नयी दिल्ली. लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सोमवार को कहा कि वह मेडिकल प्रवेश परीक्षा ‘नीट-यूजी’ में कथित अनियमितता का मुद्दा संसद के भीतर उठाते रहेंगे तथा सरकार पर दबाव बनाएंगे. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इस विषय पर चर्चा के लिए तैयार नहीं है.
राहुल गांधी ने संसद भवन परिसर में संवाददाताओं से कहा, ”शिक्षा मंत्री जी को नीट के मुद्दे पर जवाब देना चाहिए. मंत्री जी ने उच्चतम न्यायालय और प्रधानमंत्री की बात की, लेकिन वे यह नहीं बता पा रहे हैं कि वो नीट के मुद्दे पर क्या कर रहे हैं?” उनका कहना था, ”देश के युवाओं को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है. हम चाहते हैं कि सरकार इस पर चर्चा करे, लेकिन वे तैयार नहीं हैं. हम ये मुद्दा उठाते रहेंगे और सरकार पर दबाव बनाते रहेंगे.”
इससे पहले, राहुल गांधी ने मेडिकल प्रवेश परीक्षा ‘नीट’ में कथित अनियमितता के विषय को लेकर सोमवार को सदन में सरकार पर प्रहार किया और दावा किया कि देश के करोड़ों छात्रों एवं देशवासियों को ”इस बात का यकीन हो गया है कि भारतीय परीक्षा प्रणाली एक ‘फ्रॉड’ (धोखे वाली) है तथा जिसके पास पैसा है वह इस पूरी प्रणाली को खरीद सकता है”. गत पांच मई को 23.33 लाख से अधिक अ्भ्यियथयों ने 571 शहरों के 4,750 केंद्रों पर नीट-यूजी परीक्षा दी थी. इन शहरों में 14 विदेशी शहर भी शामिल थे.
राहुल ने भारतीय परीक्षा प्रणाली को ‘फ्रॉड’ बताया, शिक्षा मंत्री ने पलटवार किया
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने मेडिकल प्रवेश परीक्षा ‘नीट’ में कथित अनियमितता के विषय को लेकर सोमवार को सदन में सरकार पर प्रहार किया और दावा किया कि देश के करोड़ों छात्रों एवं देशवासियों को ”इस बात का यकीन हो गया है कि भारतीय परीक्षा प्रणाली एक ‘फ्रॉड’ (धोखे वाली) है तथा जिसके पास पैसा है वह इस पूरी प्रणाली को खरीद सकता है”.
इस पर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने पलटवार किया और सवाल किया कि क्या 2010 में कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार ने शिक्षा में सुधार से जुड़ा विधेयक निजी मेडिकल कॉलेजों के दबाव में वापस ले लिया था? उन्होंने यह भी कहा कि नेता प्रतिपक्ष का पूरी परीक्षा प्रणाली को ‘बकवास’ कहना दुर्भाग्यपूर्ण है.
सदन में प्रश्नकाल के दौरान नीट के विषय पर पूरक प्रश्न पूछते हुए राहुल गांधी ने कहा, ”परीक्षा प्रणाली में बहुत खामियां हैं. मंत्री ने अपने आपको छोड़कर, सबको जिम्मेदार ठहराया है…मुझे नहीं लगता कि जो चल रहा है, उसकी बुनियादी जानकरी भी उन्हें है.” उन्होंने दावा किया कि करोड़ों छात्र आज चिंतित हैं तथा उन्हें ”इस बात का यकीन हो गया है कि भारतीय परीक्षा प्रणाली एक ‘फ्रॉड’ है”.
कांग्रेस नेता ने कहा, ”करोड़ों लोगों का मानना है कि अगर आपके पास पैसा है, आप अमीर हैं तो आप भारतीय परीक्षा प्रणाली को खरीद सकते हैं. यही भावना विपक्ष की भी है.”
उन्होंने सवाल किया कि सरकार व्यवस्थागत स्तर पर चीजों को दुरुस्त करने के लिए क्या कर रही है? इस पर प्रधान ने कहा, ”मुझे बौद्धिकता और संस्कार का प्रमाणपत्र किसी से नहीं चाहिए. देश के लोकतंत्र ने हमारे प्रधानमंत्री को चुना है मैं उनके निर्णय से यहां जवाब दे रहा हूं.” शिक्षा मंत्री ने कहा, ”यह कहा गया कि देश की भारतीय परीक्षा प्रणाली बकवास है, इससे दुर्भाग्यपूर्ण बयान कुछ नहीं हो सकता. मैं इसकी निंदा करता हूं.” उन्होंने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा, ”जिन्होंने रिमोट से सरकारें चलाई हैं, उनके समय के शिक्षा मंत्री 2010 में तीन विधेयक लेकर आए थे, उनमें एक विधेयक शिक्षा में सुधार से जुड़ा विधेयक था.”
प्रधान का कहना था, ”हमारी सरकार की हिम्मत है कि हमने (पेपर लीक पर) कानून बनाया, लेकिन कांग्रेस और नेता प्रतिपक्ष की क्या मजबूरी थी कि उनके समय लाए गए विधेयक को वापस लिया गया? क्या निजी मेडिकल कॉलेज और उनकी घूसखोरी के दबाव में इसे वापस लिया गया था?” सदन में हंगामे के बीच लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि सदन में सार्थक चर्चा होनी चाहिए, लेकिन सारी परीक्षाओं पर सवाल उठाना ठीक नहीं है.