‘अदालत को सलाम’: न्यायालय ने ठाणे में अवैध इमारतों को गिराने में हस्तक्षेप करने से किया इनकार

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Tue, 17 Jun 2025 08:46 PM
‘अदालत को सलाम’: न्यायालय ने ठाणे में अवैध इमारतों को गिराने में हस्तक्षेप करने से किया इनकार
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नयी दिल्ली. उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को ठाणे के हरित क्षेत्र में अवैध रूप से निर्मित 17 संरचनाओं को ध्वस्त करने के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया और बंबई उच्च न्यायालय के “साहसिक” रुख को रेखांकित किया. न्यायमूर्ति उज्ज्ल भुइयां और न्यायमूर्ति मनमोहन की पीठ ने बंबई उच्च न्यायालय के इस स्पष्ट निष्कर्ष का हवाला दिया कि नगर निकायों की मिलीभगत से हो रहे अवैध निर्माण में अंडरवर्ल्ड शामिल है.

न्यायमूर्ति मनमोहन ने कहा, “अगला नंबर आपकी बंबई का है, वहां अतिक्रमण होगा. बस इतना ही करना बाकी है. कृपया अपने शहर के बारे में सोचें, नहीं तो हर जगह अतिक्रमण हो जाएगा. एक बार के लिये, बंबई उच्च न्यायालय ने बहुत ही साहसी कदम उठाया है और हम इसकी सराहना करते हैं.” उच्च न्यायालय की सराहना करते हुए पीठ ने कहा, “सही निर्णय लेने के लिए उच्च न्यायालय को बधाई. देखिए, आपने किसी तीसरे पक्ष की भूमि पर अतिक्रमण किया और बिना किसी मंजूरी के संपत्ति का निर्माण किया. यहां कानून का कोई राज नहीं है और कृपया देखें, ये लोग अंडरवर्ल्ड से जुड़े हुए हैं.” यह जानने पर कि याचिकाकर्ता एक घर खरीदार है, पीठ ने कहा कि एक नेक इंसान को सामने रखना एक “अच्छी रणनीति” थी, लेकिन उच्च न्यायालय ने इस तथ्य को दर्ज किया था कि “पॉश इलाके में इस तरह के विशाल निर्माण” के पीछे अंडरवर्ल्ड का हाथ था.

न्यायमूर्ति मनमोहन ने कहा, “यह चौंकाने वाली बात है कि कुछ लोगों में इस अदालत में आने की हिम्मत है. एक बार फिर, उच्च न्यायालय जागा है और उसने कानून का शासन स्थापित करने की कोशिश की है. आपने बिना किसी मंजूरी के कितनी इमारतें बनाई हैं? कृपया जाइए, जब तक आप इन बेईमान बिल्डरों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करेंगे, यह सिलसिला जारी रहेगा – लोग आपके कंधों का इस्तेमाल करके गोरिल्ला युद्ध करते रहेंगे, यह बंद होना चाहिए.” पीठ ने कहा कि निर्माण कार्य नियोजन प्राधिकरण की अनुमति के बिना किया गया और वह भी किसी तीसरे पक्ष की जमीन हड़प कर किया गया.

न्यायमूर्ति भुइयां ने कहा कि अवैध निर्माण की बात प्रकाश में नहीं आती यदि एक निर्दोष महिला यह दावा करते हुए सामने नहीं आती कि उसकी जमीन पर कब्जा कर लिया गया है और उस पर इमारतें खड़ी कर दी गई हैं. शीर्ष अदालत ने याचिकाकर्ता दानिश जहीर सिद्दीकी, जिन्होंने 12 जून के उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती दी है, से कहा कि वे पुर्निवचार के लिए उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल करें. सिद्दीकी ने दावा किया कि 17 इमारतों में से आठ को ध्वस्त कर दिया गया, जिससे कम से कम 400 परिवार बेघर हो गए.

उन्होंने दावा किया कि वे 17 इमारतों में से एक में फ्लैट के खरीददारों में से एक हैं और उन्होंने तर्क दिया कि उच्च न्यायालय ने एक “पूर्णाधिकार” निर्देश जारी किया है, जिसके तहत ठाणे नगर निगम को किसी भी अन्य आदेश की प्रतीक्षा किए बिना ध्वस्तीकरण की कार्यवाही करने का अधिकार दिया गया है. हालांकि, शीर्ष अदालत ने कहा, “हम इस पर कोई राय व्यक्त नहीं कर रहे हैं. कुछ समय तक मामले की सुनवाई के बाद, वरिष्ठ अधिवक्ता ने उच्च न्यायालय का रुख करने की स्वतंत्रता के साथ याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी है.” उच्च न्यायालय ने 12 जून को कहा कि किसी भी अनधिकृत निर्माण को ध्वस्त करना होगा.

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