रायपुर: छत्तीसगढ़ में सरकारी बस सेवा बंद हुए करीब 24 वर्ष हो चुके हैं। राज्य की करीब 3 करोड़ आबादी के लिए सड़क परिवहन का बड़ा हिस्सा अब निजी बसों पर निर्भर है। राज्य गठन के बाद दिसंबर 2002 में तत्कालीन सरकारी बस सेवा को घाटे का हवाला देते हुए बंद कर दिया गया था। इसके बाद से सरकारी स्तर पर राज्य के भीतर व्यापक रोडवेज नेटवर्क दोबारा खड़ा नहीं हो पाया।
एकीकृत मध्य प्रदेश के समय छत्तीसगढ़ क्षेत्र में सरकारी बसों का बड़ा नेटवर्क मौजूद था। वर्ष 2000 के आसपास 1200 से अधिक बसें करीब 10 डिपो के जरिए 1500 से ज्यादा मार्गों पर संचालित होने की बात सामने आती है। इन बसों का इस्तेमाल आम यात्रियों के साथ-साथ प्रशासनिक और सार्वजनिक आयोजनों में भी किया जाता था।
सरकारी बसें बंद होने के बाद बढ़ी निजी बसों पर निर्भरता
सरकारी परिवहन व्यवस्था खत्म होने के बाद प्रदेश में यात्रियों की आवाजाही के लिए निजी बस ऑपरेटरों की भूमिका लगातार बढ़ती गई। वर्तमान में करीब 12 हजार निजी बसें प्रदेश में यात्री परिवहन का महत्वपूर्ण माध्यम बताई जाती हैं।
निजी बसों की उपलब्धता ने परिवहन की जरूरत को काफी हद तक पूरा किया है, लेकिन किराए, समय-सारणी, यात्रियों की सुरक्षा और सुविधाओं को लेकर समय-समय पर सवाल भी उठते रहे हैं। खासकर ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में नियमित एवं किफायती सार्वजनिक परिवहन की जरूरत लगातार बनी हुई है।
चुनाव और सरकारी आयोजनों में भी होती थीं सरकारी बसों की भूमिका
पहले सरकारी बसों का उपयोग केवल नियमित यात्री परिवहन तक सीमित नहीं था। चुनाव के दौरान मतदान दलों, ईवीएम और सुरक्षा बलों की आवाजाही के लिए भी इनका इस्तेमाल किया जाता था।
इसके अलावा बड़े धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों, आपदा राहत कार्यों और स्कूली यात्राओं जैसे अवसरों पर भी सरकारी परिवहन व्यवस्था प्रशासन के लिए उपयोगी साबित होती थी। सरकारी बसों का अपना नेटवर्क होने से ऐसे समय में निजी ऑपरेटरों पर निर्भरता कम रहती थी।
पड़ोसी राज्यों में अब भी सरकारी बसों का संचालन
छत्तीसगढ़ के आसपास के कई राज्यों में सरकारी या राज्य-समर्थित बस परिवहन सेवाएं अभी भी संचालित हैं। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान में सरकारी बस नेटवर्क के अलग-अलग मॉडल मौजूद हैं।
उत्तर प्रदेश में रोडवेज का बड़ा नेटवर्क प्रतिदिन लाखों यात्रियों को परिवहन सुविधा उपलब्ध कराता है। राजस्थान में भी सरकारी बसें ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों को जोड़ने में भूमिका निभाती हैं। मध्य प्रदेश में भी सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को मजबूत करने के प्रयास किए गए हैं।
क्या छत्तीसगढ़ में फिर शुरू हो सकती है सरकारी बस सेवा?
छत्तीसगढ़ में सरकारी बस सेवा को दोबारा शुरू करने की मांग समय-समय पर उठती रही है। इसके पीछे मुख्य तर्क यह है कि सरकारी परिवहन व्यवस्था होने से यात्रियों को किफायती किराया, निर्धारित समय-सारणी और बेहतर नियमन का विकल्प मिल सकता है।
हालांकि, सरकारी बस सेवा दोबारा शुरू करने के लिए बड़े स्तर पर निवेश, बसों की खरीद, डिपो और वर्कशॉप का निर्माण, कर्मचारियों की नियुक्ति तथा संचालन की स्थायी व्यवस्था जरूरी होगी।
राज्य में सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करने के लिए सरकारी बसों के साथ निजी ऑपरेटरों को भी एक नियामक ढांचे में लाने पर विचार किया जा सकता है। इससे यात्रियों को अधिक विकल्प मिल सकते हैं और ग्रामीण क्षेत्रों में परिवहन कनेक्टिविटी बेहतर हो सकती है।