दशहरा 2026: विजयदशमी का पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह दिन जीवन की नकारात्मकता दूर करने और सुख-समृद्धि की कामना के लिए भी विशेष माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र में दशहरे पर कुछ पारंपरिक उपाय करने का महत्व बताया गया है। मान्यता है कि इनसे शनि की प्रतिकूल दशा और राहु-केतु से जुड़ी परेशानियों को कम करने में मदद मिल सकती है। यदि आप जीवन में बार-बार आने वाली बाधाओं से राहत और सकारात्मकता की कामना करते हैं, तो विजयदशमी के दिन इन तीन उपायों को श्रद्धापूर्वक कर सकते हैं।
1. शमी के पेड़ के नीचे जलाएं दीपक
ज्योतिषीय मान्यताओं में शमी के पेड़ का संबंध शनिदेव से माना जाता है। दशहरे की शाम शमी के पौधे या पेड़ की पूजा करें और उसके समीप दीपक जलाकर सुख-शांति की प्रार्थना करें। धार्मिक विश्वास है कि ऐसा करने से शनिदेव की कृपा प्राप्त होती है और जीवन की बाधाओं से राहत की कामना की जा सकती है। कुछ मान्यताओं में इस उपाय को राहु और केतु के प्रतिकूल प्रभावों को शांत करने के लिए भी शुभ माना गया है। पूजा करते समय मन में श्रद्धा रखें और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करें।
2. पत्तों पर लिखें ‘जय श्री राम’
विजयदशमी के दिन भगवान श्रीराम और हनुमान जी की आराधना का भी विशेष महत्व है। मान्यता के अनुसार, इस दिन तीन, पांच या सात पत्ते लेकर उन पर लाल सिंदूर से ‘जय श्री राम’ लिखें। इसके बाद इन्हें किसी हनुमान मंदिर में सम्मानपूर्वक निर्धारित स्थान पर रख दें। ध्यान रखें कि पत्तों को हनुमान जी के चरणों में न रखें। धार्मिक विश्वास के अनुसार, इस उपाय से शनिदोष से राहत और राहु-केतु की शांति के लिए प्रार्थना की जाती है। पूजा के दौरान हनुमान जी का स्मरण करना शुभ माना जाता है।
3. रावण दहन के बाद राख से जुड़ा उपाय
कुछ लोक मान्यताओं में दशहरे पर रावण दहन के बाद बची राख को विशेष महत्व दिया जाता है। परंपरा के अनुसार, राख को लाल कपड़े की पोटली में रखकर घर की पूर्व दिशा में रखने का विधान बताया जाता है। मान्यता है कि इससे कालसर्प दोष और शनि, राहु-केतु से जुड़ी परेशानियों से मुक्ति की कामना की जाती है। हालांकि, सार्वजनिक स्थानों से राख इकट्ठा करने के बजाय स्थानीय परंपराओं और सुरक्षा संबंधी निर्देशों का ध्यान रखें।
डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग और धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। इसकी सटीकता और संपूर्णता की पुष्टि नहीं की जाती।