
तेहरान. पूर्वी ईरान में एक कोयला खदान में मीथेन गैस लीक होने के कारण हुए विस्फोट में कम से कम 34 मजदूरों की मौत हो गई और 17 अन्य घायल हो गए. अधिकारियों ने इसे ईरान के इतिहास की सबसे बड़ी खदान दुर्घटना करार देते हुए रविवार को कहा कि विस्फोट के घंटों बाद भी कई मजदूर लापता हैं.
अधिकारियों ने बताया कि राजधानी तेहरान से करीब 540 किलोमीटर दूर दक्षिण-पूर्व में स्थित तबास की कोयला खदान में शनिवार देर रात विस्फोट हुआ. उन्होंने बताया कि विस्फोट के दौरान लगभग 70 लोग खदान में काम कर रहे थे. सरकारी टेलीविजन चैनल ने बाद में अपनी खबर में बताया कि 700 मीटर (2,300 फुट) गहरी खदान में 17 मजदूरों के 200 मीटर (650 फुट) की गहराई पर फंसे होने की आशंका है. हालांकि, हादसे से प्रभावित मजदूरों की संख्या के बारे में दिन भर अलग-अलग आंकड़े सामने आते रहे.
प्रांत के एक आपातकालीन अधिकारी मोहम्मद अली अखून्दी ने सरकारी समाचार एजेंसी ‘आईआरएनए’ को रविवार दोपहर बताया कि बचाव अभियान जारी है और हादसे में जान गंवाने वाले मजदूरों की संख्या बढ़कर 34 हो गई है. खदान से निकाले गए मजदूरों ने सरकारी टेलीविजन चैनल से बातचीत में विस्फोट के बाद के भयानक मंजर को बयां किया.
कोयले के काले चूरे में लिपटे एक मजदूर ने नाम न जाहिर करने की शर्त पर बताया, ह्लहम खदान में काम कर रहे थे. अचानक धुआं उठने लगा. इसके बाद मैंने महसूस किया कि मुझे सांस लेने में तकलीफ हो रही है. मैं फौरन अपनी जान बचाने के लिए भागा और तब तक लगातार दौड़ता रहा, जब तक एक सुरक्षित स्थान पर नहीं पहुंच गया. मेरे सहकर्मी वहीं फंसे रह गए.ह्व प्राधिकारियों के मुताबिक, यह विस्फोट मीथेन गैस लीक होने के कारण हुआ.
हालांकि, फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि हादसे के समय निजी खदान मंदानजू को में सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम उपलब्ध थे या नहीं. हादसे पर प्रतिक्रिया के लिए खदान के मलिकाना हक वाली कंपनी से अभी संपर्क नहीं किया जा सका है. ईरान के नये सुधारवादी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने कहा कि उन्होंने खदान में फंसे लोगों को बचाने और उनके परिजन की सहायता के लिए हरसंभव प्रयास करने का आदेश दिया है. उन्होंने कहा कि विस्फोट की जांच शुरू कर दी गई है.



