संभल हिंसा की जांच के लिये गठित न्यायिक आयोग ने मुख्यमंत्री को सौंपी रिपोर्ट

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Thu, 28 Aug 2025 08:33 PM
संभल हिंसा की जांच के लिये गठित न्यायिक आयोग ने मुख्यमंत्री को सौंपी रिपोर्ट
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लखनऊ. उत्तर प्रदेश के संभल में पिछले साल 24 नवंबर को शाही जामा मस्जिद के सर्वे के दौरान हुई हिंसा के मामले की जांच के लिये गठित तीन सदस्यीय न्यायिक आयोग ने बृहस्पतिवार को अपनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंप दी. गृह विभाग के प्रमुख सचिव संजय प्रसाद ने बताया कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश देवेंद्र कुमार अरोड़ा की अध्यक्षता में गठित तीन सदस्यीय न्यायिक आयोग ने मुख्यमंत्री को अपनी रिपोर्ट सौंप दी है.

आयोग के सदस्य अरोड़ा, 1979 बैच के सेवानिवृत्त भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) अधिकारी अरविंद कुमार जैन और सेवानिवृत्त आईएएस अमित मोहन प्रसाद ने मुख्यमंत्री से मुलाकात की और 24 नवंबर, 2024 को संभल में अपनी रिपोर्ट सौंपी. संजय प्रसाद ने रिपोर्ट के विवरण के बारे में पूछे जाने पर कहा, ”रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद हम इस बारे में कुछ बता सकेंगे.” आयोग का गठन 28 नवंबर 2024 को किया गया था. उसके बाद उसने एक दिसंबर को पैनल ने पहली बार गवाहों के बयान दर्ज करने के लिए हिंसा प्रभावित क्षेत्र का दौरा किया था.

न्यायिक आयोग में शामिल उत्तर प्रदेश के पूर्व पुलिस महानिदेशक ए के जैन ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, “हां, हमने अपनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंप दी है. यह एक विस्तृत रिपोर्ट है.” जैन ने रिपोर्ट को ‘गोपनीय’ करार देते हुए उसमें शामिल की गयी बातों का खुलासा करने से इनकार कर दिया. उन्होंने कुछ रिपोर्टों की प्रामाणिकता के बारे में पूछे गए सवालों का भी जवाब नहीं दिया, जिनमें दावा किया गया था कि रिपोर्ट में जनसांख्यिकीय बदलाव का जिक्र किया गया है जिसके मुताबिक संभल में हिंदुओं की आबादी घट रही है.

कुछ कथित रिपोर्टों के अनुसार न्यायिक पैनल ने अपनी लगभग 450 पृष्ठों की रिपोर्ट में इस बात का भी जिक्र किया है कि संभल में कैसे हिंदू आबादी अब घटकर लगभग 15 से 20 प्रतिशत ही रह गई है. यह पहले की तुलना में आधी से भी कम है. हालांकि, जैन ने यह कहते हुए खुलकर बात नहीं की कि पैनल को रिपोर्ट की विषय-वस्तु का खुलासा करने का अधिकार नहीं है.

जैन ने आगे कहा, ”यह रिपोर्ट कैबिनेट और बाद में उत्तर प्रदेश विधानसभा में भी एक प्रक्रिया के तहत पेश की जाएगी.” न्यायिक पैनल ने अपने गठन के बाद से चार बार संभल का दौरा किया है. इसने पहली बार एक दिसंबर 2024 को संभल का दौरा किया था. उसके बाद 21 जनवरी 2025 को गवाहों के बयान दर्ज करने के लिए एक बार फिर दौरा किया.

संभल की शाही जामा मस्जिद बनाम हरिहर मंदिर मामले को लेकर पिछले साल 19 नवंबर को हिंदू पक्ष की ओर से अधिवक्ता हरिशंकर जैन और विष्णु शंकर जैन सहित आठ लोगों ने संभल की जिला अदालत में याचिका दायर की थी. इसमें अदालत के आदेश पर 19 नवंबर को ही शाही जामा मस्जिद का सर्वे किया गया था. उसके बाद 24 नवंबर को एक बार फिर टीम सर्वे करने पहुंची. इस दौरान व्यापक हिंसा हुई और गोली लगने से चार लोगों की मौत हो गयी तथा 29 पुलिसकर्मी घायल हो गये.

इस मामले में पुलिस ने सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क और शाही जामा मस्जिद इंतजामिया कमेटी के अध्यक्ष जफर अली समेत कई नामजद और 2750 अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गयी थी. भाजपा के राज्यसभा सदस्य और उत्तर प्रदेश के पूर्व पुलिस महानिदेशक बृजलाल ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि उन्हें विश्वास है कि रिपोर्ट निश्चित रूप से पश्चिमी उत्तर प्रदेश के इस शहर में जनसांख्यिकीय बदलाव को उजागर करेगी.

उन्होंने गैर-भाजपा सरकारों पर तुष्टीकरण की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा, ”मैं खुद एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी रहा हूं और हकीकत जानने के लिए राज्य भर में विभिन्न पदों पर काम कर चुका हूं. हिंदू आबादी में उल्लेखनीय गिरावट का संकेत देने वाली रिपोर्ट्स में जरूर इसका जिक्र होगा. इतनी स्पष्ट बात कैसे नजरअंदाज की जा सकती है.” दिलचस्प बात यह है कि जहां न्यायिक पैनल के सदस्यों ने बताया कि रिपोर्ट गोपनीय है, वहीं सत्तारूढ़ भाजपा के कुछ सदस्य इस बात को लेकर बेहद आश्वस्त दिखे कि न्यायिक पैनल द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट में बताया गया है कि कैसे क्षेत्र में हुए कई सांप्रदायिक दंगों में ”हिंदुओं को व्यवस्थित रूप से निशाना बनाया गया.”

भाजपा के प्रान्तीय प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने कहा, ”संभल में देखा गया ऐसा जनसांख्यिकीय परिवर्तन देश की सुरक्षा के लिए एक बड़ा ख.तरा है. संभल में बार-बार हुए सांप्रदायिक दंगों, जिनमें हिंदुओं को निशाना बनाया गया और उनकी हत्या की गई. इसकी वजह से समुदाय का उस जगह से पलायन हुआ. संभल हिंसा पर न्यायिक पैनल की रिपोर्ट भी यही संकेत दे रही है.”

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