पर्यावरण मंजूरी से संबंधित उच्चतम न्यायालय का फैसला निराशाजनक: कांग्रेस

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Tue, 18 Nov 2025 08:27 PM
पर्यावरण मंजूरी से संबंधित उच्चतम न्यायालय का फैसला निराशाजनक: कांग्रेस
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नयी दिल्ली. कांग्रेस ने मंगलवार को कहा कि उच्चतम न्यायालय द्वारा अपने 16 मई के उस फैसले को वापस लिया जाना निराशाजनक है, जिसमें केंद्र को पर्यावरणीय मानदंडों का उल्लंघन करने वाली परियोजनाओं को पूर्वव्यापी पर्यावरणीय मंजूरी (रेट्रोस्पेक्टिव एनवायरनमेंटल क्लियरेन्स) देने से रोक दिया गया था. उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को 2:1 के बहुमत से अपने 16 मई के उस फैसले को वापस ले लिया, जिसमें केंद्र को पर्यावरणीय मानदंडों का उल्लंघन करने वाली परियोजनाओं को पूर्वव्यापी पर्यावरणीय मंजूरी देने से रोक दिया गया था.

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ”यह बेहद निराशाजनक है कि भारत के निवर्तमान प्रधान न्यायाधीश ने उच्चतम न्यायालय की दो न्यायाधीशों वाली पीठ के 16 मई, 2025 के उस फैसले की समीक्षा का रास्ता खोल दिया है, जिसमें पूर्वव्यापी पर्यावरणीय स्वीकृतियों पर रोक लगा दी गई थी.” उन्होंने कहा, ”पूर्वव्यापी पर्यावरणीय स्वीकृतियां जानबूझकर उन कंपनियों द्वारा मांगी जाती हैं, जो कानूनों से अच्छी तरह वाकिफ हैं, लेकिन फिर भी जानबूझकर ”बाद में देखा जाएगा” वाले रवैये के साथ उनका उल्लंघन करती हैं. इस रवैये के कई उदाहरण हैं. पूर्वव्यापी मंज.ूरी कानून की नज.र में गलत है और शासन का मज.ाक उड़ाती है.”

रमेश ने कहा, ”प्रधान न्यायाधीश का यह फैसला बहुत निराशाजनक है, क्योंकि कल ही उन्होंने उत्तराखंड सरकार को कॉर्बेट बाघ अभयारण्य में अवैध वृक्षों की कटाई और अनधिकृत निर्माण से हुए पारिस्थितिक नुकसान की मरम्मत और पुनस्र्थापन का निर्देश दिया था.”

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