एसडीपीआई का यूडीएफ को समर्थन: भाजपा ने राहुल गांधी से रुख स्पष्ट करने को कहा

प्रतिबंधित संगठन 'पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया' की राजनीतिक शाखा 'सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (एसडीपीआई)'

वायनाड. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की केरल इकाई ने मंगलवार को कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी को प्रतिबंधित संगठन ‘पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया’ की राजनीतिक शाखा ‘सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (एसडीपीआई)’ द्वारा संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) को दिए गए समर्थन पर अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए.

एसडीपीआई के राज्य नेतृत्व ने सोमवार को कहा था कि उन्होंने लोकसभा चुनाव में कांग्रेस नीत यूडीएफ का समर्थन करने का निश्चय किया है. भाजपा के राज्य प्रमुख के. सुरेंद्रन ने आज आरोप लगाया कि यह एक ऐसा संगठन है जो देश को तोड़ने की कोशिश कर रहा है.
वायनाड लोकसभा सीट पर सुरेंद्रन भाजपा प्रत्याशी के रूप में राहुल गांधी के खिलाफ चुनाव मैदान में हैं.

भाजपा नेता ने एसडीपीआई और पीएफआई पर हिंदुओं और ईसाइयों को कथित रूप से मार डालने, मंदिरों और गिरजाघरों को नष्ट करने तथा भाजपा नेताओं और धार्मिक प्रमुखों पर हमला करने की अपनी मंशा की सार्वजनिक घोषणा करने का आरोप लगाया.
उन्होंने कहा, ”अब एसडीपीआई ने सभी 20 निर्वाचन क्षेत्रों में कांग्रेस पार्टी को समर्थन देने की घोषणा की है. हम सभी जानते हैं कि पीएफआई पर प्रतिबंध क्यों लगाया गया था. ऐसी पार्टी ने कांग्रेस को समर्थन देने की घोषणा की है.” सुरेंद्रन ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने कहा है कि वह हर तरफ से मिलने वाले समर्थन का स्वागत करेगी.

भाजपा नेता ने कहा, ”यह बेहद स्तब्ध करने वाला है और कांग्रेस को इस पर स्पष्टीकरण देना चाहिए. राहुल गांधी को अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए. दिन-रात धर्मनिरपेक्षता की बात करने वाले वायनाड के सांसद को अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए.” सुरेंद्रन ने गांधी से यह भी पूछा कि क्या यह उनकी पार्टी की वोटबैंक की राजनीति है और क्या वह एवं कांग्रेस वोट बैंक के लिए राष्ट्रीय हित से समझौता कर रही है.

कांग्रेस ने मंगलवार को इस सवाल का स्पष्ट जवाब देने से परहेज किया कि क्या वह एसडीपीआई द्वारा दिये गये समर्थन को स्वीकार करेगी या नहीं. कांग्रेस महासचिव तथा अलप्पुझा लोकसभा सीट से पार्टी प्रत्याशी के सी वेणुगोपाल ने कहा कि कांग्रेस ने कभी एसडीपीआई से मदद नहीं मांगी और इस संबंध में (पार्टी में) कोई चर्चा नहीं हुई है.

उन्होंने अलप्पुझा में पत्रकारों के सवालों के जवाब में कहा, ” हमने ऐसी कोई मदद नहीं मांगी है और चुनाव के दौरान यदि कोई मत दे रहा है तो वह उसकी व्यक्तिगत पसंद है.” उन्होंने यह भी कहा कि प्रत्याशियों के तौर पर चुनाव में (लोगों को) सभी के मत की जरूरत होती है लेकिन पार्टी की विचारधारा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा.

केरल की सत्तारूढ़ मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने भी एसडीपीआई की समर्थन की पेशकश पर कांग्रेस एवं यूडीएफ की आलोचना की तथा कहा कि चुनाव के दौरान राज्य के सभी निर्वाचन क्षेत्रों में उन्हें इसके खिलाफ करारा जवाब मिलेगा. माकपा राज्य सचिव एम वी गोविंदन ने आरोप लगाया कि पहले राज्य में ‘कांग्रेस-मुस्लिम लीग-भाजपा’ का गठबंधन था और अब एसडीपीआई भी उसका हिस्सा है.

उन्होंने कहा, ”उन्हें सभी निर्वाचन क्षेत्रों खासकर कोझिकोड़ जिले के वटकारा निर्वाचन क्षेत्र में इस गठबंधन को करारा जवाब मिलेगा.” एसडीपीआई ने सोमवार को आगामी लोकसभा चुनाव में राज्य में कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) को अपना समर्थन दिया.

हालांकि विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष वी डी सतीशन ने मीडिया को बताया कि यूडीएफ और एसडीपीआई के बीच किसी तरह का समझौता नहीं हुआ है. एसडीपीआई के प्रदेश अध्यक्ष एम.ए. मौलवी ने कोच्चि में मीडिया से कहा कि सभी तथ्यों पर विचार करने के बाद पार्टी ने एक धर्मनिरपेक्ष मोर्चे (यूडीएफ) का समर्थन करने का फैसला किया है. मौलवी ने कहा कि पार्टी ने केरल में एक भी उम्मीदवार नहीं उतारा है जबकि देश के विभिन्न हिस्सों में उसने 18 प्रत्याशियों को चुनाव मैदान में उतारा है. केरल में लोकसभा चुनाव 26 अप्रैल को होगा. देश की सभी लोकसभा सीट पर चुनाव का परिणाम चार जून को घोषित किया जाएगा.

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