चीन ने रक्षा बजट में वृद्धि का संकेत देते हुए कहा, शांति-संप्रभुता की रक्षा केवल ताकत से संभव

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Tue, 04 Mar 2025 08:36 PM
चीन ने रक्षा बजट में वृद्धि का संकेत देते हुए कहा, शांति-संप्रभुता की रक्षा केवल ताकत से संभव
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बीजिंग. चीन ने मंगलवार को अपना रक्षा बजट बढ़ाने का संकेत देते हुए कहा कि शांति और संप्रभुता की सिर्फ ”ताकत से रक्षा” की जा सकती है. चीन बुधवार को अपने रक्षा व्यय का ब्योरा प्रस्तुत करेगा जो संसद (नेशनल पीपुल्स कांग्रेस) में प्रधानमंत्री ली कियांग द्वारा प्रस्तुत किए जाने वाले मुख्य बजट का एक हिस्सा है.

पिछले साल चीन ने अपने रक्षा बजट को 7.2 प्रतिशत बढ़ाकर लगभग 232 अरब अमेरिकी डॉलर (1.67 ट्रिलियन युआन) कर दिया था जो भारत के बजट से तीन गुना से अधिक है. चीन अपने सभी सशस्त्र बलों का बड़े पैमाने पर आधुनिकीकरण करने का काम जारी रखे हुए है. चीन के रक्षा बजट के आंकड़ों को उसके द्वारा विमानवाहक पोतों के निर्माण, उन्नत नौसैनिक जहाजों और आधुनिक स्टील्थ विमानों के तेजी से निर्माण सहित बड़े पैमाने पर सैन्य आधुनिकीकरण के मद्देनजर संदेह की दृष्टि से देखा जाता है.

खर्च का बचाव करते हुए नेशनल पीपुल्स कांग्रेस (एनपीसी) के प्रवक्ता लू किनजियान ने यहां मीडिया से कहा कि ”शांति की रक्षा के लिए ताकत जरूरी है.” उन्होंने कहा कि मजबूत राष्ट्रीय रक्षा क्षमताओं के साथ, चीन अपनी संप्रभुता, सुरक्षा और विकास से जुड़े हितों की बेहतर ढंग से रक्षा कर सकता है, एक प्रमुख देश के रूप में अपनी अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारियों को बेहतर ढंग से निभा सकता है और विश्व शांति और स्थिरता की रक्षा कर सकता है.

उन्होंने कहा कि सकल घरेलू उत्पाद के प्रतिशत के रूप में चीन का रक्षा व्यय वैश्विक औसत से कम है. वर्ष 2016 से चीन के वार्षिक रक्षा खर्च में लगातार नौ वर्षों से एकल अंक में वृद्धि हो रही है. उन्होंने कहा कि चीन का रक्षा खर्च जीडीपी के हिस्से के रूप में पिछले कई सालों से डेढ़ फीसदी से कम रहा है.

जेलेंस्की-ट्रंप में नोकझोंक के बाद चीन का यूरोपीय संघ के साथ संबंध बेहतर करने पर जोर
यूक्रेन युद्ध समाप्त करने को लेकर अमेरिका और यूरोपीय संघ के बीच गहराते मतभेद, खासकर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की के बीच बैठक में नोकझोंक के बाद चीन यूरोपीय संघ के साथ अपने संबंधों को बढ़ाने पर जोर दे रहा है. चीन की संसद नेशनल पीपुल्स कांग्रेस (एनपीसी) के प्रवक्ता लोउ किनजियान ने मंगलवार को यहां एक प्रेस वार्ता में कहा कि चीन एकतरफा तरीके से लिए गए फैसले के खिलाफ 27 सदस्यीय यूरोपीय संघ (ईयू) के साथ काम करने को तैयार है.

लोउ ने कहा, ”पिछले 50 वर्ष में तथ्यों ने बार-बार साबित किया है कि चीन और यूरोप के बीच हितों का कोई मौलिक टकराव या भू-राजनीतिक संघर्ष नहीं है; बल्कि, वे साझेदार हैं जो एक-दूसरे की सफलता में योगदान करते हैं.” चीन यूरोपीय संघ के साथ अपने संबंधों को बढ़ाना चाहता है, जिसे वह चीनी उत्पादों, विशेष रूप से एआई से लैस अपने ई-वाहनों और बैटरियों के लिए एक आकर्षक बाजार मानता है. यूरोपीय संघ ने स्वदेशी मॉडलों की सुरक्षा के लिए चीनी ई-वाहनों पर भारी शुल्क लगाया है.

चीन हाल में जेलेंस्की और ट्रंप के बीच बैठक में नोकझोंक के बाद रणनीतिक गठबंधनों में आए तेज बदलाव का भी फायदा उठाना चाहता है. यूक्रेन को लेकर अलग-अलग रुख के कारण अमेरिका-यूरोपीय संघ के घनिष्ठ संबंधों पर नकारात्मक असर पड़ रहा है.
ट्रंप के साथ जेलेंस्की की हंगामेदार बैठक के बाद यूरोपीय संघ के नेताओं ने यूक्रेन के राष्ट्रपति का समर्थन किया है. ट्रंप-जेलेंस्की की बैठक के वीडियो को सरकारी चीनी मीडिया संस्थानों द्वारा खूब प्रसारित किया गया.

लोउ ने अमेरिका-ईयू संबंधों का परोक्ष संदर्भ देते हुए कहा, ”चीन-यूरोप संबंध किसी तीसरे पक्ष पर लक्षित, निर्भर या उसके अधीन नहीं हैं.” ट्रंप के रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ बेहतर हो रहे संबंधों को लेकर भी चीन बेचैन है. चीन और रूस के बीच अमेरिका और उसके सहयोगियों से खतरों के मद्देनजर वर्षों से एक करीबी गठबंधन बना हुआ है. एक मार्च को पुतिन ने अपने शीर्ष सुरक्षा अधिकारी सर्गेई शोइगु को यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने के लिए अमेरिका के साथ रूस की वर्तमान वार्ता के बारे में राष्ट्रपति शी चिनफिंग को जानकारी देने के लिए बीजिंग भेजा था.

चीन का अमेरिकी उत्पादों पर 15 प्रतिशत का जवाबी शुल्क, कई कंपनियों पर भी कार्रवाई
चीन ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा उसके (चीन के) निर्यात पर दूसरे दौर का 10 प्रतिशत शुल्क लगाने के जवाब में अमेरिकी उत्पादों पर अतिरिक्त 15 प्रतिशत शुल्क लगा दिया है. चीन ने इसके साथ ही विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) में अमेरिका के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है. हालांकि, चीन ने एक-दूसरे की चिंताओं को दूर करने के लिए वार्ता के लिए दरवाजे खुले रखे हैं.
चीन के सीमा शुल्क आयोग ने मंगलवार को कहा कि 10 मार्च से अमेरिका से आयातित कुछ उत्पादों पर अतिरिक्त शुल्क लगाया जाएगा.

आयोग ने बयान में कहा कि अमेरिका से आयातित चिकन, गेहूं, मक्का और कपास पर 15 प्रतिशत का अतिरिक्त शुल्क लगेगा. वहीं ज्वार, सोयाबीन, सुअर का मांस (पोर्क), गोवंश का मांस (बीफ), जलीय उत्पाद, फल, सब्जियां और डेयरी उत्पादों पर अतिरिक्त 10 प्रतिशत शुल्क लगाया जाएगा.

इसके अलावा, चीन ने मंगलवार को 10 अमेरिकी कंपनियों को देश की गैर-भरोसेमंद इकाई सूची में जोड़ने और उनके खिलाफ इसी तरह की कार्रवाई करने का फैसला किया. इनमें रक्षा और सुरक्षा के अलावा कृत्रिम मेधा (एआई), विमानन, आईटी और ‘दोहरे उपयोग’ वाली वस्तुओं से जुड़ी कई कंपनियां शामिल हैं.

वाणिज्य मंत्रालय ने मंगलवार को कहा कि इसके अलावा, चीन ने उसके उत्पादों पर शुल्क वृद्धि के संबंध में डब्ल्यूटीओ विवाद निपटान तंत्र के तहत अमेरिका के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की है. चीन की जवाबी कार्रवाई अमेरिका द्वारा चीन से आयातित उत्पादों पर चार मार्च से प्रभावी 10 प्रतिशत का अतिरिक्त शुल्क लगाए जाने के बाद हुई है.

आयोग ने कहा कि अमेरिका द्वारा एकतरफा शुल्क लगाए जाने से बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली कमजोर होती है, अमेरिकी व्यवसायों और उपभोक्ताओं पर बोझ बढ़ता है और चीन-अमेरिका आर्थिक और व्यापार सहयोग की नींव कमजोर होती है. ट्रंप द्वारा चीनी निर्यात पर 10 प्रतिशत शुल्क के दूसरे दौर की घोषणा, चीन के वार्षिक संसद सत्र की शुरुआत के समय हुई है.

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