कांग्रेस नेतृत्व में जबरदस्त अहंकार, नेहरूवादी धर्मनिरपेक्षता समाप्त हो चुकी है : निरुपम

मुंबई. कांग्रेस से निष्कासित किये जाने के एक दिन बाद पूर्व सांसद संजय निरुपम ने बृहस्पतिवार को पार्टी नेतृत्व में जबरदस्त अहंकार होने का दावा करते हुए कहा कि कांग्रेस अब इतिहास बन चुकी है और उसका कोई भविष्य नहीं है. मुंबई में संवाददाताओं को संबोधित करते हुए निरुपम ने यह भी कहा कि महा विकास आघाडी (एमवीए) तीन ‘बीमार इकाईयों’ का एक विलय है. निरुपम ने कहा कि कांग्रेस में पांच ‘पॉवर सेंटर’ हैं… गांधी परिवार के तीन सदस्य, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और के सी वेणुगोपाल (पार्टी महासचिव).

उन्होंने दावा किया, ”वह नेहरूवादी धर्मनिरपेक्षता समाप्त हो चुकी है, जिनके समाज में धर्म की कोई जगह नहीं थी.” विपक्षी एमवीए में कांग्रेस, शिवसेना (यूबीटी) और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी-शरद चंद्र पवार (राकांपा-एसपी) शामिल है. अनुशासनहीनता और पार्टी विरोधी बयानों पर संज्ञान लेते हुए खरगे ने बुधवार देर रात को निरुपम के निष्कासन को तत्काल प्रभाव से मंजूरी दे दी थी. उनको छह वर्षों के लिए पार्टी से निष्कासित किया गया है.

निरुपम ने कहा कि आगामी लोकसभा चुनावों में उद्धव ठाकरे नीत शिवसेना को ज्यादा सीटें देने के लिए कांग्रेस की आलोचना करने को पार्टी विरोधी गतिविधियां करार नहीं दिया जा सकता. उत्तर मुंबई से पूर्व सांसद ने आरोप लगाया कि शिवसेना-यूबीटी के दिशा-निर्देशों पर उनके खिलाफ कार्रवाई की गयी है. उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ऐसे लोगों से घिरे हुए हैं, जिनकी जमीनी स्तर पर कोई पकड़ नहीं है.

निरुपम ने आरोप लगाया कि पार्टी नेतृत्व लचर और पुराना हो चुका है. उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस को जंग लग चुका है लेकिन पार्टी नेतृत्व में जबरदस्त अहंकार भरा हुआ है. उन्होंने कांग्रेस की महाराष्ट्र इकाई के अध्यक्ष नाना पटोले और वेणुगोपाल पर भी निशाना साधा.

उन्होंने कहा, ”भारत एक धार्मिक देश है लेकिन कांग्रेस ने अयोध्या में भगवान राम (मंदिर में राम लला की मूर्ति) की ‘प्राण प्रतिष्ठा’ को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का कार्यक्रम करार दिया. कांग्रेस ने भगवान राम के अस्तित्व को भी नकार दिया.” निरुपम ने अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया लेकिन कहा कि वह लोकसभा चुनाव लड़ेंगे और जीतेंगे. उनके निर्दलीय चुनाव लड़ने संबंधी सवाल पर उन्होंने कोई टिप्पणी नहीं की. कांग्रेस की मुंबई इकाई के पूर्व प्रमुख ने यह भी दावा किया कि पार्टी के भीतर वैचारिक भ्रम व्याप्त है.

निरुपम ने कहा कि उन्होंने जनता के बीच जो कहा, वह कांग्रेस के खिलाफ नहीं था बल्कि वह तो पार्टी से शिवसेना-यूबीटी के सामने आत्मसमर्पण नहीं करने को कह रहे थे. उन्होंने कहा, ”धर्मनिरपेक्षता का मतलब अपने धर्म की अवहेलना करना नहीं है.” पूर्व सांसद ने कहा कि अगर पार्टी दूसरों के कहने पर अपने ही नेताओं के खिलाफ कार्रवाई करेगी तो पार्टी में कौन बचेगा? उन्होंने दावा किया, ”कांग्रेस अब इतिहास बन चुकी है और उसका कोई भविष्य नहीं है.” निरुपम ने यह भी कहा कि जो लोग अपने राजनीतिक मृत्युलेख लिखना चाहते हैं उन्हें चार जून के बाद अपनी जमीन खिसकती हुई महसूस होगी.

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