भारत का चीन के साथ व्यापार घाटा इस साल के पहले नौ महीनों में 100 अरब डॉलर के पार पहुंच गया। इस दौरान भारत का चीन को निर्यात 40.7 प्रतिशत बढ़ा, लेकिन चीन से निर्यात में लगातार तेज वृद्धि के बीच व्यापार घाटा भी बढ़ा। चीन के सीमा शुल्क सामान्य प्रशासन की ओर से बुधवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, भारत का चीन के साथ व्यापार घाटा पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 20.7 प्रतिशत बढकर 105.93 अरब डॉलर हो गया।
आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी से सितंबर के दौरान दोनों देशों के बीच कुल द्विपक्षीय व्यापार 25.4 प्रतिशत बढकर 144.45 अरब डॉलर हो गया।
इस अवधि में चीन का भारत को निर्यात 23.3 प्रतिशत बढकर 125.19 अरब डॉलर रहा। वहीं, भारत का चीन को निर्यात पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 40.7 प्रतिशत बढकर 19.26 अरब डॉलर हो गया। चीन के निर्यात में इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद, मशीनरी और रसायनों की प्रमुख हिस्सेदारी है। इनका इस्तेमाल भारत के विनिर्माण क्षेत्र में होता है।
आंकड़ों के अनुसार, भारत के चीन को निर्यात में अयस्क, ईंधन, समुद्री खाद्य उत्पाद और कृषि ंिजस जैसी प्राथमिक वस्तुओं एवं प्राकृतिक संसाधनों से जुड़े उत्पादों की हिस्सेदारी है। चीन के व्यापार संबंधी आंकड़े जनवरी से दिसंबर तक की अवधि के आधार पर तैयार किए जाते हैं, जबकि भारत के आंकड़े अप्रैल से मार्च तक के वित्त वर्ष के अनुसार होते हैं।
भारत के वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, पिछले वित्त वर्ष में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 151.1 अरब डॉलर रहा था। वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का चीन को निर्यात 36.66 प्रतिशत बढकर 19.47 अरब डॉलर हो गया, जबकि चीन से आयात 16 प्रतिशत बढकर 131.63 अरब डॉलर रहा। इस दौरान भारत का चीन के साथ व्यापार घाटा बढकर रिकॉर्ड 112.6 अरब डॉलर हो गया, जो वित्त वर्ष 2024-25 में 99.2 अरब डॉलर था।
भारत कई वर्षों से चीन से सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी), दवा और कृषि उत्पादों जैसे क्षेत्रों में अपने उत्पादों के लिए बाजार खोलने की मांग करता रहा है। ये ऐसे क्षेत्र हैं, जिनमें भारत की मजबूत स्थिति है, लेकिन इस दिशा में उसे बहुत कम सफलता मिली है।