रूस ने प्रतिबंधों की आलोचना की, खाद्य संकट की जिम्मेदारी दूसरों पर डालने की कोशिश

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Thu, 26 May 2022 09:54 PM
रूस ने प्रतिबंधों की आलोचना की, खाद्य संकट की जिम्मेदारी दूसरों पर डालने की कोशिश

ऑडियो सुनें

कीव. रूस ने यूक्रेन में युद्ध को लेकर उसके खिलाफ प्रतिबंधों को हटाने के लिए बृहस्पतिवार को पश्चिम पर दबाव डाला, जबकि जंग के चलते लाखों टन अनाज और अन्य कृषि उत्पादों को दूसरे देशों को भेजने में कीव की अक्षमता के कारण बढ़ते खाद्य संकट का ठीकरा भी दूसरे देशों पर फोड़ने की कोशिश की. ब्रिटेन ने तुरंत ही मॉस्को पर ‘‘दुनिया को फिरौती के लिये बंधक बनाने की कोशिश’’ का आरोप लगाया और कहा कि प्रतिबंधों में कोई रियायत नहीं दी जाएगी.

यूक्रेन गेहूं, मक्का और सूरजमुखी के तेल के दुनिया के सबसे बड़े निर्यातकों में से एक है, लेकिन युद्ध के दौरान रूस ने उसके बंदरगाहों की नाकेबंदी कर रखी है जिससे वह अपने उत्पादों को दूसरे देशों को नहीं भेज पा रहा. ऐसे में विश्व खाद्य आपूर्ति खतरे में पड़ गई है. उन बंदरगाहों में से कई में अब भी बड़ी मात्रा में बारुदी सुरंगें हैं.

क्रेमलिन (रूसी राष्ट्रपति कार्यालय) के प्रवक्ता दमित्री पेस्कोव ने इस संकट का ठीकरा पश्चिमी देशों पर फोड़ने की कोशिश की.
उन्होंने पत्रकारों के साथ एक कॉन्फ्रेंस कॉल में कहा, ‘‘हम पश्चिमी देशों पर कई गैरकानूनी कार्रवाई करने का आरोप लगाते हैं, जिसके कारण नाकाबंदी हुई है.’’ रूस खुद भी अनाज का बड़ा निर्यातक है और पेस्कोव ने कहा कि पश्चिमी देशों को ‘‘गैरकानूनी फैसलों को रद्द करना चाहिए जिनकी वजह से जहाजों को भेजने और अनाज के निर्यात में बाधा आ रही हैं.’’ रूस के इस बयान को जानबूझ कर यूक्रेनी नाकेबंदी के लिए पश्चिम को जिम्मेदार ठहराने के प्रयास के तौर पर देखा जा रहा है जिसमें वह खुद के बचाव के लिये अपने अनाज का निर्यात न कर पाने की बात कर रहा है.

पश्चिमी अधिकारियों ने इन दावों को खारिज किया है. अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ंिब्लकन ने पिछले हफ्ते कहा कि खाद्य, उर्वरक और बीज अमेरिका और कई अन्य देशों द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों से मुक्त हैं – और वांिशगटन यह सुनिश्चित करने के लिए काम कर रहा है कि देशों को पता चले कि उन सामान का प्रवाह प्रभावित नहीं होना चाहिए. युद्ध को शुरू हुए चौथा महीना हो चला है और दुनिया भर के नेता इस हफ्ते इसके समाधान का आ’’ान कर रहे हैं.

इस बीच रूसी रक्षा मंत्रालय ने बुधवार को विदेशी जहाजों को काला सागर बंदरगाहों को छोड़ने की अनुमति देने के लिए एक गलियारा खोलने और दूसरा गलियारा जहाजों को आजÞोव सागर पर मारियुपोल छोड़ने के लिये खोलने का प्रस्ताव रखा. रूस के राष्ट्रीय रक्षा नियंत्रण केंद्र के प्रमुख मिखाइल मिजÞंितसेव ने कहा कि 16 देशों के 70 विदेशी जहाज अब काला सागर के छह बंदरगाहों में हैं, जिनमें ओडेसा, खेरसॉन और मायकोलाइव शामिल हैं. उन्होंने यह निर्दिष्ट नहीं किया कि कितने भोजन ले जाने के लिए तैयार हो सकते हैं.

उधर यूक्रेन ने रूसी प्रस्ताव को लेकर संदेह व्यक्त किया. दावोस में यूक्रेनी विदेश मंत्री दिमित्रो कुलेबा ने कहा कि देश सैद्धांतिक रूप से सुरक्षित गलियारों पर सहमत होने के लिए तैयार था – लेकिन यह सुनिश्चित नहीं था कि क्या वह रूस पर किसी समझौते का पालन करने को लेकर भरोसा कर सकता है.

ब्रिटिश विदेश मंत्री लिजÞ ट्रस ने आज कहा कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन यूक्रेनी अनाज की खेप को फिर से शुरू करने की अनुमति देने से पहले कुछ प्रतिबंधों को हटाने की मांग करके ‘‘फिरौती के लिए दुनिया को बंधक बनाने की कोशिश कर रहे है.’’ साराजेवो की यात्रा के दौरान ट्रस ने कहा, ‘‘उसने अनिवार्य रूप से दुनिया भर के सबसे गरीब लोगों के बीच भूख और भोजन की कमी को हथियार बनाया है.’’

उन्होंने कहा, ‘‘ प्रतिबंधों को हटाना संभव नहीं है, कोई भी तुष्टिकरण लंबी अवधि में पुतिन को और मजबूत बनाएगा.’’ युद्ध के मैदान में, यूक्रेनी सेना के जनरल स्टाफ ने बृहस्पतिवार को कहा कि रूसी सेना यूक्रेन के पूर्वी डोनबास क्षेत्र के अग्रिम पंक्ति के कई हिस्सों में अपने हमले को तेज करने का प्रयास जारी रखे हुए है. कई झटके झेलने के बाद रूस ने कोयले की खदानों और कारखानों वाले इस औद्योगिक क्षेत्र में लड़ाई पर ध्यान केंद्रित किया है. सैन्य अधिकारियों ने कहा कि रूसी बलों ने सिविएरोडोनेट्सक के क्षेत्र में पैर जमाने के अपने प्रयास जारी रखे, जो यूक्रेनी सरकार के नियंत्रण में डोनबास में लुहान्स्क क्षेत्र का एकमात्र हिस्सा है.

By Yogesh Kumar Sahu