
भगवान विष्णु के वामन अवतार को समर्पित वामन जयंती हिंदू धर्म का महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है। 2026 में यह पर्व भाद्रपद शुक्ल द्वादशी के दिन मनाया जाएगा। इस दिन भगवान वामन की पूजा और व्रत करने की परंपरा है। जानें वामन जयंती की सही तिथि, पूजा विधि और धार्मिक महत्व।
हिंदू धर्म में भगवान विष्णु के विभिन्न अवतारों का विशेष महत्व बताया गया है। इन्हीं में से एक है भगवान वामन का अवतार। हर साल भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को वामन जयंती मनाई जाती है। इस दिन भगवान विष्णु के वामन स्वरूप की पूजा करने और व्रत रखने की परंपरा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, श्रद्धा के साथ भगवान वामन की आराधना करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की कामना की जाती है।
कब है वामन जयंती?
भगवान विष्णु का कौन सा अवतार हैं वामन?
वामन जयंती पर कैसे करें पूजा?
- वामन जयंती के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद स्वच्छ कपड़े पहनें।
- इसके बाद भगवान वामन का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लिया जाता है।
- पूजा स्थान को साफ करके वहां चौकी रखें और उस पर पीला या लाल कपड़ा बिछाएं।
- इसके बाद भगवान वामन अथवा भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें।
- पूजा में भगवान गणेश और माता लक्ष्मी का स्मरण भी किया जा सकता है।
- भगवान वामन का आवाहन करते हुए “ॐ नमो भगवते वामनाय नमः” मंत्र का जाप करें।
- इसके बाद पंचामृत और स्वच्छ जल से भगवान का अभिषेक करें।
- उन्हें पीले वस्त्र, चंदन, अक्षत, पीले फूल और तुलसी दल अर्पित करें।
- इसके बाद धूप और दीप जलाकर भगवान को फल या अन्य सात्विक भोग अर्पित करें।
- वामन अवतार से जुड़ी कथा का पाठ या श्रवण करें और अंत में भगवान वामन की आरती करें।



