‘लंगड़े घोड़े’ शब्द के इस्तेमाल को लेकर सिंधिया ने राहुल गांधी पर साधा निशाना

ग्वालियर. केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने दिव्यांगजनों को कथित तौर पर अपमानित करने वाला शब्द इस्तेमाल करने के लिए बृहस्पतिवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी की आलोचना की और साथ ही उन्हें याद दिलाया कि किस तरह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने दिव्यांगजन शब्द गढ़ा था. गांधी का नाम लिए बिना केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कुछ लोग ऐसे स्वागत योग्य बदलावों के लिए प्रधानमंत्री का सम्मान करने के बजाय ‘गाली-गलौज’ की भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं.

लोकसभा में विपक्ष के नेता गांधी ने तीन जून को भोपाल में कांग्रेस कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए उनके लिए ‘रेस का घोड़ा’, ‘बारात का घोड़ा’ और ‘लंगड़े घोड़े’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया था. गांधी ने कांग्रेस की मध्यप्रदेश इकाई में नयी जान फूंकने के संदर्भ में यह उदाहरण दिया था. राज्य में दिसंबर 2018 से मार्च 2020 तक की संक्षिप्त 15 महीने की अवधि को छोड़कर कांग्रेस पार्टी 2003 से सत्ता से बाहर है.

सिंधिया ने यहां संवाददाताओं के सवालों का जवाब देते हुए कहा, ”मैं ऐसी गालियों का इस्तेमाल करने वालों को समझाना चाहता हूं कि हमारे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ‘विकलांग’ शब्द को बदल दिया और दिव्यांगों के लिए ‘दिव्यांगजन’ शब्द गढ़ा. इसका अर्थ है जिनके पास भगवान का विशेष आशीर्वाद है.” सिंधिया ने कहा कि दिव्यांगजनों का सम्मान करने के बजाय वे अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं.

उन्होंने कांग्रेस नेता पर निशाना साधते हुए कहा कि कुछ लोग किस हद तक जा सकते हैं, यह हमारे लिए अकल्पनीय है. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और कुछ दिव्यांग अधिकार समूहों ने ‘लंगड़े घोड़े’ शब्द का इस्तेमाल करने के लिए गांधी की आलोचना की है. सिंधिया ने सवाल किया, ”क्या यह दिव्यांगजनों का अपमान नहीं है?” केंद्रीय संचार मंत्री सिंधिया ने यह भी कहा कि स्टारलिंक जैसी संस्थाओं को लाइसेंस देने से उन क्षेत्रों के लोगों को मोबाइल कनेक्टिविटी मिलेगी, जहां टावर लगाना और केबल बिछाना मुश्किल है.
उन्होंने कहा, ”स्टारलिंक उपग्रह कनेक्टिविटी का नेतृत्व करेगा. पहले फिक्स्ड लाइन हुआ करती थी. आज मोबाइल, ब्रॉडबैंड और ऑप्टिकल फाइबर कनेक्टिविटी है. इसके साथ ही सैटेलाइट कनेक्टिविटी भी जरूरी है, क्योंकि दूरदराज के इलाकों में जहां तार और टावर नहीं पहुंच सकते, वहां कनेक्टिविटी सैटेलाइट के जरिए ही हो सकेगी.”

उन्होंने कहा, ”स्टारलिंक तीसरा लाइसेंस धारी है. पहला लाइसेंस वनवेब को दिया गया था, जो एक भारतीय कंपनी है. दूसरा लाइसेंस रिलायंस और तीसरा स्टारलिंक को दिया गया है. इसके बाद सरकार की ओर से स्पेक्ट्रम दिया जाएगा और देश में यह सेवा तेजी से शुरू होगी.” सिंधिया ग्वालियर के आधुनिक निर्माता माधो महाराज की जन्मशती के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में हिस्सा लेने आए थे. माधो महाराज ने पांच जून, 1925 को पेरिस में अंतिम सांस ली थी.

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