Silver Price Prediction: चांदी की कीमतों को लेकर एक रिपोर्ट में आने वाले महीनों के लिए बड़ा अनुमान सामने आया है। केडिया एडवाइजरी की दिवाली 2027 सिल्वर रिपोर्ट के मुताबिक, औद्योगिक मांग में बढ़ोतरी और खदानों से सीमित आपूर्ति के कारण चांदी की कीमतों में तेजी जारी रह सकती है।
रिपोर्ट के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी की कीमत अगले छह महीनों में 85 से 90 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकती है। वहीं, दिवाली 2027 तक कीमत 120 डॉलर प्रति औंस के स्तर तक जाने का अनुमान जताया गया है।
घरेलू बाजार में 4 लाख रुपये किलो तक पहुंचने का अनुमान
रिपोर्ट में मुद्रा विनिमय दर, आयात शुल्क और प्रीमियम जैसे कारकों को ध्यान में रखते हुए घरेलू बाजार में भी चांदी की कीमतों में बड़ी तेजी का अनुमान लगाया गया है।
सितंबर 2026 के करीब 2.34 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के बेंचमार्क भाव से चांदी बढ़कर 4 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास पहुंच सकती है। यह मौजूदा स्तर से करीब 71 फीसदी तक की संभावित बढ़ोतरी का संकेत देता है।
चांदी की तेजी के पीछे क्या कारण बताए गए?
केडिया एडवाइजरी के अनुसार, चांदी की संभावित तेजी के पीछे केवल निवेश मांग ही नहीं, बल्कि औद्योगिक उपयोग भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। रिपोर्ट में वैश्विक औद्योगिक मांग में बढ़ोतरी और खनन आपूर्ति की सीमाओं को प्रमुख कारणों में शामिल किया गया है।
लगातार छठे साल मांग और आपूर्ति में अंतर
रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2026 में वैश्विक चांदी बाजार में मांग और आपूर्ति के बीच करीब 4.63 करोड़ औंस का अंतर रहने का अनुमान है। यह लगातार छठा वर्ष बताया गया है, जब वैश्विक बाजार में चांदी की कमी बनी हुई है।
खदानों से उत्पादन बढ़ाना चुनौती
चांदी की कीमतों में तेजी के बावजूद खदानों से इसका उत्पादन तेजी से बढ़ाना आसान नहीं है। रिपोर्ट में 2026 में वैश्विक चांदी उत्पादन करीब 84.41 करोड़ औंस रहने का अनुमान दिया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, कुल चांदी उत्पादन का केवल लगभग एक-चौथाई हिस्सा प्राथमिक चांदी की खदानों से आता है। बाकी उत्पादन तांबा, जस्ता और सीसा जैसे अन्य धातुओं के खनन के दौरान उप-उत्पाद के रूप में प्राप्त होता है।
निवेशकों के लिए क्या मायने रखता है?
रिपोर्ट में दिए गए आंकड़े चांदी की संभावित कीमतों का अनुमान हैं, न कि निश्चित भविष्यवाणी। वास्तविक कीमतें वैश्विक मांग-आपूर्ति, डॉलर और रुपये की चाल, औद्योगिक गतिविधियों, आयात शुल्क तथा अन्य बाजार परिस्थितियों के अनुसार बदल सकती हैं।