भारत, यूनान ने प्रवासन और गतिशीलता समझौते को मजबूत करने पर सहमति जताई

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Wed, 21 Feb 2024 08:42 PM
भारत, यूनान ने प्रवासन और गतिशीलता समझौते को मजबूत करने पर सहमति जताई
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नयी दिल्ली. भारत और यूनान ने सैन्य उपकरणों का संयुक्त रूप से उत्पादन करने की दिशा में काम करने पर बुधवार को सहमति व्यक्त की और ‘गतिशीलता तथा प्रवासन साझेदारी’ को मजबूत करने का फैसला किया. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने यूनान के अपने समकक्ष किरियाकोस मित्सोटाकिस के साथ बैठक के दौरान द्विपक्षीय संबंधों को ”नई ऊर्जा” प्रदान करने के लिए चर्चा की.

मोदी ने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में दोनों पक्षों की चिंताएं और प्राथमिकताएं समान हैं तथा इस क्षेत्र में सहयोग को और मजबूत करने पर विस्तार से चर्चा हुई. मित्सोटाकिस भारत की दो-दिवसीय यात्रा पर हैं. मित्सोटाकिस राष्ट्रीय राजधानी में बुधवार शाम को आयोजित होने वाले ‘रायसीना डायलॉग’ में मुख्य अतिथि और मुख्य वक्ता होंगे.

मोदी ने मीडिया में जारी एक बयान में कहा कि उन्होंने और मित्सोटाकिस ने कई क्षेत्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा की तथा इस बात पर सहमति जताई कि सभी विवादों और तनाव का समाधान बातचीत और कूटनीति के माध्यम से किया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में यूनान की सक्रिय भागीदारी और सकारात्मक भूमिका का भारत स्वागत करता है और यह खुशी की बात है कि यूरोपीय राष्ट्र ने हिंद-प्रशांत महासागर पहल में शामिल होने का फैसला किया है.

वार्ता के दौरान दोनों पक्षों ने फार्मा, चिकित्सा उपकरण, प्रौद्योगिकी, नवाचार, कौशल विकास, कृषि और अंतरिक्ष जैसे कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर विचार-विमर्श किया. विदेश सचिव विनय क्वात्रा ने एक प्रेस वार्ता में कहा कि दोनों नेताओं ने भारत-पश्चिम एशिया-यूरोप आर्थिक गलियारे (आईएमईसी) के जरिये संपर्क मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा की. उन्होंने कहा कि निजी क्षेत्र को द्विपक्षीय उड़ान सेवाएं शुरू करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा.

क्वात्रा ने यूक्रेन संघर्ष का परोक्ष संदर्भ देते हुए कहा कि मोदी और मित्सोटाकिस ने यूरोप में जारी घटनाक्रम पर भी चर्चा की.
मित्सोटाकिस ने कहा कि दुनिया आज अभूतपूर्व चुनौतियों का सामना कर रही है, जिसके लिए तत्काल कदम उठाये जाने की आवश्यकता है और भारत को इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभानी है.

उन्होंने कहा, ”हम भारत को हिंद प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता और सुरक्षा के मुख्य स्तंभों में से एक के रूप में देखते हैं.” मोदी ने कहा, ”आज की हमारी वार्ता बहुत सार्थक और उपयोगी रही. यह खुशी की बात है कि हम 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने के लक्ष्य की ओर तेजी से आगे बढ़ रहे हैं. हमने अपने सहयोग को नई ऊर्जा और दिशा देने के लिए कई नए अवसरों की पहचान की है.” प्रधानमंत्री ने कहा कि रक्षा तथा सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में भारत और यूनान के बीच बढ़ता सहयोग दोनों पक्षों के बीच गहरे आपसी विश्वास को दर्शाता है.

उन्होंने कहा, ”इस क्षेत्र में एक कार्य समूह के गठन से हम रक्षा, साइबर सुरक्षा, आतंकवाद विरोधी, समुद्री सुरक्षा जैसी साझा चुनौतियों पर आपसी समन्वय बढ़ा सकेंगे.” प्रधानमंत्री ने कहा, ”भारत में रक्षा विनिर्माण क्षेत्र में सह-उत्पादन और सह-विकास के नए अवसर पैदा हो रहे हैं, जो दोनों देशों के लिए फायदेमंद हो सकते हैं.” उन्होंने कहा कि दोनों देशों के रक्षा उद्योगों को जोड़ने पर सहमति बनी है.

उन्होंने कहा, ”आज हमने इन संबंधों को आधुनिक स्वरूप देने के लिए कई नई योजनाओं पर चर्चा की. हमने दोनों देशों के बीच प्रवासन और गतिशीलता साझेदारी समझौते को जल्द से जल्द पूरा करने पर चर्चा की. इससे हमारे लोगों के बीच संबंध और मजबूत होंगे.” मोदी ने महत्वाकांक्षी भारत-पश्चिम एशिया-यूरोप आर्थिक गलियारे (आईएमईसी) का भी जिक्र किया और कहा कि यह मानवता के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देगा.

उन्होंने कहा, ”यूनान भी इस पहल में अहम भागीदार बन सकता है. हम संयुक्त राष्ट्र और अन्य वैश्विक संस्थानों में सुधार के लिए सहमत हैं, ताकि उन्हें समसामयिक बनाया जा सके. भारत और यूनान वैश्विक शांति तथा स्थिरता में योगदान देने के अपने प्रयास जारी रखेंगे.” मोदी ने कहा कि दोनों पक्षों ने दोनों देशों के ‘स्टार्ट-अप’ को जोड़ने पर भी चर्चा की. उन्होंने कहा कि जहाजरानी और संपर्क दोनों देशों के लिए उच्च प्राथमिकता के विषय हैं तथा इन क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा की गयी.

प्रधानमंत्री ने कहा कि कृषि के क्षेत्र में भी दोनों देशों के बीच करीबी सहयोग की काफी संभावनाएं हैं. यूनान के प्रधानमंत्री की भारत यात्रा मोदी की उस देश की यात्रा के लगभग छह महीने बाद हो रही है. मोदी ने कहा, ”पिछले साल यूनान की मेरी यात्रा के बाद उनकी भारत यात्रा दोनों देशों के बीच मजबूत होती रणनीतिक साझेदारी का संकेत है.” मोदी के साथ बातचीत से पहले मित्सोटाकिस का राष्ट्रपति भवन के प्रांगण में औपचारिक स्वागत किया गया.

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सुबह यूनान के प्रधानमंत्री से मुलाकात की. जयशंकर ने ‘एक्स’ पर पोस्ट में कहा, ”आज यूनान के प्रधानमंत्री किरियाकोस मित्सोटाकिस से मुलाकात करके खुशी हुई. उन्होंने भारत-यूनान संबंधों को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई. दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी के मजबूत होने की उम्मीद है.” यूनान के प्रधानमंत्री ने आज सुबह राजघाट पर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित करके भारत की अपनी यात्रा शुरू की.

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