचाई करते हुए प्रयागराज में मकानों को गिराने की कार्रवाई को ”अमानवीय और अवैध” बताया. शीर्ष अदालत ने सरकार को मुआवज.ा देने का भी आदेश दिया.
धर्म और राजनीति के संबंध में अपना दृष्टिकोण स्पष्ट करते हुए आदित्यनाथ ने कहा, ”राजनीति अगर स्वार्थ के लिए है तो वह समस्या पैदा करेगी. राजनीति अगर परमार्थ के लिए है तो वह समाधान देगी. हमें तय करना होगा कि हमें समाधान का रास्ता अपनाना है या समस्या का रास्ता अपनाना है और मुझे लगता है कि धर्म भी यही (सिखाता) है.”

यह पूछे जाने पर कि वह भविष्य की पीढि.यों द्वारा किस तरह याद किये जाना चाहेंगे, आदित्यनाथ ने कहा, ”देखिए मुझे याद क्यों करेंगे मैं तो वर्तमान में ही हूं.” यह पूछे जाने पर कि क्या उन्हें लगता है कि वह 100 साल बाद के लिए अपनी कोई विरासत छोड़ कर जाएंगे आदित्यनाथ ने कहा, ”…नाम नहीं, हमारे काम आने वाली पीढ़ी के लिए स्मरणीय होंगे. किसी की पहचान उसके काम से होनी चाहिए, नाम से नहीं.”

आदित्यनाथ ने भाषा को लेकर की जा रही राजनीति की आलोचना की और कहा कि जिन राज्यों के नेता इस विवाद को हवा दे रहे हैं, वे राज्य पिछड़ते जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि तमिल, तेलुगु, मलयालम, कन्नड़, बंगाली या मराठी जैसी भाषाएं राष्ट्रीय एकता की आधारशिला बन सकती हैं. उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार अपने छात्रों को तमिल, तेलुगु, मलयालम, कन्नड़, बंगाली और मराठी जैसी भाषाएं सिखा रही है. उन्होंने पूछा, ”क्या इससे उत्तर प्रदेश किसी भी मायने में छोटा हो गया? क्या यह उत्तर प्रदेश को कमतर करके दिखाता है?” हालांकि, उन्होंने विस्तृत जानकारी नहीं दी. वहीं, कांग्रेस नेता कार्ति चिदंबरम ने उन्हें दक्षिण भारतीय भाषाएं पढ़ाने वाले स्कूलों की सूची उपलब्ध कराने की चुनौती दी.

मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी का मानना है कि हिंदी का सम्मान होना चाहिए लेकिन भारत ने त्रिभाषा फार्मूला अपनाया है.
आदित्यनाथ ने कहा, ”यह त्रिभाषा फार्मूला सुनिश्चित करता है कि क्षेत्रीय भाषाओं को भी समान सम्मान मिले. हर भाषा की अपनी विशेषता होती है जो राष्ट्रीय एकता की आधारशिला बनती है.” उन्होंने पिछले आठ वर्षों में उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था के देश की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने तथा इस अवधि में राज्य की प्रति व्यक्ति आय दोगुनी हो जाने की भी चर्चा की.

मुख्यमंत्री ने 2029-30 तक राज्य की प्रति व्यक्ति आय को राष्ट्रीय औसत के बराबर लाने का वादा किया. उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की प्रति व्यक्ति आय आजादी के समय राष्ट्रीय औसत के बराबर थी, लेकिन 2016-17 तक यह गिरकर एक तिहाई स्तर पर आ गई.
कांग्रेस के भविष्य के बारे में उन्होंने कहा कि पार्टी अपने मूल्यों से भटक चुकी है और अस्तित्व के संकट का सामना कर रही है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस जिस रास्ते पर जा चुकी है, ऐसे में लगता नहीं कि उसके आगे पनपने या बढ़ने की कोई संभावना बची हुई है.
बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर सवाल पर उन्होंने कहा कि राज्य में फिर से राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की सरकार बनेगी.
आदित्यनाथ ने उनके और भाजपा के केंद्रीय नेताओं के बीच मतभेद की खबरों को खारिज करते हुए कहा कि वह पार्टी की वजह से मुख्यमंत्री की कुर्सी पर हैं.

मुख्यमंत्री ने विपक्षी दलों के इस आरोप को खारिज कर दिया कि सरकार ने भगदड़ की घटना में मरने वाले लोगों की वास्तविक संख्या छिपाई है. उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों के शासन के दौरान जब कुंभ का आयोजन होता था तो सैकड़ों लोग मारे जाते थे, इसलिए वे इस बार भी सैकड़ों लोगों के मारे जाने की बात कर रहे हैं.

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) द्वारा उनको समर्थन दिए जाने के संबंध में पूछे गए प्रश्न पर, आदित्यनाथ ने कहा कि जो भारत के प्रति निष्ठावान होगा, आरएसएस उसको पसंद करेगा, जो भारत के लिए निष्ठावान नहीं होगा, आरएसएस उसको रास्ते पर लाने के लिए, सन्मार्ग पर लाने के लिए प्रेरणा ही दे सकता है.

कांग्रेस जिस रास्ते पर जा चुकी है, मुझे नहीं लगता कि उसके पनपने की कोई संभावना बची है: योगी
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि कांग्रेस अपने मूल से भटक चुकी है, अपने मूल्यों से भटक चुकी है और अपने अस्तित्व के संकट का सामना कर रही है, और वह अपना मृत्यु प्रमाणपत्र स्वयं लिखने की ओर अग्रसर है. योगी आदित्यनाथ ने ‘पीटीआई-भाषा’ के साथ एक विशेष साक्षात्कार में कहा कि कांग्रेस ने जो रास्ता अपनाया है, उसे देखते हुए देश में उसके बढ.ने या पनपने की कोई संभावना नहीं है और लोग अब उसका समर्थन नहीं कर रहे हैं.

इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि राजग एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के राष्ट्रीय और नीतीश कुमार के राज्य नेतृत्व में बिहार विधानसभा चुनाव जीतेगा. मुख्यमंत्री ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ”कांग्रेस जिस रास्ते पर जा चुकी है. मुझे नहीं लगता कि उसके आगे पनपने या बढ.ने की कोई संभावना बची हुई है. अपने मूल से जब कोई भटक जाता है, अपने मूल्यों से जब कोई भटक जाता है तो उसके सामने अस्तित्व का संकट खड़ा हो जाता है, और इसका सबसे बड़ा उदाहरण कांग्रेस (के रूप में) आपके सामने है.” उन्होंने कहा कि कांग्रेस अपना मृत्यु प्रमाण पत्र लिखने की ओर बढ. चुकी है.

देश की आजादी की लड़ाई के दौरान देश की जनता ने कांग्रेस को ‘भारत की आत्मा’ के रूप में माना और स्वतंत्र भारत में इन्होंने (लोगों की भावनाओं के साथ) खिलवाड़ करना शुरू किया. यह पूछे जाने पर कि कांग्रेस की मौजूदा स्थिति के लिये कौन जिम्मेदार है, उप्र के मुख्यमंत्री ने कहा, ”(कांग्रेस की इस स्थिति के लिये) राहुल गांधी भी (जिम्मेदार) हैं और कांग्रेस के अन्य लोग भी (जिम्मेदार) हैं, जो कांग्रेस की नीतियों को तय करते हैं और कांग्रेस का एजेंडा निर्धारित करते हैं.” योगी ने आरोप लगाया कि बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर द्वारा बनाए गए संविधान में इन्होंने पहला संशोधन ‘मीडिया का गला घोंटने’ को लेकर किया.

विपक्ष चाहता था पिछली कुंभ त्रासदियों की तरह इस बार भी सैकड़ों मौतें होतीं : योगी आदित्यनाथ

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि विपक्ष ह्लचाहता था कि पिछली कुंभ त्रासदियों की तरह इस बार भी सैकड़ों मौतें होतींह्व, लेकिन उनकी सरकार की ओर से की गई शानदार व्यवस्था और जनता के सहयोग से यह सुनिश्चित हुआ कि जनवरी में हुई भगदड़ की घटना के दौरान प्रत्येक पीड़ित को तत्काल चिकित्सा सुविधा मिली.

‘पीटीआई-भाषा’ के साथ एक विशेष साक्षात्कार में योगी ने अस्पताल में पीड़ितों से हुई मुलाकात को याद किया. उन्होंने बताया कि पीड़ितों ने उनसे कहा, ह्लसरकार दोषी नहीं है. हम पवित्र स्नान के लिए हड़बड़ी में घाटों की तरफ भाग रहे थे… पुलिस ने हमें रोकने की कोशिश की, लेकिन हम तड़के चार बजे तक घाटों पर स्नान करने के लिए आतुर थे.ह्व मुख्यमंत्री ने बताया कि श्रद्धालुओं ने उनसे कहा कि वे ह्लअफरा-तफरी में घिर गए, लेकिन किसी के खिलाफ कोई कार्रवाई मत कीजिए.ह्व योगी ने विपक्षी दलों के इस आरोप को खारिज कर दिया कि सरकार ने भगदड़ की घटना में मरने वाले लोगों की वास्तविक संख्या छिपाई है. उन्होंने 2025 के महाकुंभ मेले में किए गए सुरक्षा उपायों की तुलना पिछली सरकारों में हुए ह्लकुप्रबंधनह्व से की.

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