सपा नीयत एवं नीति में खोट के कारण दलितों-बहुजनों की सच्ची हितैषी कभी नहीं हो सकती: मायावती

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Sun, 20 Apr 2025 08:47 PM
सपा नीयत एवं नीति में खोट के कारण दलितों-बहुजनों की सच्ची हितैषी कभी नहीं हो सकती: मायावती
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लखनऊ. बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने रविवार को अपने विरोधी दलों, खासतौर से समाजवादी पार्टी (सपा) पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की तरह सपा भी अपनी नीयत एवं नीति में खोट के कारण दलितों-बहुजनों की कभी सच्ची हितैषी नहीं हो सकती. सपा के दलित सांसद रामजी लाल सुमन की राणा सांगा पर टिप्पणी को लेकर हुए विवाद के बाद पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव द्वारा उनका लगातार समर्थन किए जाने के बीच मायावती ने यह टिप्पणी की.

बसपा प्रमुख ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर सिलसिलेवार ‘पोस्ट’ साझा करते हुए कहा कि कांग्रेस और भाजपा की तरह समाजवादी पार्टी भी बहुजनों, विशेषकर दलितों को उनके संवैधानिक अधिकार देकर उनके उत्थान के लिए काम करने तथा उनकी गरीबी, जाति-आधारित शोषण और अन्याय-अत्याचार को समाप्त करने की कोई इच्छाशक्ति नहीं रखती.

मायावती ने 1995 की लखनऊ अतिथि गृह घटना को याद करते हुए कहा, ”समाजवादी पार्टी द्वारा बसपा के साथ विश्वासघात, दो जून (1995) को उसके नेतृत्व पर जानलेवा हमला, संसद में पदोन्नति में आरक्षण के विधेयक को फाड़ना, उसके संतों, गुरुओं एवं महापुरुषों के सम्मान में बनाए गए नए जिलों, उद्यानों, शैक्षणिक एवं मेडिकल कॉलेजों का नाम बदलना ऐसे घोर जातिवादी कृत्य हैं जिन्हें माफ करना असंभव है.” उन्होंने कहा कि बसपा अपने अनवरत प्रयासों से यहां जातिवादी व्यवस्था को खत्म करके समतामूलक समाज यानी सर्वसमाज में भाईचारा बनाने के अपने अभियान में काफी हद तक सफल रही है.

उन्होंने कहा, ”सपा अपने संकीर्ण राजनीतिक स्वार्थ की पूर्ति के लिए इसे बिगाड़ने की हर कोशिश कर रही है. लोग सावधान रहें.” मायावती ने कहा, ”स्पष्ट है कि कांग्रेस एवं भाजपा आदि की तरह सपा भी अपनी नीयत व नीति में खोट/द्वेष के कारण दलितों-बहुजनों की कभी सच्ची हितैषी नहीं हो सकती लेकिन वह मतों के स्वार्थ की खातिर इनसे लगातार छलावा करती रहेगी जबकि बसपा ‘बहुजन समाज’ को शासक वर्ग बनाने के प्रति सर्मिपत एवं संघर्षरत है.”

2027 उप्र चुनाव: ओबीसी से जुड़ने के लिए बसपा फिर करेगी ‘भाईचारा’ प्रयोग
अपने लगातार गिरते जनाधार से बेचैन बहुजन समाज पार्टी (बसपा) नेतृत्व ने 2027 में उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) से जुड़ने के लिए अपने सफल ‘भाईचारा’ प्रयोग को दोबारा लागू करने की योजना पर काम शुरू कर दिया है. ‘भाईचारा’ एक प्रयोग था जो 2007 के चुनावों से पहले किया गया था. इसी प्रयोग के तहत राज्य की 403 विधानसभाओं में भाईचारा समितियां बनाई जाएंगी और ओबीसी के 100 लोगों से संपर्क साधा जाएगा. ये 100 लोग बूथ स्तर पर पार्टी के दूत के रूप में काम करेंगे.

इन ओबीसी भाईचारा समितियों के जरिए पार्टी अपने बिखरे हुए ग्रामीण वोट बैंक को जोड़ना चाहती है और समाजवादी पार्टी के पीडीए (पिछड़ा दलित अल्पसंख्यक) के दांव का जवाब भी तलाशना चाहती है. बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के प्रदेश अध्यक्ष विश्वनाथ पाल ने ‘पीटीआई-भाषा’ से बातचीत में कहा, ”बसपा ने प्रदेश के सभी जिलों में ओबीसी भाईचारा समितियां गठित की हैं. प्रत्येक जिले में दो संगठनात्मक संयोजक नियुक्त किए गए हैं. जिला अध्यक्ष और प्रभारी नियुक्त किए गए हैं.” उनका कहना है कि इन जिला अध्यक्षों और प्रभारियों में एक दलित समुदाय से है और दूसरा ओबीसी से. ये पदाधिकारी अब प्रदेश के सभी 403 विधानसभा क्षेत्रों में ओबीसी भाईचारा समितियां बना रहे हैं.

उन्होंने कहा, ” ये पदाधिकारी गांव-गांव जाकर लोगों के बीच जा रहे हैं और ग्रामीण क्षेत्रों में बसपा की नीतियों को फैलाने का काम शुरू कर दिया है. ताकि ओबीसी समाज और अन्य गरीब व अल्पसंख्यक समाज के लोग भी इन भाईचारा समिति से जुड़ सकें और आगामी 2027 के उप्र विधानसभा चुनाव में बसपा 2007 की तरह फिर से सत्ता हासिल कर सके.” उन्होंने कहा कि विधानसभा प्रभारी हर गांव में ओबीसी वर्ग के 100 लोगों का समूह बनाएंगे और उन्हें पार्टी के कार्यक्रमों और नीतियों की जानकारी देकर प्रशिक्षित कार्यकर्ता बनाएंगे.

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