नयी दिल्ली. राज्यसभा में बुधवार को केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने कांग्रेस सदस्य अमी याग्निक एवं अन्य महिला नेताओं को चुनौती दी कि वे राजस्थान, छत्तीसगढ. एवं बिहार में महिलाओं के खिलाफ अत्याचार एवं बलात्कार की घटनाओं पर बोलने का साहस दिखाएं? अमी याग्निक ने प्रश्नकाल के दौरान पूरक प्रश्न पूछते हुए महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी से जानना चाहा कि वह और मंत्रिमंडल में उनकी महिला सहयोगी मणिपुर के मुद्दे पर कब बोलेंगी? इसके जवाब में स्मृति ने कहा कि वह इस बात पर घोर आपत्ति व्यक्त करती हैं.
उन्होंने कहा कि न केवल महिला मंत्रियों बल्कि महिला राजनीतिक नेताओं को भी मणिपुर के साथ ही छत्तीसगढ., राजस्थान एवं बिहार में होने वाली घटनाओं पर भी ध्यान केंद्रित करना चाहिए. उन्होंने प्रश्न किया कि क्या वह (कांग्रेस सदस्य याग्निक) इन राज्यों में महिलाओं पर हुए अत्याचार की घटनाओं पर बोलने का माद्दा रखती है? केंद्रीय मंत्री ने कहा, ” क्या आपके भीतर माद्दा एवं साहस है कि आप छत्तीसगढ. के बारे में बोलें? क्या आपमें साहस है कि आप राजस्थान के बारे में बोले? क्या आपमें साहस है कि आप बिहार के बारे में बोलें? क्या आपमें साहस है कि आप लाल डायरी के बारे में बोलें?”
उन्होंने सवाल किया कि उनमें इस बारे में बात करने का साहस कब होगा कि एक कांग्रेस नेता के वहां जाने के बाद मणिपुर जलने लगा.
स्मृति ने कहा, ”क्या आपमें इतना साहस है कि आप कांग्रेस शासित राज्यों में होने वाली बलात्कार की घटनाओं के बारे में बोलें?” उन्होंने कांग्रेस सदस्य को नसीहत दी कि यदि वह इन घटनाओं पर नहीं बोल सकतीं तो उन्हें केंद्र की महिला मंत्रियों पर अनावश्यक दबाव नहीं बनाना चाहिए.
कोई वक्फ बोर्ड, किसी समुदाय को धर्म से बाहर नहीं कर सकता : स्मृति ईरानी ने अहमदिया विवाद पर कहा
आंध्र प्रदेश वक्फ बोर्ड द्वारा अहमदिया समुदाय को गैर-मुस्लिम बताने वाले प्रस्ताव को पारित करने से उपजे विवाद के बीच अल्पसंख्यक मामलों की मंत्री स्मृति ईरानी ने बुधवार को कहा कि देश के किसी भी वक्फ बोर्ड के पास किसी व्यक्ति या समुदाय को धर्म से बाहर करने का अधिकार नहीं है. प्रमुख मुस्लिम संगठन जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने अहमदिया समुदाय को गैर-मुस्लिम बताने वाले आंध्र प्रदेश वक्फ बोर्ड के कदम का समर्थन करते हुए मंगलवार को दावा किया कि यह सभी मुसलमानों का ”सर्वसम्मत रुख” है.
इस मुद्दे के बारे में पूछे जाने पर ईरानी ने कहा, ”मैं केवल इतना कहना चाहती हूं कि सभी वक्फ बोर्ड संसद के अधिनियम के तहत आते हैं. कोई भी वक्फ बोर्ड संसद की गरिमा के विपरीत काम नहीं कर सकता और उसके द्वारा बनाए गए कानूनों का उल्लंघन नहीं कर सकता. किसी भी वक्फ बोर्ड को इसकी इजाजत नहीं है कि वह किसी फतवे को सरकारी आदेश में बदल दे.”
उन्होंने संसद परिसर में संवाददाताओं से कहा, ”संसद के कानून के तहत किसी भी वक्फ बोर्ड को यह अधिकार नहीं है कि वह किसी व्यक्ति या समुदाय को धर्म से बाहर निकाल सके. हमने आंध्र प्रदेश के मुख्य सचिव से जवाब मांगा है. हमने उनसे तथ्यों को पेश करने का अनुरोध किया है क्योंकि अहमदिया मुस्लिम समुदाय ने अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय के समक्ष अपील की है.” मंत्री ने कहा कि वह राज्य के मुख्य सचिव के जवाब का इंतजार कर रही हैं.
जमीयत उलेमा-ए-हिंद द्वारा आंध्र प्रदेश वक्फ बोर्ड के रुख का समर्थन करने के बारे में पूछे जाने पर ईरानी ने कहा कि किसी को भी संसद के अधिनियम का उल्लंघन करने का अधिकार नहीं है. आंध्र प्रदेश वक्फ बोर्ड ने एक प्रस्ताव पारित कर अहमदिया समुदाय को ‘काफिर’ (ऐसा व्यक्ति जो इस्लाम का अनुयायी न हो) और गैर मुस्लिम बताया था जिसके बाद अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय ने आंध्र प्रदेश सरकार को भेजे पत्र में वक्फ बोर्ड के प्रस्ताव को ‘नफरती अभियान’ बताया था जिसका असर पूरे देश में पड़ सकता है.
आंध्र प्रदेश के मुख्य सचिव केएस जवाहर रेड्डी को भेजे पत्र में यह भी कहा गया था कि 20 जुलाई को अहमदिया मुस्लिम समुदाय से एक पत्र मिला है जिसमें कहा गया है कि कुछ वक्फ बोर्ड अहमदिया समुदाय का विरोध कर रहे हैं और समुदाय को इस्लाम से बाहर का घोषित करने के लिए अवैध प्रस्ताव पारित कर रह रहे हैं.