धनशोधन मामला: ईडी ने राहुल गांधी को चौथी बार 17 जून को पूछताछ के लिए बुलाया

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Wed, 15 Jun 2022 10:08 PM
धनशोधन मामला: ईडी ने राहुल गांधी को चौथी बार 17 जून को पूछताछ के लिए बुलाया

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नयी दिल्ली. कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ‘नेशनल हेराल्ड’ समाचार पत्र से जुड़े कथित धनशोधन के एक मामले में लगातार तीसरे दिन बुधवार को भी प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के समक्ष पेश हुए और जांच एजेंसी ने उनसे करीब आठ घंटे पूछताछ की. राहुल गांधी रात करीब साढ़े नौ बजे एपीजे अब्दुल कलाम रोड पर स्थित ईडी मुख्यालय से बाहर निकले.

बुधवार को लगातार तीसरे दिन पूछताछ के बाद ईडी अब तक राहुल गांधी से कई सत्रों में करीब 30 घंटे पूछताछ कर चुकी है.
वहीं, ईडी ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी को शुक्रवार को चौथी बार पूछताछ के लिए तलब किया है. अधिकारियों ने बुधवार को बताया कि कांग्रेस सांसद ने बृहस्पतिवार के लिए छूट मांगी जिसकी अनुमति दे दी गई ईडी ने राहुल गांधी से ‘एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड’ (एजेएल) और इसका स्वामित्व रखने वाली कंपनी ‘यंग इंडियन’ से जुड़े निर्णयों में उनकी ‘निजी भूमिका’ के बारे में पूछताछ की.
राहुल गांधी सीआरपीएफ जवानों की ‘‘जेड प्लस’ श्रेणी की सुरक्षा के साथ सुबह करीब 11 बजकर 35 मिनट पर मध्य दिल्ली में एपीजे अब्दुल कलाम रोड पर स्थित ईडी मुख्यालय पहुंचे थे. उनके साथ उनकी बहन और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा भी थीं.

राहुल से ईडी की लगातार तीसरे दिन पूछताछ, की गई ऑडियो-वीडियो रिकार्डिंग

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ‘नेशनल हेराल्ड’ समाचार पत्र से जुड़े कथित धनशोधन के एक मामले में लगातार तीसरे दिन बुधवार को भी प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के समक्ष पेश हुए और जांच एजेंसी ने उनसे ‘एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड’ (एजेएल) और इसका स्वामित्व रखने वाली कंपनी ‘यंग इंडियन’ से जुड़े निर्णयों में उनकी ‘निजी भूमिका’ के बारे में पूछताछ की.
राहुल गांधी सीआरपीएफ जवानों की ‘‘जेड प्लस’ श्रेणी की सुरक्षा के साथ सुबह करीब 11 बजकर 35 मिनट पर मध्य दिल्ली में एपीजे अब्दुल कलाम रोड पर स्थित ईडी मुख्यालय पहुंचे. उनके साथ उनकी बहन और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा भी थीं.
अधिकारियों ने बताया कि राहुल गांधी से दोपहर 12 बजे पूछताछ आरंभ हुई.

अधिकारियों का कहना है कि तीन दिनों की पूछताछ के दौरान राहुल गांधी के बयान की आॅडियो एवं वीडियो रिकॉंिडग की गई. उनके बयानों को ए4 आकार वाले कागज पर टाइप किया जा रहा है और मिनट-मिनट के आधार पर उन्हें दिखाया जाता है और हस्ताक्षर करवाया जाता है तथा इसके बाद जांच अधिकारी को इसे सौंपा जाता है.

जांच एजेंसी के सूत्रों ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि राहुल गांधी से एजेएल के स्वामित्व वाली करीब 800 करोड़ रुपये की संपत्तियों के बारे में सवाल किया जा रहा है और इस बारे में भी पूछा जा रहा है कि कैसे एक गैर लाभकारी कंपनी ‘यंग इंडियन’ अपनी भूमि और भवनों को किराये पर देने की वाणिज्यिक गतविधियों को अंजाम दे रही थी. कांग्रेस का दावा है कि इस मामले में कोई प्राथमिकी नहीं है और ‘अनूसूचित अपराध’ नहीं है जिसके आधार पर धनशोधन रोकथाम कानून (पीएमएलए) का मामला दर्ज हो और राहुल गांधी एवं सोनिया गांधी को तलब किया जाए.

अधिकारियों ने कहा कि ईडी की कार्यवाही प्राथमिकी के आधार पर की जाने वाली प्रक्रियाओं की तुलना में कहीं ज्यादा ठोस है क्योंकि अदालत ने आयकर विभाग की ओर से दायर आरोप पत्र का संज्ञान लिया है और पक्रिया जारी रखी. उनका कहना है कि भारतीय दंड संहिता की धाराएं 120बी (आपराधिक साजिश) और 420 (धोखाधड़ी) आयकर के मामले में लागू होती हैं तथा ये उन अपराधों का निर्धारण करती हैं जिनसे ईडी धनशोधन का मामला दर्ज कर ले.

ईडी जांच अधिकारियों का यह भी कहना है कि पीएमएलए की धारा 3 के तहत धनशोधन परिभाषित है और ईडी इस पूरे मामले में राहुल गांधी की भूमिका की जांच करने के लिए इसे अमल में ला रही है, ‘जबकि इसमें नकदी का कोई आदान-प्रदान नहीं है, लेकिन अपराध का लाभ हुआ है और कुछ लोगों को फायदा मिला है.’

पीएमएलए की धारा 3 के अनुसार, “जो कोई अपराध की प्रक्रिया के साथ जुड़ी किसी क्रियाविधि अथवा गतिविधि में प्रत्यक्ष अथवा परोक्ष रूप से शामिल होने का प्रयास करता है अथवा जानबूझकर सहायता करता है या जानबूझकर कोई पार्टी बनता है अथवा वास्तविक रूप से शामिल है और उसे बेदाग संपत्ति के रूप में प्रस्तुत कर रहा है तो वह भी धनशोधन के अपराध का दोषी होगा.’ अधिकारियों ने कांग्रेस के इस दावे का प्रतिवाद किया जिसमें कहा गया है कि ‘यंग इंडियन’ एक गैर लाभकारी कंपनी है जिसमें कोई लाभ नहीं ले सकता.

अधिकारियों ने कहा कि कानून का उल्लंघन अपराध है और इस मामले में आयकर विभाग का आरोपपत्र और ‘एंफोर्समेंट केस इंफॉर्मेशन रिपोर्ट’ (ईसीआईआर) इसका संकेत देता है कि गैरलाभाकारी कंपनी के प्रावधानों का उल्लंघन किया गया है. राहुल गांधी पिछले दिनों में ईडी कार्यालय में सवाल-जवाब के कई सत्र में 24 घंटे से अधिक समय तक रह चुके हैं. सूत्रों के अनुसार, ‘यंग इंडियन’ की स्थापना, ‘नेशनल हेराल्ड’ के संचालन और एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (एजेएल) को कांग्रेस द्वारा दिए गए कर्ज तथा मीडिया संस्था के भीतर धन के हस्तांतरण से जुड़े 15-16 सवाल राहुल गांधी के समक्ष रखे गए हैं.

अधिकारियों ने कहा कि राहुल गांधी की भूमिका और उनका विस्तृत बयान महत्वपूर्ण है क्योंकि वह ‘यंग इंडियन’ में बड़े अंशधारक हैं तथा एजेएल और नेशनल हेराल्ड के मामलों में महत्वपूर्ण व्यक्ति हैं. समझा जाता है कि जांच एजेंसी ने राहुल गांधी से एजेएल के स्वामित्त वाली संपत्तियों के बारे में भी सवाल किया है. माना जा रहा है कि कांग्रेस नेता से कोलकाता की एक कंपनी से लिए गए एक करोड़ रुपये के कर्ज और इसके आधार के बारे में पूछा गया है. यह कर्ज कथित तौर पर फरवरी, 2011 में लिया गया था.

सूत्रों ने संकेत दिया है कि ‘यंग इंडियन’ की 2011 में स्थापना से लेकर अब तक की चीजों के बारे में सवाल किया गया है. इसी मामले में ईडी पहले कांग्रेस के दो वरिष्ठ नेताओं पवन कुमार बंसल और मल्लिकार्जुन खड़गे से पूछताछ कर चुकी है. ईडी ने राहुल गांधी से मंगलवार को 11 घंटे से अधिक और सोमवार को 10 घंटे से अधिक समय तक पूछताछ की थी. जांच एजेंसी ने राहुल गांधी से आज भी पेश होने के लिए कहा था.

कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने राहुल गांधी से ईडी की पूछताछ के तीसरे दिन भी विरोध-प्रदर्शन किया, जिसके बाद पुलिस ने कई लोगों को हिरासत में ले लिया. पुलिस ने कांग्रेस मुख्यालय से सटे इलाके में धारा 144 लागू कर रखी है. इसी मामले में ईडी ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को 23 जून को पेश होने के लिए कहा है. सोनिया गांधी कोरोना वायरस संक्रमण के कारण अस्वस्थ हैं और फिलहाल सर गंगाराम अस्पताल में भर्ती हैं.

अधिकारियों के अनुसार, कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं और गांधी परिवार से पूछताछ ईडी की जांच का हिस्सा है, ताकि ‘यंग इंडियन’ और ‘एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड’ (एजेएल) के हिस्सेदारी पैटर्न, वित्तीय लेन-देन और प्रवर्तकों की भूमिका को समझा जा सके. ‘यंग इंडियन’ के प्रवर्तकों और शेयरधारकों में सोनिया गांधी तथा राहुल गांधी सहित कांग्रेस के कुछ अन्य नेता शामिल हैं. कांग्रेस का कहना है कि उसके शीर्ष नेताओं के खिलाफ लगाए गए आरोप निराधार हैं तथा ईडी की कार्रवाई प्रतिशोध की राजनीति के तहत की जा रही है.

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