निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता संदिग्ध; विपक्ष संसद में चर्चा चाहता है: गौरव गोगोई

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Sun, 03 Aug 2025 09:13 PM
निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता संदिग्ध; विपक्ष संसद में चर्चा चाहता है: गौरव गोगोई
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गुवाहाटी. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गौरव गोगोई ने रविवार को आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता संदिग्ध है और यही वजह है कि विपक्षी दल संसद में मतदाता सूची के पुनरीक्षण पर चर्चा चाहते हैं. कांग्रेस की असम इकाई की विस्तारित कार्यकारिणी की बैठक शुरू होने से पहले संवाददाताओं से बातचीत में गोगोई ने भाजपा नीत केंद्र सरकार के उस फैसले पर भी सवाल उठाया जिसमें निर्वाचन आयोग पर चर्चा की अनुमति नहीं दी गई जबकि मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति केंद्र सरकार द्वारा की जाती है. गोगोई लोकसभा में पार्टी के उपनेता भी हैं.

असम की कांग्रेस इकाई के अध्यक्ष गोगोई ने कहा, ”आज लोगों के मन में निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता को लेकर सवालिया निशान है. इसलिए हम संसद में चर्चा चाहते हैं. सरकार कुछ छिपाने की कोशिश कर रही है. वह क्या है? क्या यह पिछले विधानसभा चुनावों और लोकसभा चुनावों में उनकी हेराफेरी है?” गोगोई ने कहा कि विपक्ष बिहार में जारी संशोधित मतदाता सूची के मुद्दे पर संसद में खुली चर्चा चाहता है.

उन्होंने कहा, ”आम लोगों को अपने मताधिकार की स्थिति और मतदान केंद्रों का विवरण पता होना चाहिए. हम इस पर चर्चा चाहते हैं, लेकिन सरकार कह रही है कि इस मामले पर चर्चा नहीं की जा सकती.” उन्होंने आगे कहा, ”उनका तर्क है कि निर्वाचन आयोग किसी भी विभाग से संबंधित नहीं है. यह एक बेतुका तर्क है क्योंकि मुख्य निर्वाचन आयुक्त की नियुक्ति प्रधानमंत्री और सरकार द्वारा की जाती है.” गोगोई ने यह भी दावा किया कि ऐसे कई मामले सामने आए हैं जब मतदाता मतदान के दौरान मतदान केंद्र गए और उन्हें पता चला कि उनका नाम सूची से गायब है.

‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बारे में बोलते हुए कांग्रेस सांसद ने कहा, ”केंद्रीय गृह मंत्री ने पहलगाम आतंकी हमले में मारे गए लोगों को न्यूनतम सम्मान भी नहीं दिया. उनके मंत्रालय के अधीन एजेंसियों की खुफिया विफलता के कारण लोग मारे गए, लेकिन उन्होंने लोगों से माफी नहीं मांगी. यह उनका स्वभाव है.” गोगोई ने यह भी कहा कि कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने असम आने की इच्छा व्यक्त की है.
उन्होंने आगे कहा, ”जब उन्होंने पिछले लोकसभा चुनाव के दौरान धुबरी में प्रचार किया था, तो उन्होंने लोगों से कहा था कि जीतने के बाद वह इस क्षेत्र का दौरा करेंगी. अब जब हमने रिकॉर्ड अंतर से जीत हासिल की है, तो वह फिर से धुबरी आना चाहती हैं और उन्होंने संसद में मुझे इस बारे में बताया.” असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी की विस्तारित कार्यकारिणी की बैठक रविवार सुबह यहां शुरू हुई. इसमें पार्टी के सभी सांसद, विधायक और राज्य इकाई के वरिष्ठ नेता शामिल हुए.

एक नेता ने बताया कि बैठक में विधानसभा चुनावों की रणनीति पर विस्तार से चर्चा हुई. असम विधानसभा के चुनाव अगले साल मार्च-अप्रैल में होने की संभावना है. बैठक में दो प्रस्ताव पारित किए गए जिनमें से एक राजनीतिक प्रकृति का है तो दूसरे का संबंध अर्थव्यवस्था से है.

बैठक के बाद कांग्रेस सांसद प्रद्युत बोरदोलोई ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा, ”राज्य भारी कर्ज के बोझ तले दबा हुआ है. भाजपा सरकार ने चुनाव में वोट पाने के लिए दर्जनों योजनाएं शुरू की हैं.” उन्होंने दावा किया कि लोगों के बैंक खातों में सीधे लाभ पहुंचाने वाली कई योजनाएं लाभार्थियों की आय बढ़ाने में मदद नहीं कर रही हैं.

उन्होंने आरोप लगाया, ”दूसरी ओर मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा और उनके करीबी सहयोगियों ने गिरोहों की एक समानांतर अर्थव्यवस्था खड़ी कर दी है, जो हर साल 12,000 करोड़ रुपये की नकदी एकत्र करती है.” बोरदोलोई ने कहा कि कांग्रेस ने लोगों, खासकर ग्रामीण इलाकों के लोगों की आय बढ़ाने के लिए एक आर्थिक प्रस्ताव पारित किया है.

राजनीतिक प्रस्ताव के बारे में बात करते हुए कांग्रेस के पूर्व राज्यसभा सदस्य रिपुन बोरा ने कहा कि मुख्यमंत्री, उनकी पत्नी और परिवार के सदस्यों और उनके करीबी सहयोगियों ने अकूत संपत्ति अर्जित की है. उन्होंने कहा, ”वे अब लोगों का ध्यान असली मुद्दों से भटकाने के लिए हर जगह बेदखली अभियान चला रहे हैं. भाजपा सरकार ने असम भर में 55,000 बीघा (18,100 एकड़ से ज़्यादा) जमीन से मूल निवासियों को बेदखल कर दिया है. हमने इन मुद्दों को उजागर करने का संकल्प लिया है.”

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