वियनतियान (लाओस). विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बृहस्पतिवार को यहां अपने चीनी समकक्ष वांग यी से मुलाकात की और बीजिंग के साथ द्विपक्षीय संबंधों में ”स्थायित्व लाने” और ”पुनर्बहाली” के लिए वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) तथा पिछले समझौतों का ”पूर्ण सम्मान” सुनिश्चित किए जाने की आवश्यकता पर बल दिया. यह जयशंकर और वांग की इस महीने दूसरी मुलाकात थी. दक्षिण पूर्व एशियाई देशों के संगठन (आसियान) की बैठकों में भाग लेने के लिए लाओस की राजधानी में मौजूद दोनों नेताओं ने मई 2020 में पूर्वी लद्दाख में सैन्य गतिरोध के बाद सैनिकों की वापसी की प्रक्रिया को पूरा करने के लिए मजबूत मार्गदर्शन देने की आवश्यकता पर भी सहमति व्यक्त की.
जयशंकर ने यहां आसियान विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान वांग से मुलाकात के बाद सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ”सीपीसी (कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना) पोलित ब्यूरो सदस्य और (चीन के) विदेश मंत्री वांग यी से आज वियनतियान में मुलाकात की. हमारे द्विपक्षीय संबंधों को लेकर चर्चा जारी रही. सीमा की स्थिति निश्चित रूप से हमारे संबंधों की स्थिति पर प्रतिबिंबित होगी.” भारत का कहना है कि जब तक सीमा क्षेत्रों में शांति नहीं होगी, चीन के साथ उसके संबंध सामान्य नहीं हो सकते.
जयशंकर और वांग के बीच वार्ता पूर्वी लद्दाख में सीमा विवाद जारी रहने के बीच हुई जो मई में अपने पांचवें वर्ष में प्रवेश कर गया.
उन्होंने कहा, ”वापसी प्रक्रिया को पूरा करने के लिए मार्गदर्शन दिए जाने की आवश्यकता पर सहमति बनी. एलएसी और पिछले समझौतों का पूरा सम्मान सुनिश्चित किया जाना चाहिए. हमारे संबंधों को स्थिर करना हमारे आपसी हित में है. हमें वर्तमान मुद्दों पर उद्देश्य और तत्परता की भावना का रुख रखना चाहिए.” विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि बैठक ने दोनों मंत्रियों को चार जुलाई को अस्ताना में अपनी पिछली बैठक के बाद से स्थिति की समीक्षा करने का अवसर दिया.
मंत्रालय ने कहा, ”उनकी बातचीत द्विपक्षीय संबंधों में स्थायित्व लाने और पुनर्बहाली के लिए वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) से संबंधित शेष मुद्दों का शीघ्र समाधान खोजने पर केंद्रित थी.” इसने कहा, ”दोनों मंत्री जल्द से जल्द सैनिकों की पूर्ण वापसी के लिए उद्देश्य और तत्परता के साथ काम करने की आवश्यकता पर सहमत हुए. सीमाओं पर शांति तथा एलएसी के प्रति सम्मान द्विपक्षीय संबंधों में सामान्य स्थिति के लिए आवश्यक है.” विदेश मंत्रालय ने कहा, ”दोनों पक्षों को अतीत में दोनों सरकारों के बीच हुए प्रासंगिक द्विपक्षीय समझौतों, प्रोटोकॉल और समझ का पूरी तरह से पालन करना चाहिए. विदेश मंत्री ने हमारे संबंधों के लिए तीन परस्पर महत्वों-आपसी सम्मान, आपसी हित और आपसी संवेदनशीलता पर जोर दिया.” बयान में कहा गया है कि दोनों पक्ष चर्चा को आगे बढ़ाने के लिए भारत-चीन सीमा मामलों पर परामर्श और समन्वय तंत्र (डब्ल्यूएमसीसी) की जल्द ही बैठक करेंगे.
विदेश मंत्रालय ने कहा कि दोनों मंत्रियों ने वैश्विक और क्षेत्रीय स्थिति पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया. चार जुलाई को, दोनों नेताओं ने शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के शिखर सम्मेलन के मौके पर कजाकिस्तान की राजधानी अस्ताना में मुलाकात की थी.
अस्ताना में बैठक के दौरान, जयशंकर ने भारत के इस दृढ़ दृष्टिकोण की पुष्टि की थी कि दोनों पक्षों के बीच संबंध आपसी सम्मान, आपसी हित और आपसी संवेदनशीलता पर आधारित होने चाहिए.
मई 2020 से भारतीय और चीनी सेनाओं के बीच गतिरोध है तथा सीमा विवाद का पूर्ण समाधान अभी तक नहीं हो पाया है, हालांकि दोनों पक्ष टकराव वाले कई बिंदुओं से पीछे हटे हैं. जून 2020 में गलवान घाटी में हुई भीषण झड़प के बाद दोनों देशों के बीच संबंधों में काफी गिरावट आई थी, जो दोनों पक्षों के बीच दशकों में सबसे गंभीर सैन्य संघर्ष था. गतिरोध को हल करने के लिए दोनों पक्षों के बीच अब तक कोर कमांडर स्तर की 21 दौर की वार्ता हो चुकी है. भारत चीन पर देपसांग और डेमचोक क्षेत्रों से पीछे हटने का दबाव बनाता रहा है.
जयशंकर ने आसियान देशों के विदेशमंत्रियों साथ द्विपक्षीय बैठक की
विदेश मंत्री एस.जयशंकर ने बृहस्पतिवार को आसियान बैठक से इतर फिलीपीन, नार्वे, कंबोडिया और तिमोर लेस्ते के अपने समकक्षों से मुलाकात की और इस दौरान द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने और हिंद-प्रशांत क्षेत्र की प्राथमिकताओं पर चर्चा की. जयशंकर और अन्य सभी नेता इस समय लाओस की राजधानी वियनतियाने में आसियान ढांचे के तहत आसियान-भारत, पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन (ईएएस) और आसियान क्षेत्रीय मंच (एआरएफ) में हिस्सा लेने के लिए मौजूद हैं. उन्होंने कहा कि वह आसियान के साथ भारत के संबंधों को और अधिक प्रगाढ़ बनाने के लिए उत्सुक हैं, क्योंकि नयी दिल्ली, एक्ट ईस्ट नीति का एक दशक पूरा कर रही है.
नार्वे के विदेशमंत्री एस्पेन बार्थ इडे के साथ बैठक के बाद जयशंकर ने कहा, ” आज एस्पेन बार्थ इडे से मुलाकात अच्छी रही. भारत और नार्वे की स्वच्छ ऊर्जा तथा व्यापार में साझेदारी जारी रहेगी. दोनों देशों की बेहतरी के लिए यूरोपीय मुक्त व्यापार समझौते (ईएफटीए) को क्रियान्वित करने को लेकर प्रतिबद्ध हैं. भू राजनीति स्थिति पर भी चर्चा हुई.” इडे ने कहा कि जयशंकर के साथ बैठक ”बेहद अच्छी रही”. उन्होंने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा, ”मैंने, चुनाव परिणामों के लिए और भारत के विदेश मंत्री के रूप में उनकी पुन? नियुक्ति के लिए उन्हें बधाई दी. नॉर्वे अगले नॉर्डिक-भारत शिखर सम्मेलन की मेजबानी के लिए उत्सुक है.” जयशंकर ने ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा कि वह अपने मित्र फिलीपीन के एनरिक ए मनालो से मिलकर ”खुश हैं”.
उन्होंने कहा, ”दोनों लोकतंत्रों के बीच मजबूत होते हमारे सहयोग और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में साझेदारी, विशेष रूप से कानून के शासन और आसियान की प्रमुखता बनाए रखने पर चर्चा की.” चीन, दक्षिण चीन सागर के अधिकांश हिस्से पर अपना दावा करता है और उसका फिलीपीन के साथ टकराव है. दोनों पक्षों ने टकराव खत्म करने के लिए हाल ही में एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं. जयशंकर ने तिमोर लेस्ते के विदेश मंत्री बेंडिटो फ्रेटास और कंबोडिया के उप प्रधानमंत्री एवं विदेश मंत्री सोक चेंदा सोफिया के साथ भी द्विपक्षीय बैठक की.
फ्रेटास से मुलाकात के बाद जयशंकर ने सोशल मीडिया मंच पर कहा, ”आसियान बैठक से इतर तिमोर लेस्ते के विदेश मंत्री बेंडिटो फ्रेटास से मुलाकात कर प्रसन्नता हुई. हमारी दिल्ली (भारत की राजधानी) से दिली (तिमोर लेस्ते की राजधानी) की दोस्ती विविधतापूर्ण और गहरी होनी जारी रहेगी. हिंद-प्रशांत क्षेत्र की साझा प्राथमिकताओं पर एक दूसरे से अपने-अपने विचार साझा किए.” विदेश मंत्री ने एक अन्य पोस्ट में कहा, ”कंबोडिया के उप प्रधानमंत्री एवं विदेश मंत्री सोक चेंडा सोफिया से मिलकर खुशी हुई. हवाई संपर्क, रक्षा और विरासत संरक्षण सहित हमारे द्विपक्षीय संबंधों में प्रगति पर गौर किया. इसे और आगे बढ़ाने के लिए उत्सुक हूं.”
विदेश मंत्रालय ने उनकी यात्रा से पहले नयी दिल्ली में कहा कि जयशंकर की लाओस यात्रा इसलिए विशेष महत्व रखती है क्योंकि इस वर्ष भारत की ‘एक्ट ईस्ट’ नीति का एक दशक पूरा हो रहा है जिसकी घोषणा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 2014 में नौवें पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन में की थी. दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के विदेश मंत्री और अमेरिका तथा चीन जैसे प्रमुख साझेदार देशों के शीर्ष राजनयिक तीन दिवसीय बैठक के लिए लाओस की राजधानी में एकत्र हुए हैं. अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन और चीनी विदेश मंत्री वांग यी भी इसमें हिस्सा ले रहे हैं.