जम्मू. जम्मू-कश्मीर अपने विभाजन के बाद से पहले बड़े चुनावी मुकाबले का गवाह बनेगा. वर्ष 2019 के आम चुनाव के बाद जम्मू-कश्मीर का विभाजन कर इसे केंद्र शासित प्रदेश बना दिया गया था. जम्मू-कश्मीर में लोकसभा की पांच सीट हैं, जिसमें से तीन से नेशनल कॉन्फ्रेंस, जबकि दो सीट से भाजपा के सांसद हैं.
जून 2018 में पीडीपी-भाजपा सरकार के पतन के बाद से जम्मू-कश्मीर केंद्र के शासन के अधीन है. जम्मू-कश्मीर में आखिरी विधानसभा चुनाव 2014 में हुआ था. 5 अगस्त, 2019 को अनुच्छेद 370 निरस्त होने के बाद जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम के तहत मई 2022 में परिसीमन की प्रक्रिया पूरी हुई थी. परिसीमन में 90 विधानसभा और पांच संसदीय क्षेत्रों की सीमाओं को संशोधित किया गया था.
लोकसभा चुनाव के कुल सात चरणों में से पहले पांच चरण में जम्मू-कश्मीर में मतदान होगा. उधमपुर में 19 अप्रैल, जम्मू में 26 अप्रैल, अनंतनाग-राजौरी में सात मई, श्रीनगर में 13 मई और बारामूला में 20 मई को मतदान होगा. परिणाम चार जून को घोषित किए जाएंगे.
जम्मू-कश्मीर में प्रमुख संसदीय सीट इस प्रकार हैं, जहां कड़ा मुकाबला देखने को मिल सकता है :
1. उधमपुर: केंद्रीय मंत्री जितेन्द्र सिंह यहां भाजपा उम्मीदवार के रूप में जीत की हैट्रिक बनाना चाहेंगे. पेशे से चिकित्सक सिंह ने 2019 में पूर्व महाराजा हरि सिंह के पोते और कांग्रेस के उम्मीदवार विक्रमादित्य सिंह को 3,53,272 मतों के भारी अंतर से हराकर उधमपुर लोकसभा सीट बरकरार रखी थी. सिंह ने 2014 में पूर्व केंद्रीय मंत्री गुलाम नबी आजाद को 60,976 वोटों से हराया था.
2. श्रीनगर: नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला 2017 में हुए उपचुनाव में जीत हासिल कर इस सीट से सांसद बने थे, तब से वह यहां से सांसद हैं. इस सीट से पीडीपी सांसद तारिक हमीद कर्रा इस्तीफा देकर कांग्रेस में शामिल हो गए थे, जिसके बाद उपचुनाव हुआ था.
अब्दुल्ला ने 2019 के आम चुनाव में अपने निकटतम पीडीपी उम्मीदवार आगा सैयद मोहसिन को 70,000 से अधिक मतों के अंतर से हराया था.
3. अनंतनाग-राजौरी: इस संसदीय क्षेत्र में दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग, शोपियां और कुलगाम जिलों व जम्मू क्षेत्र के सीमावर्ती जिलों राजौरी और पुंछ के अधिकांश हिस्से आते हैं. भाजपा जम्मू-कश्मीर में लोकसभा सीटों की अपनी संख्या में सुधार करना चाहती है, इसलिए इस सीट पर उसका खासा ध्यान है. परिसीमन आयोग ने इस सीट का बड़े पैमाने पर पुर्निनर्धारण किया है. फिलहाल नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता और पूर्व न्यायाधीश हसनैन मसूदी इस सीट से सांसद हैं, जिन्होंने आम चुनाव में पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती को हराया था.
भाजपा ने श्रीनगर लोकसभा सीट के लिए चुनाव प्रचार शुरू किया
निर्वाचन आयोग द्वारा लोकसभा चुनाव की घोषणा के 24 घंटे के भीतर ही भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने श्रीनगर लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र में प्रचार अभियान शुरू कर दिया है, यद्यपि श्रीनगर लोकसभा सीट उन 400 सीट में शामिल नहीं है जिस पर भाजपा को जीत का भरोसा है. इसके बावजूद बदलाव की उम्मीद में पार्टी ने श्रीनगर जिले के ‘क्लस्टर’ और बूथ प्रमुखों की बैठक की. भाजपा की जम्मू-कश्मीर इकाई के वरिष्ठ नेता सुरिंदर अंबरदार ने जवाहर नगर नगरपालिका पार्क में रविवार को आयोजित कार्यकर्ताओं की एक रैली में कहा कि पार्टी ने प्रभावी चुनाव अभियान के लिए दो से तीन बूथ वाले क्लस्टर बनाए हैं.
सुरिंदर अंबरदार ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ” भाजपा कैडर आधारित संगठन है. यहां तैयारी श्रीनगर जिले के आठ विधानसभा क्षेत्रों के लिए है. हमने ‘क्लस्टर’ की संरचना बनाई है जिसमें दो से तीन बूथ शामिल हैं. यह क्लस्टर प्रमुखों और बूथ प्रमुखों की एक संगठनात्मक बैठक है. ” जम्मू-कश्मीर विधान परिषद के पूर्व सदस्य अंबरदार ने कहा कि अब जबकि निर्वाचन आयोग ने लोकसभा चुनाव के कार्यक्रम की घोषणा कर दी है, पार्टी अपने चुनावचिह्न, विचारधारा और प्रदर्शन कार्ड के साथ मतदाताओं के पास जाएगी.
उन्होंने कहा, ”
भाजपा अपनी विचारधारा और प्रदर्शन के आधार पर चुनाव लड़ती है. उम्मीदवार महत्वपूर्ण है लेकिन संगठन श्रेष्ठ है. हमें अपना चुनाव चिह्न कमल लोगों के पास ले जाना है ताकि वे हमें वोट दें.” यह पूछे जाने पर कि क्या भाजपा अपने चुनाव अभियान के चेहरे के रूप में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर भरोसा कर रही है, अंबरदार ने कहा कि प्रधानमंत्री जी इससे कहीं अधिक हैं.
उन्होंने कहा, ” नरेन्द्र मोदी सिर्फ इस चुनाव अभियान का चेहरा नहीं हैं, वह एक मशहूर शख्सियत, एक वैश्विक नेता और ‘गेम चेंजर’ हैं. श्रीनगर सीट उन 400 सीट में शामिल नहीं है जिस पर भाजपा को जीत का भरोसा है. हम यहां इस आंकड़े को 401 पर ले जाने के लिए प्रयासरत हैं.” श्रीनगर लोकसभा सीट परंपरागत रूप से नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) का गढ़ रही है और यह क्षेत्रीय पार्टी यहां से केवल एक बार 2014 में हारी है. पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) के उम्मीदवार तारिक हामिद कर्रा ने 2014 में फारूक अब्दुल्ला को हराया था. तारिक इसके बाद कांग्रेस में शामिल हो गए थे.