वाशिंगटन. कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि इस बार भारत में आम चुनाव के नतीजों ने ”मोदी का विचार” ध्वस्त कर दिया और प्रधानमंत्री द्वारा पैदा किया गया ”डर” गायब हो गया तथा ”इतिहास” बन गया. लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल अभी अमेरिका की चार दिवसीय यात्रा पर हैं. उन्होंने सोमवार को यहां प्रतिष्ठित जॉर्जटाउन यूनिर्विसटी और वाशिंगटन डीसी के वर्जीनिया के एक उपनगर हर्नडॉन में एक अन्य कार्यक्रम को संबोधित किया.
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राहुल ने कहा कि लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए सभी को समान अवसर उपलब्ध नहीं थे और उन्होंने दावा किया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की अगुवाई में सत्तारूढ़ गठबंधन ध्वस्त हो गया, ”एकदम बीच से” टूट गया. राहुल ने कहा कि लोकसभा चुनाव के नतीजे घोषित होने के बाद चीजें बदल गयी हैं. उन्होंने कहा, ”मोदी जी द्वारा पैदा किया डर एक सेकंड में गायब हो गया. उस डर को पैदा करने में कई साल लग गए, बहुत सारी योजनाएं बनायी गयी और काफी पैसा लगाया गया लेकिन इसे खत्म होने में केवल एक सेकंड लगा.” प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस साल लोकसभा चुनाव के बाद लगातार तीसरी बार सरकार बनायी लेकिन भाजपा को अपने दम पर बहुमत नहीं मिला.
राहुल ने कहा, ”मैं आपको बता दूं कि मोदी का विचार – 56 इंच का सीना, ईश्वर से सीधा जुड़ाव- सब गायब हो गया, अब यह इतिहास है.” उन्होंने यह भी दावा किया कि सत्तारूढ़ गठबंधन टूट गया है और ”बिल्कुल बीच से” टूट गया है. कांग्रेस नेता ने कहा, ”यह महज प्रधानमंत्री के बारे में नहीं है, यह उससे कहीं अधिक गहरा है. भारत में क्या हुआ है कि श्री (नरेन्द्र) मोदी को सत्ता में लाने वाला गठबंधन ही ध्वस्त हो गया. यह बिल्कुल बीच से टूट गया.”
उन्होंने कहा, ”इसलिए आप देखेंगे कि इन चुनावों में उन्हें परेशानी होगी. क्योंकि यह मूल विचार कि श्री मोदी भारत के लोगों के लिए सरकार चला रहे हैं, यह खत्म हो गया है.” राहुल ने आरोप लगाया कि लोकसभा चुनाव के लिए सभी को समान अवसर उपलब्ध नहीं कराए गए. उन्होंने कहा, ”मैं इसे स्वतंत्र चुनाव नहीं मानता हूं. मैं इसे काफी हद तक नियंत्रित चुनाव मानता हूं.” उन्होंने कहा, ”मुझे नहीं लगता कि अगर निष्पक्ष चुनाव होता तो भाजपा 240 सीटों के आसपास भी कहीं आती.” उन्होंने कहा कि पार्टी के पास ”भारी वित्तीय बढ़त” थी.
कांग्रेस नेता ने दावा किया, ”निर्वाचन आयोग वही कर रहा था जो वे चाहते थे. पूरा प्रचार अभियान ऐसे बनाया गया कि मोदी जी देशभर में अपना एजेंडा चला सकें.” उन्होंने कहा, ”कांग्रेस पार्टी ने अपने बैंक खाते सील होने के बीच चुनाव लड़ा और मूल रूप से मोदी का विचार ध्वस्त कर दिया. आप यह देख सकते हैं क्योंकि अब जब आप प्रधानमंत्री को संसद में देखते हैं…वह मनोवैज्ञानिक रूप से उलझ गए हैं और वह समझ नहीं पा रहे हैं कि यह कैसे हो गया.” एक सवाल पर राहुल ने कहा कि आधे प्रचार के बाद भी प्रधानमंत्री मोदी ने यह नहीं सोचा था कि उन्हें 300 या 400 के आसपास सीटें मिलेंगी.
उन्होंने कहा, ”मुझे लगता है कि उन्हें जल्द ही समझ आ गया था कि यह चीज गलत दिशा में जा रही है. हमें पुष्ट सूत्रों से प्रतिक्रियाएं मिल रही थीं…यह साफ था कि वे मुसीबत में हैं.” राहुल ने कहा, ”प्रधानमंत्री ऐसे व्यक्ति हैं, जैसा कि आप जानते हैं कि वह कई वर्षों तक गुजरात में थे और उन्होंने कभी राजनीतिक रूप से प्रतिकूल किसी स्थिति का सामना नहीं किया, फिर भारत के प्रधानमंत्री बन गए. अचानक से यह विचार टूटना शुरू हो गया.”
उन्होंने कहा, ”हम जानते थे. जब उन्होंने कहा कि मैं सीधे ईश्वर से बात करता हूं, तो हमें पता चल गया कि हमने वास्तव में उन्हें हिला दिया है. लोग सोचते थे कि प्रधानमंत्री का यह कहना है कि ‘मैं खास हूं, मैं अलग हूं और मैं ईश्वर से बात करता हूं’. लेकिन हम इसे ऐसे नहीं देखते थे. आंतरिक रूप से, हमने इसे मनोवैज्ञानिक रूप से टूटने के तौर पर देखा, यहां क्या हुआ? यह चीज कैसे काम नहीं कर रही है?” शनिवार को अमेरिका पहुंचे राहुल ने टेक्सास के डलास में भारतीय समुदाय के सदस्यों और युवाओं से बातचीत की. उनकी वाशिंगटन डीसी में सांसदों और अमेरिकी सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात करने की भी योजना है.
आरएसएस का मानना है कि कुछ धर्म, भाषाएं तुच्छ हैं : राहुल गांधी
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने आरोप लगाया है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) कुछ धर्मों, भाषाओं और समुदायों को अन्य की तुलना में कमतर मानता है. उन्होंने कहा कि भारत में राजनीति के लिए नहीं बल्कि इसी बात की लड़ाई लड़ी जा रही है.
लोकसभा में विपक्ष के नेता ने सोमवार को वाशिंगटन के वर्जीनिया उपनगर में हर्नडॉन में भारतीय अमेरिकी समुदाय के सैकड़ों लोगों को संबोधित करते हुए यह बात कही.
उन्होंने कहा, ”सबसे पहले आपको यह समझना होगा कि लड़ाई किस बारे में है. लड़ाई राजनीति के बारे में नहीं है.” राहुल ने वहां पहली पंक्ति में दर्शकों के बीच बैठे एक सिख व्यक्ति से पूछा, ”मेरे पगड़ीधारी भाई आपका क्या नाम है.” कांग्रेस नेता ने कहा, ”लड़ाई इस बात की है कि क्या एक सिख को भारत में पगड़ी या कड़ा पहनने का अधिकार है या नहीं. या एक सिख के रूप में वह गुरुद्वारा जा सकते हैं या नहीं. लड़ाई इसी बात के लिए है और यह सिर्फ उनके लिए ही नहीं बल्कि सभी धर्मों के लिए है.” राहुल गांधी वर्तमान में अमेरिका की चार दिवसीय यात्रा पर हैं. शनिवार से शुरू हुई उनकी यात्रा का पहला पड़ाव डलास था और वह सोमवार को वाशिंगटन पहुंचे.
उन्होंने आरएसएस की नीतियों और भारत के संदर्भ में उसके दृष्टिकोण की आलोचना की. उन्होंने कहा, ”आरएसएस वस्तुत: यही कहता है कि कुछ राज्य दूसरे राज्यों से कमतर हैं. कुछ भाषाएं दूसरी भाषाओं से तुच्छ हैं. कुछ धर्म दूसरे धर्मों से कमतर हैं. कुछ समुदाय दूसरे समुदायों से हीन हैं. इसी बात की लड़ाई है.” उन्होंने कहा कि अंतत: ये मुद्दे लोकसभा और विधानसभा चुनाव में मतदान केंद्र तक पहुंच जाते हैं. उन्होंने कहा, ”…आरएसएस की यह विचारधारा है कि तमिल, मराठी, बांग्ला, मणिपुरी, ये सभी तुच्छ भाषाएं हैं. लड़ाई इसी बात की है.” उन्होंने कहा, ”लेकिन लड़ाई इस बारे में भी है कि हम किस प्रकार का भारत चाहते हैं.” उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आप चाहे किसी भी क्षेत्र से हों, ”आप सभी का अपना इतिहास है, आप सभी की अपनी परंपरा है, आप सभी की अपनी भाषा है और उनमें से प्रत्येक उतना ही महत्वपूर्ण है जितना कि कोई अन्य.” राहुल गांधी ने यह भी कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को भारत की ”समझ” नहीं है.
जब भारत में आरक्षण को लेकर निष्पक्षता होगी तो हम आरक्षण खत्म करने के बारे में सोचेंगे: राहुल गांधी
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा है कि कांग्रेस पार्टी आरक्षण खत्म करने के बारे में तब सोचेगी, जब भारत में आरक्षण के लिहाज से निष्पक्षता होगी और अभी ऐसा नहीं है. राहुल ने यहां प्रतिष्ठित जॉर्जटाउन विश्वविद्यालय में छात्रों को संबोधित करते हुए यह बात कही.
यहां विश्वविद्यालय के छात्रों ने राहुल से आरक्षण को लेकर सवाल किया था और पूछा था कि यह कब तक जारी रहेगा. इस पर उन्होंने कहा, ”जब भारत में (आरक्षण के लिहाज से) निष्पक्षता होगी, तब हम आरक्षण खत्म करने के बारे में सोचेंगे. अभी भारत इसके लिए एक निष्पक्ष जगह नहीं है.” राहुल ने कहा, ”जब आप वित्तीय आंकड़ों को देखते हैं, तो आदिवासियों को 100 रुपये में से 10 पैसे मिलते हैं. दलितों को 100 रुपये में से पांच रुपये मिलते हैं और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लोगों को भी लगभग इतने ही पैसे मिलते हैं. सचाई यह है कि उन्हें उचित भागीदारी नहीं मिल रही है.”
उन्होंने कहा, ”समस्या यह है कि भारत की 90 प्रतिशत आबादी भागीदारी करने में सक्षम नहीं है. भारत के हर एक ‘बिजनेस लीडर’ की सूची देखें. मैंने ऐसा किया है. मुझे आदिवासी नाम दिखाओ. मुझे दलित नाम दिखाओ. मुझे ओबीसी नाम दिखाओ. मुझे लगता है कि शीर्ष 200 में से एक ओबीसी है. वे भारत की आबादी का 50 प्रतिशत हैं. लेकिन हम बीमारी का इलाज नहीं कर रहे हैं.” उन्होंने कहा, ”यही समस्या है. अब, यह (आरक्षण) एकमात्र साधन नहीं है. अन्य साधन भी हैं.”
राहुल गांधी ने कहा, ”ऐसे कई लोग हैं जो उच्च जाति से आते हैं, जो कहते हैं कि देखो, हमने क्या गलत किया है? हमें क्यों दंडित किया जा रहा है? तो, फिर आप इनमें से कुछ चीजों की आपूर्ति में नाटकीय रूप से वृद्धि के बारे में सोचते हैं. आप सत्ता के विकेंद्रीकरण के बारे में सोचते हैं. आप हमारे देश के शासन में कई और लोगों को शामिल करने के बारे में सोचते हैं. मैं पूरे सम्मान के साथ कहना चाहूंगा कि मुझे नहीं लगता कि आप में से कोई भी कभी भी अदाणी या अंबानी बनने जा रहा है. इसका एक ही कारण है. आप नहीं बन सकते क्योंकि इसके लिए दरवाजे बंद हैं. इसलिए सामान्य जाति के लोगों को जवाब है कि आप उन दरवाजों को खोलें.” समान नागरिक संहिता के बारे में पूछे जाने पर राहुल ने कहा कि वह इस पर तभी टिप्पणी करेंगे जब उन्हें पता चलेगा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का प्रस्ताव क्या है.