उत्तर प्रदेश: रेणुका मिश्रा को उप्र पुलिस भर्ती बोर्ड के अध्यक्ष पद से हटाया गया, राजीव कृष्ण को जिम्मेदारी

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Tue, 05 Mar 2024 08:02 PM
उत्तर प्रदेश: रेणुका मिश्रा को उप्र पुलिस भर्ती बोर्ड के अध्यक्ष पद से हटाया गया, राजीव कृष्ण को जिम्मेदारी
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लखनऊ. उत्तर प्रदेश पुलिस आरक्षी भर्ती परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक होने और परीक्षा रद्द करने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने मंगलवार को उप्र पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड की अध्यक्ष रेणुका मिश्रा को हटा दिया. एक अधिकारी ने यह जानकारी दी. सरकार ने 1990 बैच की भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) की अधिकारी रेणुका मिश्रा को 14 जून 2023 को महानिदेशक व अध्यक्ष उप्र पुलिस भर्ती व प्रोन्नति बोर्ड की जिम्मेदारी सौंपी थी.

उन्होंने बताया कि 1991 बैच के आईपीएस अधिकारी सतर्कता निदेशक राजीव कृष्ण को बोर्ड की अतिरिक्त जिम्मेदारी दी गयी है.
प्रश्नपत्र लीक होने के आरोपों के बाद राज्य सरकार ने 24 फरवरी को उत्तर प्रदेश पुलिस आरक्षी भर्ती परीक्षा रद्द कर दी थी और छह महीने के भीतर दोबारा परीक्षा कराने का आदेश दिया था.

राज्य सरकार ने आरोपों की जांच उप्र पुलिस के विशेष कार्य बल (एसटीएफ) से कराने की भी घोषणा की थी. इसी वर्ष 17 और 18 फरवरी को आयोजित परीक्षा में राज्य भर में 48 लाख से ज्यादा अभ्यर्थी शामिल हुए थे. सरकार ने यह भी घोषणा की थी कि उत्तर प्रदेश पुलिस का एक विशेष कार्य बल (एसटीएफ) इस मामले की जांच करेगा.

सोशल मीडिया मंच एक्स पर अपने एक पोस्ट में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 24 फरवरी को कहा था, “किसी के साथ कोई समझौता नहीं किया जा सकता है. परीक्षाओं की पवित्रता और युवाओं की मेहनत से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा. ऐसे उपद्रवी तत्वों के खिलाफ सख्त कार्रवाई निश्चित है.” पुलिस भर्ती परीक्षा से पहले या उसके दौरान अनुचित साधनों का उपयोग करने या अपनाने की योजना बनाने के आरोप में पूरे उत्तर प्रदेश में पुलिस ने 240 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया या हिरासत में लिया था.

राज्य के गृह विभाग ने पहले कहा था, “17 और 18 फरवरी को आयोजित पुलिस भर्ती परीक्षा से संबंधित जानकारी और तथ्यों के आधार पर, सरकार ने शुचिता और पारर्दिशता के उच्चतम मानकों को ध्यान में रखते हुए परीक्षा रद्द करने का निर्णय लिया है.” बयान में कहा गया था कि सरकार ने भर्ती बोर्ड को निर्देश दिया है कि जिस स्तर पर ढिलाई बरती गई है, उस स्तर पर प्राथमिकी दर्ज कर आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जाए. सरकार ने इस मामले की जांच एसटीएफ से कराने का फैसला किया है. दोषी व्यक्तियों और संगठन के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के निर्देश भी जारी किए गए हैं. बयान में कहा गया था कि पुन: परीक्षा छह महीने के भीतर आयोजित की जाएगी और यूपीएसआरटीसी की सरकारी बसें उम्मीदवारों को मुफ्त में परीक्षा केंद्रों तक ले जाएंगी.

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