कोलकाता. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सदस्य समिक भट्टाचार्य को बृहस्पतिवार को पार्टी की पश्चिम बंगाल इकाई का नया अध्यक्ष आधिकारिक रूप से घोषित किया गया और वह 2026 के विधानसभा चुनाव में पार्टी का नेतृत्व करेंगे. उन्होंने इस चुनाव को राज्य की संस्कृति और बहुलवाद को तृणमूल कांग्रेस के ”भ्रष्ट कुशासन’ से बचाने की लड़ाई बताया.
पार्टी के वफादार और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में गहरी पैठ रखने वाले स्पष्ट वक्ता भट्टाचार्य का पश्चिम बंगाल भाजपा अध्यक्ष के रूप में चुनाव केंद्रीय नेतृत्व की प्रदेश इकाई में जान फूंकने और 2026 के विधानसभा चुनावों से पहले इसे राज्य में एक विजयी ताकत में तब्दील करने की सोची-समझी रणनीति की ओर इशारा करता है. भट्टाचार्य को निर्विरोध चुना गया, क्योंकि बुधवार की समयसीमा तक किसी भी अन्य उम्मीदवार ने इस पद के लिए नामांकन दाखिल नहीं किया था.
यहां एक अभिनंदन समारोह के दौरान यह औपचारिक घोषणा की गयी. कार्यक्रम में भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री रवि शंकर प्रसाद मौजूद थे, जिन्होंने भट्टाचार्य को निर्वाचन का प्रमाणपत्र दिया. भट्टाचार्य ने ऐसे वक्त प्रदेश अध्यक्ष पद का कार्यभार संभाला है, जब पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के लिए एक वर्ष से भी कम समय रह गया है और पार्टी 2021 के बाद की अवधि में असफलताओं का सामना करने के बाद अपनी संगठनात्मक ताकत को पुनर्जीवित करने की कोशिश कर रहा है.
उन्होंने अध्यक्ष बनने के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं को दिए पहले संबोधन में कहा, ”बंगाल में हमने ऐसी स्थिति से शुरुआत की, जहां यह मान लिया गया था कि हमारा अस्तित्व नहीं है. लेकिन, हमने अपनी विचारधारा से कभी समझौता नहीं किया. आज, इस राज्य की जनता ने हमें एक मुकाम दिया है. तृणमूल कांग्रेस की हार निश्चित है.” उन्होंने कहा कि बंगाल की जनता ने “भ्रष्ट तृणमूल सरकार के इस कुशासन” को अगले विधानसभा चुनावों में समाप्त करने का मन बना लिया है.
भट्टाचार्य ने 2026 के विधानसभा चुनाव को ”बंगाल की संस्कृति, बहुलता और विरासत के अस्तित्व की लड़ाई” बताते हुए आरोप लगाया कि तृणमूल शासन में इन मूल्यों को खतरा है. उन्होंने कहा, ”पश्चिम बंगाल में भाजपा अल्पसंख्यकों के खिलाफ नहीं, बल्कि हिंसा और साम्प्रदायिकता की राजनीति के खिलाफ है.” भट्टाचार्य ने सांप्रदायिक सद्भाव का एक मजबूत संदेश दिया और इस बात पर जोर दिया कि बंगाल में भाजपा की लड़ाई किसी भी समुदाय के खिलाफ नहीं है.
भाजपा नेता ने कहा, “भाजपा की लड़ाई इस राज्य के अल्पसंख्यकों के खिलाफ नहीं है. अल्पसंख्यक घरों में जो युवा लड़के अब पत्थर लेकर घूम रहे हैं, हम उनसे पत्थर छीनकर उन्हें किताबें देना चाहते हैं. हम उनकी तलवारें छीनकर उन्हें कलम देना चाहते हैं. हम एक ऐसे बंगाल की कल्पना करते हैं जहां दुर्गा पूजा का जुलूस और मुहर्रम का जुलूस बिना किसी संघर्ष के साथ-साथ चले. बंगाल को बचाना होगा.” हालांकि उन्होंने भर्ती में भ्रष्टाचार, प्रवासी श्रमिकों की स्थिति और केंद्रीय कल्याण योजनाओं में बाधाओं को लेकर सत्तारूढ़ पार्टी पर हमला किया – ये ऐसे मुद्दे थे जिनके उठाए जाने की उम्मीद थी – लेकिन सांप्रदायिक मामलों पर उनका लहजा विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी के आक्रामक रुख से अलग था.
उन्होंने भाजपा के भीतर आंतरिक मतभेदों, विशेषकर पुराने सदस्यों और नए सदस्यों के बीच बढ़ती पीढ़ीगत खाई पर भी बात की.
उन्होंने कहा, “पार्टी के पुराने लोगों को यह याद रखना चाहिए कि नए लोगों के बिना पार्टी आगे नहीं बढ़ सकती. साथ ही, नए लोगों को यह कभी नहीं भूलना चाहिए कि हार निश्चित होने पर भी पुराने नेताओं ने झंडा बुलंद रखा. भाजपा में पुराने या नए जैसी कोई चीज नहीं है. जनता की अदालत सबसे बड़ी परीक्षा है. इस बार भाजपा न केवल 200 सीटें पार करेगी, बल्कि हम यह भी सुनिश्चित करेंगे कि तृणमूल कांग्रेस को सत्ता से हटा दिया जाए.” अधिकारी और निवर्तमान राज्य भाजपा प्रमुख सुकांत मजूमदार दोनों ने भट्टाचार्य के साथ मिलकर काम करने का संकल्प लिया.
मजूमदार ने कहा, ”यह ‘रिले रेस’ है, जिसमें दौड़ चलती रहती है, लेकिन बैटन संभालने वाले हाथ बदलते रहते हैं. मैंने दिलीप घोष से कमान संभाली थी और आज समिक दा मुझसे कमान संभाल रहे हैं. हमने 38 प्रतिशत वोट हासिल किए हैं और मुझे उम्मीद है कि उनके नेतृत्व में हम इसमें सुधार करेंगे और अगले चुनाव में तृणमूल सरकार को सत्ता से बाहर करेंगे.” अपने भाषण में मजूमदार ने बार-बार पूर्व राज्य भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष का जिक्र किया, लेकिन अधिकारी ने उनका नाम लेने से परहेज किया. घोष, जिन्हें कई लोग पार्टी के अब तक के सबसे सफल प्रदेश अध्यक्ष मानते हैं, सम्मान समारोह में अनुपस्थित थे.
सूत्रों ने पुष्टि की कि घोष को इस कार्यक्रम में आमंत्रित नहीं किया गया था, जो कि उनके और मौजूदा राज्य नेतृत्व के बीच बढ़ती खाई को उजागर करता है. घोष ने पूरे राज्य अध्यक्ष चुनाव प्रक्रिया से भी खुद को अलग रखा था. पार्टी की संगठनात्मक मशीनरी को मजबूत करना और राज्य भर में इसका आधार बढ़ाना भट्टाचार्य की शीर्ष प्राथमिकताएं होंगी. भाजपा ने 2021 के विधानसभा चुनाव में 77 सीटें जीती थीं. उसके बाद यह संख्या घटकर 65 रह गई है, जिसमें 12 सीटें या तो निर्वाचित विधायकों के निधन या विधायकों के दल बदल कर सत्तारूढ़ तृणमूल में शामिल होने के कारण हुए उपचुनावों में हार की वजह से कम हो गयीं. तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कुणाल घोष ने भट्टाचार्य को बधाई दी, लेकिन भाजपा से किसी भी चुनावी खतरे से इनकार किया.