चंडीगढ़. हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने बृहस्पतिवार को कहा कि अपनी मांगों को मनवाने के लिए किसानों के ”तौर तरीके” निंदनीय हैं क्योंकि वे आक्रमण करने जा रही किसी सेना की तरह दिल्ली की ओर कूच करने की कोशिश कर रहे हैं. आम आदमी पार्टी (आप) का परोक्ष रूप से संदर्भ देते हुए खट्टर ने कहा, ”पंजाब सरकार किसानों को रोक सकती थी. अगर वे नहीं रुके, तो वहां कुछ समझ होनी चाहिए और ‘दिल्ली वाले’ कहते हैं कि वे किसानों के आंदोलन के साथ हैं.”
किसानों के ‘दिल्ली चलो’ आह्वान में आप की भागीदारी को लेकर एक सवाल पर उन्होंने कहा, ”टिप्पणी करना सही नहीं है लेकिन उनके (किसानों के) व्यवहार से पता चलता है कि उन्हें किसी तरह का समर्थन प्राप्त है.” मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों की मांग का समर्थन करना एक बात है लेकिन इस तरह के आंदोलन का समर्थन करने से ”गलत संदेश जाता है.”
आंसू गैस के गोले दागने के लिए ड्रोन के इस्तेमाल पर पंजाब सरकार द्वारा आपत्ति जताए जाने के बारे में पूछे जाने पर खट्टर ने कहा कि हरियाणा के विपरीत पंजाब ने पहले कभी इस तरह के आंदोलन का सामना नहीं किया है. वह 2021 में किसानों के आंदोलन का जिक्र कर रहे थे जब किसानों ने कृषि कानूनों के विरोध में टिकरी और सिंघू सीमाओं पर एक साल तक डेरा डाला था. बाद में ये कानून निरस्त कर दिए गए थे.
खट्टर ने किसानों के ‘दिल्ली चलो’ आह्वान पर एक सवाल पर कहा, ”आज भी कई वीडियो हैं जिसमें लोग अपील कर रहे हैं कि उन्हें (किसानों) रुक जाना चाहिए क्योंकि उनके कारोबार पर असर पड़ेगा.” मुख्यमंत्री ने कहा कि किसान सेना की तरह ट्रैक्टर ट्रॉली, अर्थ-मूवर और एक साल का राशन लेकर आगे बढ़ रहे हैं.
खट्टर ने किसानों के ‘दिल्ली चलो’ के आह्वान पर कहा, ”हमें उनके तरीके पर आपत्ति है. हमें उनके दिल्ली जाने पर कोई आपत्ति नहीं है. ट्रेन, बस और उनके अपने वाहन हैं. लेकिन ट्रैक्टर परिवहन का कोई साधन नहीं है. यह एक कृषि उपकरण है.” उन्होंने कहा, ”ऐसी स्थितियों में, हमें लोगों और उनकी (किसानों) की सुरक्षा भी सुनिश्चित करनी होगी.”
पंजाब के किसान अपनी मांगों को लेकर केंद्र पर दबाव बनाने के लिए दिल्ली की ओर कूच करने के वास्ते शंभू और खनौरी सीमाओं पर डेरा डाले हुए हैं. किसान नेताओं ने कहा है कि वे केंद्र सरकार के साथ बैठक होने तक दिल्ली की ओर बढ़ने का कोई नया प्रयास नहीं करेंगे. उन्होंने कहा कि आगे की कार्रवाई केंद्र के प्रस्तावों के आधार पर तय की जाएगी.
खट्टर ने कहा कि हर किसी को राष्ट्रीय राजधानी जाने का लोकतांत्रिक अधिकार है. उन्होंने कहा, ”लेकिन कैसे जाना है, क्या उद्देश्य है? इन चीजों को दिमाग में रखना चाहिए.” उन्होंने कहा कि मामला बातचीत से सुलझाया जाना चाहिए. दिल्ली कूच करने को लेकर ”अड़े” किसानों का जिक्र करते हुए खट्टर ने कहा ”हरियाणवी में कहा जाता है ‘मैं तो ना मानु’.”
वहीं, एक अन्य सवाल पर खट्टर ने पंजाब के किसानों से आग्रह किया कि वे देखें कि हरियाणा सरकार अपने किसानों के लिए क्या कर रही है और कहा कि अगर आप के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार भी ये कदम उठाए तो उनकी आधी समस्याएं हल हो जाएंगी. उन्होंने कहा, ”हमारे किसान संतुष्ट हैं. उन्हें (पंजाब के किसानों को) पंजाब सरकार से इन चीजों को लागू करवाना चाहिए. हम एमएसपी पर 14 फसलें खरीदते हैं.” खट्टर ने यह भी कहा कि पंजाब में केवल गेहूं और धान ही सुनिश्चित मूल्य पर खरीदे जाते हैं.
किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल के बयान के बारे में पूछे जाने पर खट्टर ने कहा, ”यह साफ तौर पर राजनीतिक बयान है.” सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहे वीडियो के अनुसार किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल को कथित तौर पर यह कहते सुना जा सकता है कि ”मोदी का ग्राफ ऊंचा हो रहा है और इसे नीचे लाने की जरूरत है.” मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों के प्रदर्शन से मोदी को लोगों का समर्थन नहीं घटने जा रहा, बल्कि उनके लिए और अधिक समर्थन जुट रहा है क्योंकि सभी ने देखा कि यह ”लोकतांत्रिक रुख” नहीं है.
मुख्यमंत्री ने कहा, ”30-50 लोगों का एक प्रतिनिधिमंडल (दिल्ली) जा सकता है, लेकिन अगर किसान कहते हैं कि वे हजारों ट्रैक्टरों के साथ जाएंगे, तो क्या दृश्य होगा? पिछली बार लाल किले पर क्या दृश्य था? देश इस तरह की चीजों को मंजूरी नहीं देता है.” खट्टर ने कहा कि कानून व्यवस्था बनाए रखना सुरक्षा एजेंसियों का काम है और जिसने भी कानून का उल्लंघन किया है उसके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज होनी चाहिए.