GST में केंद्र, राज्य समान हितधारक, राजस्व का समान बंटवारा

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Mon, 18 Aug 2025 08:24 PM
GST में केंद्र, राज्य समान हितधारक, राजस्व का समान बंटवारा
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नयी दिल्ली. केंद्र के प्रस्तावित दो स्लैब वाले जीएसटी से राजस्व पर पड़ने वाले असर को लेकर चिंताओं के बीच सरकारी सूत्रों ने स्पष्ट किया कि केंद्र राज्यों के साथ राजस्व बंटवारे में समान भागीदार है. उन्होंने यह भी कहा कि अगली पीढ़ी का माल एवं सेवा कर (जीएसटी) मध्यम वर्ग का समर्थन करता है और खपत बढ़ने के कारण इससे समय के साथ राजस्व बढ़ने की उम्मीद है.

इस समय जीएसटी ढांचे के तहत राजस्व केंद्र और राज्यों के बीच समान रूप से साझा किया जाता है. इसके अतिरिक्त, वित्त आयोग की सिफारिशों के अनुसार विभाज्य कर पूल में केंद्र के हिस्से का 41 प्रतिशत राज्यों को आवंटित किया जाता है. एक सरकारी सूत्र ने कहा, ”जीएसटी में क्या संग्रह हो रहा है और क्या संग्रह होगा, इस पर केंद्र की समान चिंताएं हैं. जीएसटी परिषद का सदस्य होने के नाते केंद्र और राज्य, दोनों समान भागीदार हैं. ऐसी स्थिति में क्या यह उम्मीद करना उचित है कि भारत सरकार राज्यों को क्षतिपूर्ति करेगी?”

इस समय जीएसटी एक चार स्तरीय संरचना है, जिसमें कर की दरें पांच प्रतिशत, 12 प्रतिशत, 18 प्रतिशत और 28 प्रतिशत हैं. खाद्य और आवश्यक वस्तुओं पर या तो शून्य या पांच प्रतिशत की दर से कर लगाया जाता है, और विलासिता तथा अहितकर वस्तुओं पर 28 प्रतिशत की दर से कर लगाया जाता है. कुल जीएसटी राजस्व में पांच प्रतिशत स्लैब की सात प्रतिशत हिस्सेदारी है. दूसरी ओर 12 प्रतिशत स्लैब की पांच प्रतिशत, 18 प्रतिशत स्लैब की 65 प्रतिशत और 28 प्रतिशत स्लैब की 11 प्रतिशत हिस्सेदारी है.

केंद्र ने जीएसटी दर युक्तिकरण पर मंत्रियों के समूह को पांच प्रतिशत और 18 प्रतिशत की दो स्तरीय दर संरचना और लगभग 5-7 वस्तुओं के लिए 40 प्रतिशत की दर का प्रस्ताव दिया है. प्रस्ताव में मौजूदा 12 और 28 प्रतिशत कर स्लैब को खत्म करना शामिल है.
इस समय राज्यों के पास भूमि और पेट्रोलियम उत्पादों पर विशेष कराधान अधिकार हैं. इसके अलावा, केंद्र एक विशेष सहायता योजना के तहत राज्यों को पूंजीगत व्यय के लिए 50 साल का ब्याज मुक्त ऋण दे रहा है.

एक अन्य सूत्र ने कहा कि गणना से पता चलता है कि नए दो स्तरीय स्लैब के लागू होने के बाद जीएसटी राजस्व में लगातार वृद्धि होगी.
दूसरे सूत्र ने कहा, ”जून, 2022 में क्षतिपूर्ति उपकर अवधि खत्म होने पर भी इसी तरह की राजस्व चिंताएं जताई गई थीं. लेकिन समय के साथ जीएसटी राजस्व में सुधार हुआ है, और राज्यों को मिलने वाला कर बढ़ा है.” उन्होंने कहा कि केंद्र द्वारा प्रस्तावित जीएसटी सुधारों के साथ कर वृद्धि में लगातार सुधार होगा.

प्रस्तावित बदलाव के बाद 18 प्रतिशत कर स्लैब का जीएसटी राजस्व में प्रमुख योगदान बना रहेगा

केंद्र के दो-स्तरीय जीएसटी ढांचे और 40 प्रतिशत की विशेष कर दर के प्रस्ताव को यदि लागू किया जाता है, तो 18 प्रतिशत कर स्लैब जीएसटी राजस्व में प्रमुख योगदान देने वाला बना रहेगा. वर्तमान में, माल एवं सेवा कर (जीएसटी) में चार स्लैब… पांच प्रतिशत, 12, 18 और 28 प्रतिशत… हैं. खाद्य और आवश्यक वस्तुओं पर या तो छूट है या उन पर पांच प्रतिशत कर लगता है, जबकि विलासिता और समाज के नजरिये से अहितकर वस्तुओं पर 28 प्रतिशत की उच्चतम दर लागू होती है.

पांच प्रतिशत स्लैब कुल जीएसटी राजस्व में लगभग सात प्रतिशत का योगदान देता है, जबकि 18 प्रतिशत स्लैब का योगदान 65 प्रतिशत है. 12 प्रतिशत और 28 प्रतिशत स्लैब जीएसटी संग्रह में क्रमश? लगभग पांच प्रतिशत और 11 प्रतिशत का योगदान करते हैं.
केंद्र ने जीएसटी दरों को युक्तिसंगत बनाने के लिए गठित मंत्रिसमूह के समक्ष पांच और 18 प्रतिशत की दो-स्तरीय जीएसटी संरचना के साथ-साथ कुछ चुनिंदा वस्तुओं पर 40 प्रतिशत की विशेष दर का प्रस्ताव रखा है. इस प्रस्ताव में मौजूदा 12 और 28 प्रतिशत कर स्लैब को समाप्त करने का प्रावधान है.

सूत्र ने कहा, ”केंद्र के प्रस्ताव के अनुसार, 18 प्रतिशत स्लैब का जीएसटी राजस्व में सबसे बड़ा हिस्सा बना रहेगा. हमें उम्मीद है कि मात्रा बढ़ेगी और खपत बढ़ेगी जिससे जीएसटी राजस्व को मौजूदा स्तर से बेहतर बनाने में मदद मिलेगी.” केंद्र के प्रस्ताव के तहत वर्तमान 12 प्रतिशत स्लैब में शामिल 99 प्रतिशत वस्तुओं को पांच प्रतिशत में तथा 28 प्रतिशत स्लैब में शामिल 90 प्रतिशत वस्तुओं और सेवाओं को 18 प्रतिशत स्लैब में शामिल किया जाएगा.

साथ ही, 28 प्रतिशत के स्लैब में शामिल 90 प्रतिशत वस्तुएं और सेवाएं 18 प्रतिशत के स्लैब में आ जाएंगी. केवल पांच से सात वस्तुएं ही 40 प्रतिशत की दर तक जाएंगी. औसत मासिक जीएसटी संग्रह वित्त वर्ष 2024-25 में बढ़कर 1.84 लाख करोड़ रुपये हो गया जो 2021-22 में 1.51 लाख करोड़ रुपये था. जीएसटी एक जुलाई, 2017 को लागू किया गया था. पंजीकृत करदाताओं की संख्या 2017 के 65 लाख से बढ़कर 1.51 करोड़ से अधिक हो गई है.

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