नई दिल्ली: त्योहारी सीजन के बीच रेलवे कर्मचारियों के सालाना उत्पादकता-आधारित बोनस (Productivity Linked Bonus यानी PLB) को लेकर चर्चा तेज हो गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में 14 अक्टूबर 2026 को होने वाली केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में इस प्रस्ताव पर विचार किए जाने की संभावना है।
यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है, तो पात्र गैर-राजपत्रित रेलवे कर्मचारियों को सालाना बोनस देने का रास्ता साफ हो सकता है। हालांकि, कैबिनेट की अंतिम मंजूरी और बोनस की राशि को लेकर आधिकारिक घोषणा होने तक किसी नई राशि को निश्चित नहीं माना जाना चाहिए।
रेलवे कर्मचारियों को फिलहाल कितना मिलता है बोनस?
मौजूदा व्यवस्था के अनुसार, पात्र गैर-राजपत्रित रेलवे कर्मचारियों के लिए 78 दिनों के बोनस की गणना ₹7,000 की मासिक वेतन सीमा के आधार पर की जाती है। इस गणना के तहत बोनस की राशि ₹17,951 बनती है।
बोनस की गणना में इस्तेमाल होने वाली ₹7,000 की वेतन सीमा वर्ष 2014-15 से अपरिवर्तित रहने की बात रिपोर्ट में कही गई है। इसी वजह से कर्मचारी संगठन इस सीमा में संशोधन की मांग कर रहे हैं।
₹46,184 बोनस की मांग क्यों हो रही है?
इंडियन रेलवे टेक्निकल सुपरवाइजर्स एसोसिएशन (IRTSA) ने बोनस की गणना के लिए वेतन सीमा बढ़ाने की मांग की है। संगठन का कहना है कि मौजूदा सीमा को वर्तमान वेतन स्तर के अनुरूप संशोधित किया जाना चाहिए।
संगठन की प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं:
- वेतन सीमा में बढ़ोतरी: लेवल-2 और उससे ऊपर के कर्मचारियों के लिए गणना की सीमा ₹18,000 प्लस महंगाई भत्ता (DA) की जाए।
- बोनस राशि में संशोधन: संगठन के प्रस्ताव के अनुसार, ₹18,000 की वेतन सीमा के आधार पर 78 दिनों का बोनस कम से कम ₹46,184 होना चाहिए।
- पुरानी व्यवस्था की समीक्षा: कर्मचारी संगठन का तर्क है कि वर्षों से अपरिवर्तित वेतन सीमा को मौजूदा वेतन संरचना के अनुसार बदला जाना चाहिए।
ध्यान देने वाली बात है कि ₹46,184 कर्मचारियों के संगठन की मांग के आधार पर बताई गई राशि है। इसे सरकार की ओर से स्वीकृत बोनस नहीं समझना चाहिए।
78 दिनों के बोनस की गणना कैसे होती है?
रेलवे कर्मचारियों के उत्पादकता-आधारित बोनस की गणना निर्धारित वेतन सीमा और बोनस के दिनों के आधार पर की जाती है।
| विवरण | मौजूदा व्यवस्था |
|---|---|
| बोनस की अवधि | 78 दिन |
| गणना के लिए मासिक वेतन सीमा | ₹7,000 |
| रिपोर्ट में बताई गई बोनस राशि | ₹17,951 |
| कर्मचारी संगठन की प्रस्तावित वेतन सीमा | ₹18,000 + DA |
| संगठन की मांग के अनुसार बोनस | कम से कम ₹46,184 |
ये आंकड़े मौजूदा व्यवस्था और कर्मचारी संगठन की मांग के बीच अंतर समझाने के लिए हैं। अंतिम राशि कैबिनेट के निर्णय और लागू नियमों पर निर्भर करेगी।
बोनस के नाम पर वायरल फर्जी पत्र से सावधान
रेलवे कर्मचारियों के बोनस को लेकर सोशल मीडिया पर एक कथित पत्र भी वायरल हुआ था। रिपोर्ट के मुताबिक, 6 अक्टूबर 2026 की तारीख वाले इस पत्र में दावा किया गया था कि वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 78 दिनों के बोनस के रूप में ₹41,149 की मंजूरी दी गई है।
रेलवे बोर्ड ने 7 अक्टूबर को इस पत्र को फर्जी बताते हुए अधिकारियों को सतर्क किया था। बोर्ड के अनुसार, पत्र पर किए गए हस्ताक्षर भी जाली थे।
रेलवे बोर्ड ने निर्देश दिया कि इस पत्र के आधार पर कोई भुगतान न किया जाए। कर्मचारियों को बोनस से संबंधित जानकारी के लिए रेलवे बोर्ड और रेल मंत्रालय की आधिकारिक वेबसाइट पर जारी सूचनाओं पर ही भरोसा करना चाहिए।
कैबिनेट की बैठक में अब क्या हो सकता है?
कैबिनेट की बैठक में रेलवे कर्मचारियों के वार्षिक उत्पादकता-आधारित बोनस के प्रस्ताव पर विचार किए जाने की संभावना है। कर्मचारियों की निगाहें इस बात पर रहेंगी कि सरकार मौजूदा ₹7,000 की वेतन सीमा के आधार पर बोनस को मंजूरी देती है या सीमा में संशोधन पर कोई निर्णय लेती है।
हालांकि, प्रस्ताव पर विचार होने का अर्थ यह नहीं है कि नई वेतन सीमा या ₹46,184 की बोनस राशि को मंजूरी मिल गई है। इस संबंध में अंतिम स्थिति सरकार की आधिकारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगी।
निष्कर्ष: रेलवे कर्मचारियों के लिए बोनस 2026 को लेकर फिलहाल दो आंकड़े चर्चा में हैं—मौजूदा गणना के आधार पर ₹17,951 और कर्मचारी संगठन की मांग के अनुसार कम से कम ₹46,184। दोनों में अंतर समझना जरूरी है, क्योंकि नई बोनस राशि और वेतन सीमा पर अंतिम फैसला सरकार की मंजूरी के बाद ही तय होगा।