नयी दिल्ली. कांग्रेस ने हरियाणा की भारतीय जनता पार्टी और जननायक जनता पार्टी की सरकार को कानून-व्यवस्था के मोर्चे पर पूरी तरह विफल करार देते हुए बृहस्पतिवार को कहा कि सच्चाई सामने लाने के लिए उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के अंतर्गत न्यायिक जांच होनी चाहिए कि हिंसा कैसे हुई और प्रदेश की सरकार विफल क्यों हुई? पार्टी के वरिष्ठ नेता और हरियणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने यह भी कहा कि जो लोग पूरी तरह विफल हों, उनको सरकार चलाने का कोई अधिकार नहीं है.
हरियाणा के नूंह जिले में सोमवार को सांप्रदायिक हिंसा भड़क गई थी और जल्द ही इसने गुरुग्राम को भी अपनी चपेट मे ले लिया था जिसमें होमगार्ड के दो जवान और एक इमाम सहित छह लोग मारे गए . हुड्डा ने संवाददाताओं से कहा, ”हरियाणा के नूंह में जो हुआ, वह काफी दुर्भाग्यपूर्ण है. वहां के पुलिस अफसर का कहना था कि उसने घटना की जानकारी सरकार को पहले ही दे दी थी, लेकिन कोई कदम नहीं उठाया गया. अगर समय रहते सरकार ने सही फैसला किया होता तो यह हादसा टाला जा सकता था.”
उनके मुताबिक, ”गुड़गांव और फरीदाबाद हमारी औद्योगिक नगरी हैं. इस तरह की हिंसा से कौन पीड़ा झेलेगा? देश झेलेगा और राज्य झेलेगा. ” हुड्डा ने कहा, ”हरियाणा हिंसा पर मुख्यमंत्री कहते हैं कि ये सोची-समझी साजिश थी. भाजपा सरकार के मंत्री राव इंद्रजीत सिंह कहते हैं कि यात्रा में उनके पास हथियार और डंडे कैसे आए? ये सभी विवादित बयान हैं.” उन्होंने आरोप लगाया, ”हरियाणा की भाजपा-जजपा सरकार प्रशासनिक तौर पर पूरी तरह से फेल हो गई है…इसे सरकार चलाने का कोई अधिकार ही नहीं है.”
कांग्रेस नेता ने कहा, ”मैं 10 साल मुख्यमंत्री रहा हूं. हरियाणा की पुलिस बहुत सक्षम है. अगर पुलिस को सही निर्देश दिए जाते तो ये हादसा नहीं होता. मेरी कांग्रेस की तरफ से सबसे अपील है कि शांति और भाईचारा बनाकर रखें.” उन्होंने कहा, ”हमारी मांग है कि जिसने भी दंगा भड़काने का काम किया और जिसने दंगा किया, उनको सजा मिलनी चाहिए. उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के तहत न्यायिक जांच होनी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके.”
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने आरोप लगाया, ”यह सिर्फ ध्रुवीकरण की राजनीति है. हरियाणा में भाजपा ने आग लगाई है. राजस्थान में फैलाने की कोशिश में लगे है. भाजपा के सांसद और मंत्री राव इंद्रजीत ने जो बयान दिया, सच्चाई उसी से बाहर आ गई.” उन्होंने कहा, ”हरियाणा में डबल इंजन सरकार उसी तरह विफल हुई है, जैसे मणिपुर में हुई.”,