बेंगलुरु. केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) ने भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के वरिष्ठ अधिकारी विकास कुमार विकास के खिलाफ कर्नाटक सरकार के निलंबन आदेश को रद्द कर दिया है, जिन पर पिछले महीने यहां हुई भीषण भगदड़ के मद्देनजर कार्रवाई की गई थी. मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने इस पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए संवाददाताओं से कहा कि कैट के आदेश के खिलाफ अपील का विकल्प उपलब्ध है.
एम चिन्नास्वामी स्टेडियम के सामने चार जून को मची भगदड़ में 11 लोगों की जान चली गई थी. मामले में योजना और भीड़ प्रबंधन को लेकर तीखी आलोचना हुई थी. विकास ने सरकार के पांच जून के निलंबन आदेश को न्यायाधिकरण के समक्ष चुनौती दी थी, जिसमें तत्कालीन बेंगलुरु पुलिस आयुक्त बी दयानंद और पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) शेखर एच टेक्कन्नावर के नाम भी शामिल थे. न्यायाधिकरण की बेंगलुरु पीठ में न्यायमूर्ति बी के श्रीवास्तव और प्रशासनिक सदस्य संतोष मेहरा शामिल थे. पीठ ने 24 जून को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था. मंगलवार को इसने विकास के निलंबन को रद्द कर दिया.
विकास के वकील वरिष्ठ अधिवक्ता ध्यान चिनप्पा ने कहा, “न्यायाधिकरण ने याचिका को स्वीकार कर लिया और निलंबन को रद्द कर दिया. न्यायाधिकरण ने कहा है कि वह सेवा नियमों के अनुसार सभी लाभों के हकदार हैं.” न्यायाधिकरण ने यह भी कहा कि उसके निष्कर्षों को दयानंद और टेक्कन्नावर के मामलों में भी लागू किया जा सकता है, जिससे उनकी संभावित बहाली का रास्ता खुल सकता है.
पीठ ने कहा, ”…इस न्यायाधिकरण का मानना है कि आदेश यांत्रिक तरीके से पारित किया गया और आदेश तथ्यों पर आधारित नहीं था. पुलिस अधिकारियों को बिना किसी प्रमाण या आधार के निलंबित कर दिया गया. इसलिए, उपरोक्त आदेश रद्द किए जाने योग्य है.” इसके बाद पीठ ने सरकार को याचिकाकर्ता को तत्काल बहाल करने का निर्देश दिया तथा कहा कि निलंबन की अवधि को पूर्ण वेतन और भत्ते के साथ ड्यूटी के रूप में माना जाएगा.
राज्य के गृह मंत्री जी परमेश्वर ने कहा कि वह आदेश की समीक्षा करेंगे और आगे की कानूनी कार्रवाई के संबंध में मुख्यमंत्री से परामर्श करेंगे, क्योंकि कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग (डीपीएआर) मुख्यमंत्री के अधीन आता है. इस बीच, नेता प्रतिपक्ष आर अशोक ने कहा कि आईपीएस अधिकारी विकास कुमार का निलंबन रद्द करने का कैट का आदेश सिद्धरमैया सरकार के मुंह पर ‘तमाचा’ है.
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता अशोक ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, “यह आदेश सिर्फ एक अधिकारी के बारे में नहीं है, यह उजागर करता है कि कैसे कांग्रेस सरकार ने पुलिस विभाग को बलि का बकरा बनाने की कोशिश की और बेंगलुरु भगदड़ त्रासदी में अपने आपराधिक कुप्रबंधन को छिपाने के लिए ईमानदार अधिकारियों पर दोष मढ.ने की कोशिश की.” उन्होंने कहा कि पुलिस आयुक्त दयानंद जैसे शीर्ष पुलिस अधिकारियों के निलंबन की भी अब समीक्षा की जा रही है.
अशोक ने दावा किया कि भाजपा शुरू से ही सही कह रही थी कि यह पुलिस कार्रवाई नहीं बल्कि सरकारी “कुप्रबंधन” था जिसके कारण चिन्नास्वामी स्टेडियम में निर्दोष लोगों की जान गई. उन्होंने सरकार पर हमला करते हुए कहा, ”मुख्यमंत्री सिद्धरमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के हाथों पर 11 कन्नड़ लोगों का खून लगा है.” घटना के बाद, मुख्यमंत्री ने बेंगलुरु शहर के पुलिस आयुक्त दयानंद, स्टेडियम के प्रभारी अतिरिक्त पुलिस आयुक्त विकास कुमार विकास, केंद्रीय संभाग के पुलिस उपायुक्त शेखर एच टेक्कन्नावर, सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी) सी. बालकृष्ण और कब्बन पार्क पुलिस स्टेशन के र्सिकल निरीक्षक ए. के. गिरीश को निलंबित करने की घोषणा की थी.
सरकार ने तीनों आईपीएस अधिकारियों को अखिल भारतीय सेवा (अनुशासन एवं अपील) नियम, 1969 के तहत निलंबित कर दिया था, जबकि एसीपी और र्सिकल निरीक्षक के खिलाफ कर्नाटक राज्य पुलिस (अनुशासनात्मक कार्यवाही) नियम, 1965 के तहत कार्रवाई की गई थी. निलंबन आदेश के अनुसार, आरसीबी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) ने तीन जून को बेंगलुरु शहर के पुलिस आयुक्त को चार जून को विजय परेड और कार्यक्रम आयोजित करने के बारे में सूचित किया था. हालांकि, पुलिस आयुक्त का कार्यालय आयोजकों को लिखित जवाब देने में विफल रहा और समय की कमी के आधार पर अनुमति देने से इनकार कर दिया.
इसमें कहा गया है कि रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (आरसीबी) और क्रिकेट एसोसिएशन ने जश्न के बारे में ट्वीट किया और टिकट या पास जारी करने की सामान्य प्रक्रिया से गुजरे बिना प्रशंसकों को चिन्नास्वामी स्टेडियम में आमंत्रित किया. पुलिस द्वारा घटनाक्रम और क्रिकेट प्रशंसकों की भारी भीड़ की संभावना के बारे में पता होने के बावजूद, स्टेडियम में कार्यक्रम को व्यवस्थित रूप से आयोजित करने या लोगों को उनकी सुरक्षा की खातिर आवश्यक सावधानी बरतने के लिए पर्याप्त जानकारी देने या उचित भीड़ प्रबंधन के लिए अतिरिक्त पुलिस बल उपलब्ध कराने के लिए कदम नहीं उठाए गए.
कैट ने चार जून की भगदड़ के लिये प्रथम दृष्टया आरसीबी को दोषी माना
केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) ने चार जून को चिन्नास्वामी स्टेडियम के बाहर हुई भगदड़ के लिये मंगलवार को प्रथम दृष्टया रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु को जिम्मेदार पाया . आरसीबी की पहली आईपीएल खिताबी जीत के बाद टीम द्वारा विधान सौधा से विजय परेड और स्टेडियम में प्रशंसकों के साथ जश्न के कार्यक्रम की घोषणा के बाद स्टेडियम के पास एमजी रोड और कुब्बोन रोड इलाकों में लगभग ढाई लाख प्रशंसक उमड़ पड़े थे . कैट ने कहा,”इसलिए प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि लगभग तीन से पांच लाख लोगों के एकत्र होने के लिए आरसीबी जिम्मेदार है. आरसीबी ने पुलिस से उचित अनुमति या सहमति नहीं ली.” कैट ने अपने अवलोकन में कहा, ”अचानक उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पोस्ट किया जिसके परिणामस्वरूप लोग एकत्र हो गए.”