गुवाहाटी/रांची. असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने दावा किया है कि राज्य में महिलाओं के खिलाफ अपराध की हालिया घटनाएं ”जमीन हड़पने और असमिया लोगों की पहचान को खतरे में डालने के बड़े इरादे” से की जा रही हैं. उन्होंने अपराधों के पीछे ‘राजनीतिक संरक्षण’ होने की बात कही और साथ ही यह भी दावा किया कि वित्तीय ताकत असमिया लोगों के हाथों से निकलती जा रही है.
शर्मा ने शनिवार देर शाम एक प्रेस वार्ता में कहा, ”कोई भी समाज पूर्ण नहीं होता. महिलाओं के खिलाफ अपराध एक हकीकत है. पिछले तीन साल में प्रदेश में ये अपराध कम हुए हैं. लेकिन हाल की घटनाओं के पीछे का असली इरादा बहुत बड़ा है, बलात्कार जैसे अपराधों के जरिए हमारी धरती और हमारी सभ्यता को निशाना बनाने की कोशिश की जा रही है.” उन्होंने बांग्लादेश से आए अवैध प्रवासियों के खिलाफ 1979 से छह साल तक चले आंदोलन का जिक्र करते हुए कहा, ”असम में यह घटनाक्रम पिछले 30-35 साल से चल रहा है. इसीलिए असम आंदोलन हुआ. हमने अभी कट्टरपंथियों की पहचान की है, लेकिन 1975 में ही असमिया समाज को आगाह किया गया था कि ऐसा होगा.”
उन्होंने यह दावा करते हुए कहा कि इस तरह के अपराधों के जरिए ”जमीन हड़पने की बड़ी साजिश” रची जा रही है. शर्मा ने कहा, ”ढिंग में पीड़ित परिवार ने मुझसे कहा कि वे अब वहां नहीं रहना चाहते… लोग अपनी संपत्ति बेच देते हैं और अन्य स्थानों पर चले जाते हैं. पांच लाख रुपये की जमीन के लिए उन्हें 50 लाख रुपये की पेशकश की जाती है.” बृहस्पतिवार शाम नगांव के ढिंग इलाके में तीन लोगों ने 14 साल की एक लड़की से कथित तौर पर बलात्कार किया था. इस घटना के बाद व्यापक विरोध प्रदर्शन हुआ. पुलिस ने एक आरोपी को घटना के अगले दिन गिरफ्तार कर लिया, लेकिन कथित तौर पर हिरासत से भागने की कोशिश के दौरान तालाब में कूदने से उसकी मौत हो गई.
शर्मा ने दावा किया कि एक ”तरीका” है जिसमें पहले, एक या दो व्यक्ति गांव में प्रवेश करते हैं और अपना घर बसाते हैं, फिर वे अपने घरों में मांस खाना शुरू कर देते हैं और पड़ोसी इससे असहज होकर क्षेत्र छोड़ना शुरू कर देते हैं. मुख्यमंत्री ने कहा, ”यह बारपेटा, मंगलदाई और अन्य स्थानों पर हो रहा है. पिछले मुख्यमंत्रियों ने ये बातें नहीं कही थीं, लेकिन मैंने यह कहा है. किसी दिन मेरी जान को खतरा हो सकता है, लेकिन मैं यह कह रहा हूं क्योंकि यह मेरा कर्तव्य है.” उन्होंने किसी समुदाय का नाम लिए बिना कहा, ”यह सब पैसे का खेल है. वित्तीय ताकत असमिया लोगों के हाथों से निकलती जा रही है. वे इसका फायदा उठा रहे हैं.”
शर्मा ने दावा किया कि अपराधियों को अदालत में सर्वश्रेष्ठ वकीलों की सेवाएं मिलती हैं क्योंकि ”समुदाय उनके लिए आगे आता है”, लेकिन पीड़ित परिवारों को वित्तीय बाधाओं के कारण इतने अच्छे वकील नहीं मिलते हैं और ”कोई भी हमारे लिए आगे नहीं आता है”.
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार अब कुछ क्षेत्रों में भूमि की रक्षा के लिए कानून लेकर आई है और उन्होंने कैबिनेट मंत्री पीयूष हजारिका को ढिंग में स्थानीय लोगों के साथ इस बारे में चर्चा करने की जिम्मेदारी दी है कि अनुसूचित जाति समुदाय द्वारा बसाए गए गांव को कैसे ”संरक्षित” किया जा सकता है.
शर्मा ने कहा, ”मुझे लगता है कि अगर राजनीतिक संरक्षण नहीं होगा तो ऐसी घटनाएं कम हो जाएंगी. लेकिन जब राजनीतिक संरक्षण होता है, तो उनके समर्थन में सोशल मीडिया पोस्ट किए जाते हैं, अपराधियों को हिम्मत मिलती है और ऐसी घटनाएं बढ़ती हैं.” उन्होंने जनता का समर्थन मांगते हुए कहा कि सरकार इन अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए ”कड़े फैसले लेगी और उपाय” करेगी. शर्मा ने कहा, ”अगर असमिया समाज एकजुट होगा, तो कोई समस्या नहीं होगी. लेकिन अगर यह विभाजित हो गया, तो यह कमजोर हो जाएगा. ढिंग घटना केवल बलात्कार के बारे में नहीं है, असमिया लोगों को आतंकित किया जा रहा है ताकि वे अपनी जमीन छोड़ दें.”
लोगों से किए गए वादे पूरे न करने के लिए हेमंत सोरेन को इस्तीफा दे देना चाहिए: हिमंत विश्व शर्मा
असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने रविवार को झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से 2019 के विधानसभा चुनाव के दौरान लोगों से किए गए वादों को पूरा करने में ”विफल” रहने के लिए इस्तीफा मांगा. शर्मा ने आरोप लगाया कि झारखंड सरकार घुसपैठ रोकने सहित सभी मोर्चों पर विफल रही है.
उन्होंने कहा, ”समय आ गया है कि चुनाव के दौरान युवाओं से किए गए वादों को पूरा करने में विफल रहने के लिए आप इस्तीफा दें और राजनीति छोड़ दें.” शर्मा ने हाल ही में रांची में भारतीय जनता युवा मार्चा (भाजयुमो) की रैली के दौरान भाजपा नेताओं सहित लगभग 12,000 अज्ञात लोगों के खिलाफ ”गैर-जमानती धाराओं” के तहत प्राथमिकी दर्ज करने के लिए झारखंड मुक्ति मोर्चा के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार की भी आलोचना की.
पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले और पानी की बौछारें छोड़ी तथा रबर की गोलियां भी चलाईं.
शर्मा ने दावा किया, ”स्वतंत्र भारत में इस तरह की क्रूरता नहीं सुनी गई है…मैं उल्फा से निपटा हूं, लेकिन ऐसा कुछ नहीं देखा. मैं निर्वाचन आयोग को पत्र लिखकर (झारखंड के) डीजीपी को पद से हटाने के लिए कहूंगा, क्योंकि ऐसे अधिकारी के रहते राज्य में (निष्पक्ष) चुनाव नहीं हो सकते…12,000 युवाओं के खिलाफ प्राथमिकी कार्यकर्ताओं को धमकाने के लिए है.” झारखंड में इसी साल विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं.
असम में दो बांग्लादेशियों को पकड़ा गया और उनके देश भेजा गया: हिमंत
असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने बताया कि भारत में अवैध रूप से दाखिल हुए बांग्लादेश के दो नागरिकों को असम में पकड़ा गया और फिर उन्हें वापस उनके देश भेज दिया गया. शर्मा ने बताया कि दोनों बांग्लादेशियों को बदरपुर रेलवे स्टेशन से पकड़ा गया और शुक्रवार रात उन्हें वापस बांग्लादेश भेज दिया गया.
उन्होंने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ”असम पुलिस ने बदरपुर रेलवे स्टेशन पर दो बांग्लादेशी नागरिकों को पकड़ा.” बांग्लादेश के दोनो नागरिकों की पहचान मॉडलगंज थाना क्षेत्र के निवासी मासूम खान और ढाका निवासी सोनिया अख्तर के रूप में हुई है. शर्मा ने बताया कि वे कथित तौर पर माधोपुर (बांग्लादेश)-अगरतला मार्ग से भारत में घुसे थे और बेंगलुरु जाने वाले थे.
मुख्यमंत्री ने कहा, ”सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) की मदद से असम पुलिस ने कल रात उन्हें सफलतापूर्वक सीमा पार भेज दिया.” उन्होंने शनिवार को कहा था कि पिछले एक महीने में बिना वैध दस्तावेजों के भारत में घुसने की कोशिश कर रहे 30 से अधिक बांग्लादेशियों को असम से वापस उनके देश भेज दिया गया है. शर्मा ने दावा किया कि ये बांग्लादेशी नागरिक कपड़ा उद्योग में काम की तलाश में बेंगलुरु और दक्षिण भारत के अन्य शहरों में जाने की फिराक में थे.