अमेरिका ने पाकिस्तान को आतंकवाद का समर्थन न करने की याद दिलाई होगी: थरूर

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Thu, 19 Jun 2025 09:50 PM
अमेरिका ने पाकिस्तान को आतंकवाद का समर्थन न करने की याद दिलाई होगी: थरूर
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तिरुवनंतपुरम. कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने बृहस्पतिवार को कहा कि उन्हें उम्मीद है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर के बीच बातचीत के दौरान अमेरिका ने पाकिस्तान को आतंकवाद का समर्थन नहीं करने के महत्व की याद दिलाई होगी.

थरूर ने कहा कि पाकिस्तानी सेना के जनरल को यह संदेश भेजना अमेरिका के हित में भी है क्योंकि पाकिस्तान ने ओसामा बिन लादेन को पनाह दी थी, जो 3,000 लोगों की जान लेने वाले 11 सितंबर 2001 के आतंकवादी हमलों के लिए जिम्मेदार था. कांग्रेस सांसद ने यह टिप्पणी ट्रंप द्वारा मुनीर को दोपहर भोज पर आमंत्रित किए जाने के बारे में पूछे गए सवाल के जवाब में यहां की.

थरूर ने कहा कि उन्हें लगता है कि अमेरिका ने बातचीत के दौरान पाकिस्तान को आतंकवाद का समर्थन न करने, आतंकवादियों को पनाहगाह न देने तथा आतंकवादियों को भारत में न भेजने, उनकी मदद न करने, उन्हें प्रशिक्षित न करने, हथियार न देने और वित्तपोषित न करने के महत्व की याद दिलाई होगी. उन्होंने कहा कि यह संदेश कुछ अमेरिकी सीनेटरों और कांग्रेस सदस्यों द्वारा पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल को दिया गया है और उम्मीद है कि अमेरिका सरकार में सभी लोग ऐसा ही करेंगे.

यह पूछे जाने पर कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने भारतीय प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात क्यों नहीं की, बल्कि पाकिस्तानी जनरल से मुलाकात की, थरूर ने कहा कि भारतीय प्रतिनिधिमंडल का स्वागत उपराष्ट्रपति जे डी वेंस ने किया, जो एक ”महत्वपूर्ण सम्मान” था. उन्होंने कहा कि आमतौर पर संसदीय प्रतिनिधियों से देश के उप विदेश मंत्रियों जैसे वरिष्ठ अधिकारी मुलाकात करते हैं. थरूर ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी बहुत पहले ही ट्रंप से मुलाकात कर चुके हैं.

उन्होंने कहा, ”हमने बिलकुल वही संदेश दिया जो प्रधानमंत्री ने अमेरिकी राष्ट्रपति को दिया था और हमारे संदेश को उपराष्ट्रपति तथा उप विदेश मंत्री ने किसी आपत्ति, असहमति या तर्क के बिना स्वीकार कर लिया.” भारत-पाकिस्तान संघर्ष को समाप्त करने के लिए अमेरिका द्वारा कथित मध्यस्थता पर थरूर ने कहा कि भारत को इसे रोकने के लिए किसी तरह के अनुनय की आवश्यकता नहीं पड़ी, क्योंकि उसने यह स्पष्ट कर दिया था कि यदि पाकिस्तान रुकेगा, तो वह भी रुकेगा.

भारत-पाकिस्तान संघर्ष समाप्ति में अमेरिका की कथित मध्यस्थता पर थरूर ने कहा कि भारत को इसे रोकने के लिए किसी तरह के अनुनय की आवश्यकता नहीं पड़ी, क्योंकि उसने यह स्पष्ट कर दिया था कि यदि पाकिस्तान रुकेगा, तो वह भी रुकेगा. उन्होंने कहा, ”यदि राष्ट्रपति ट्रंप की ओर से कोई दबाव रहा होगा तो वह केवल पाकिस्तान पर रहा होगा. जब पाकिस्तान ने संघर्ष रोकने की पेशकश की तो हमने रोक दिया. इसलिए, किसी मध्यस्थता या हम पर किसी दबाव की कोई आवश्यकता नहीं थी.” थरूर ने इजराइल-ईरान के बीच संघर्ष को ”गंभीर” बताते हुए कहा कि दोनों देश भारत के लंबे समय से मित्र हैं और भारत चाहेगा कि दोनों देशों के बीच शांति बनी रहे.

उन्होंने कहा कि फिलहाल मामला ”हमारे हाथ में नहीं है” और भारत बस इतना कर सकता है कि वहां जो कुछ हो रहा है, उस पर करीब से नजर रखे. थरूर ने कहा, ”नि?संदेह, हमारी चिंता वहां के लोगों की भलाई के साथ-साथ हमारे अपने नागरिकों की सुरक्षा को लेकर भी बनी हुई है.” कांग्रेस सांसद ने यह भी कहा कि कई भारतीय छात्रों को ईरान से निकालकर पड़ोसी देशों में भेज दिया गया है और उन्हें पूरा विश्वास है कि भारत सरकार पश्चिम एशिया में हो रही गतिविधियों पर करीबी नजर रख रही है.

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