नारायण गुरु के दर्शन बहुसंख्यकवाद और असमानता को चुनौती देता है: सिद्धरमैया

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Wed, 31 Dec 2025 08:56 PM
नारायण गुरु के दर्शन बहुसंख्यकवाद और असमानता को चुनौती देता है: सिद्धरमैया
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वरकला. कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने बुधवार को कहा कि संत एवं समाज सुधारक श्री नारायण गुरु का दर्शन धार्मिक बहुलतावाद, समानता के बिना सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और न्याय के बिना राजनीतिक पहचान को सीधे तौर पर खारिज करता है. यहां गुरु द्वारा स्थापित शिवगिरी मठ में 93वें शिवगिरी तीर्थ सम्मेलन में मुख्य अतिथि सिद्धरमैया ने इस बात पर अफसोस जताया कि आज का भारत एक विरोधाभास का सामना कर रहा है, जहां ‘हम आर्थिक विकास, डिजिटलीकरण के विस्तार और वैश्विक स्तर पर प्रभाव का दावा करते हैं, लेकिन हमारी सामाजिक एकजुटता कमजोर हो रही है और नफरत आम होती जा रही है’.

कर्नाटक के मुख्यमंत्री ने कहा कि यह कोई संयोग नहीं था कि गुरु से मिलने के बाद महात्मा गांधी ने छुआछूत के खिलाफ अपना रुख और कड़ा कर लिया था और वह सादा जीवन जीने के पक्ष में आ गए थे. उन्होंने यह भी कहा कि रविंद्रनाथ टैगोर का ‘सार्वभौमिक मनुष्य’ का विचार गुरु के कार्यों से प्रेरित था. सिद्धरमैया ने कहा, ”इस प्रकार, गुरु आध्यात्मिकता, तर्कवाद, मानवतावाद और सामाजिक न्याय को जोड़कर आधुनिक भारत के वैचारिक संगम पर खड़े हैं.” इस सम्मेलन का उद्घाटन केरल के मुख्यमंत्री पिनारयी विजयन ने किया.

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