यूपी के तीन आईपीएस IPS अविनाश पांडे (2015), IPS इलामरन (2016) प्रमोटी IPS कमलेश बहादुर (2017) के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद आज विभागीय जांच शुरू हो गई है!
यूपी के तीन आईपीएस IPS अविनाश पांडे (2015), IPS इलामरन (2016) प्रमोटी IPS कमलेश बहादुर (2017) के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद आज विभागीय जांच शुरू हो गई है!!
सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस के कामकाज के तरीक़े को “लापरवाह रवैया” वाला बताया था और जांच के आदेश दिए थे। आदेश में कहा गया है कि अगली सुनवाई (16 नवंबर) तक साल 2023 से अभी तक मऊ जिले में तैनात रहे सभी पुलिस कप्तानों के ख़िलाफ़ विभागीय जांच की जाए
एक 14 साल के बच्चे के अपहरण के मुकदमें में लापरवाही बरतने को लेकर कोर्ट ने ये तल्ख़ टिप्पणी की है… प्रमोटी IPS सर्वेश कुमार मिश्रा (2018) 6 दिन पहले ही मऊ के नए कप्तान बने हैं. अगली सुनवाई (16 नवंबर) तक साल 2023 से अभी तक मऊ जिले में तैनात रहे सभी पुलिस कप्तानों के ख़िलाफ़ विभागीय जांच की जाए…
एक 14 साल के बच्चे के अपहरण के मुकदमें में लापरवाही बरतने को लेकर कोर्ट ने ये तल्ख़ टिप्पणी की है.
IPS अविनाश पांडे (2015) यूपी पुलिस की वेबसाइट पर उपब्लध जानकारी के मुताबिक अविनाश पांडेय 2015 बैच के उत्तर प्रदेश कैडर के आईपीएस अधिकारी हैं. उनका जन्म 3 फरवरी 1988 को हुआ था.वह उत्तर प्रदेश के खेरी के रहने वाले हैं और उनके पिता का नाम श्रवण कुमार पांडेय हैं.उन्होंने बीएससी किया है.इसके बाद यूपीएससी परीक्षा पास की और वर्ष 2015 में आईपीएस सेवा ज्वाइन की.उन्होंने 4 सितंबर 2015 को यूपी पुलिस ज्वाइन किया.वह वर्तमान में एसपी रैंक के अधिकारी हैं.
आईपीएस इलामारन जी मूल रूप से तमिलनाडु राज्य के रहने वाले हैं। इन्होंने 2 जुलाई 2022 को अमेठी में पुलिस अधीक्षक के रूप में कार्यभार ग्रहण किया था।
आईपीएस अधिकारी कमलेश बहादुर एक बार फिर चर्चा में हैं। मऊ के पुलिस अधीक्षक (SP) के रूप में करीब पांच महीने तक जिम्मेदारी संभालने के बाद अब उन्हें लखनऊ स्थित डीजीपी मुख्यालय में पुलिस अधीक्षक (लोक शिकायत) के पद पर तैनात किया गया है। 31 मार्च को मऊ की कमान संभालने वाले कमलेश बहादुर का यह तबादला उनके पुलिस करियर का नया पड़ाव है। जिला पुलिस की जिम्मेदारी से लेकर पुलिस मुख्यालय में नई भूमिका तक का उनका सफर कई सवाल भी खड़े करता है।