महिला आरक्षण: पहली बार संविधान संशोधन विधेयक पारित नहीं करा पाई मोदी सरकार; चाहिए थे 352 वोट, मिले 298

Author: Nandkishoryadav
UPDATED: Fri, 17 Apr 2026 08:23 PM
महिला आरक्षण: पहली बार संविधान संशोधन विधेयक पारित नहीं करा पाई मोदी सरकार; चाहिए थे 352 वोट, मिले 298
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नई दिल्ली: लोकसभा में महिला आरक्षण और परिसीमन संशोधन विधेयक पर लंबी और गहन चर्चा के बाद शुक्रवार (17 अप्रैल) मतदान प्रक्रिया संपन्न हुई। कुल 528 सांसदों ने वोट डाला, जिसमें 298 सदस्यों ने विधेयक के पक्ष में और 230 ने विपक्ष में मतदान किया। हालांकि, संविधान संशोधन विधेयक को पारित करने के लिए आवश्यक दो-तिहाई बहुमत यानी 352 वोट प्राप्त नहीं हो सके। इस पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने घोषणा की कि यह विधेयक आवश्यक समर्थन नहीं जुटा सका, इसलिए आगे की विधायी प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाई जा सकती। इसके बाद संबंधित दो अन्य विधेयकों पर भी सरकार ने मतदान कराने का निर्णय नहीं लिया।

करीब 21 घंटे तक चली मैराथन चर्चा के बाद आए इस फैसले ने सदन की कार्यवाही को निर्णायक मोड़ पर पहुंचा दिया। उल्लेखनीय है कि पिछले 12 वर्षों में यह पहली बार है जब मोदी सरकार द्वारा पेश किया गया कोई संविधान संशोधन विधेयक लोकसभा में पारित नहीं हो सका।

इस पर संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि यह महिलाओं को सम्मान और अधिकार देने से जुड़ा ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण विधेयक था। इसी पर यह नतीजा आया है। विपक्ष ने इसमें साथ नहीं दिया। बहुत खेद की बात है। आपने एक ऐतिहासिक मौका गंवा दिया। महिलाओं को सम्मान और अधिकार देने का हमारा अभियान जारी रहेगा और हम उन्हें अधिकार दिलाकर ही रहेंगे।

चर्चा का जवाब देते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष पर तीखा प्रहार किया और स्पष्ट किया कि जो लोग परिसीमन का विरोध कर रहे हैं, वे वास्तव में एससी-एसटी (SC-ST) समुदाय की सीटें बढ़ाने का विरोध कर रहे हैं। इसके साथ ही, धर्म के आधार पर आरक्षण की संभावना को सिरे से खारिज करते हुए शाह ने दक्षिणी और छोटे राज्यों को परिसीमन के बाद भी उनके उचित प्रतिनिधित्व का पूर्ण आश्वासन दिया है। वोटिंग से ठीक पहले गृह मंत्री के इस कड़े रुख ने इस विधेयक के ऐतिहासिक महत्व और राजनीतिक सरगर्मी को और बढ़ा दिया है।

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