नई दिल्ली: अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो 17 से 22 अक्टूबर 2026 तक उज्बेकिस्तान और भारत के दौरे पर रहेंगे। उनके भारत दौरे को दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी, ऊर्जा सहयोग और निवेश की संभावनाओं के लिहाज से अहम माना जा रहा है। इस यात्रा के दौरान रूबियो मुंबई और गुजरात के जामनगर जाएंगे, जहां रिलायंस इंडस्ट्रीज की विशाल तेल रिफाइनरी स्थित है।
अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार, रूबियो भारतीय अधिकारियों और कारोबारी नेताओं से मुलाकात करेंगे। बातचीत का मुख्य उद्देश्य भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करना और आर्थिक एवं ऊर्जा सहयोग के नए अवसर तलाशना होगा।
क्यों अहम है मार्को रूबियो का भारत दौरा?
भारत और अमेरिका के बीच ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार और रणनीतिक संबंध लगातार महत्वपूर्ण बने हुए हैं। रूबियो की यात्रा ऐसे समय हो रही है, जब दोनों देश ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर चर्चा कर रहे हैं।
दौरे के दौरान क्षेत्रीय और वैश्विक घटनाक्रम पर भी भारतीय अधिकारियों के साथ विचार-विमर्श होने की उम्मीद है। हालांकि, अमेरिकी विदेश विभाग ने अभी तक किसी विशिष्ट ऊर्जा समझौते या नई परियोजना की आधिकारिक घोषणा नहीं की है।
जामनगर रिफाइनरी पर क्यों है अमेरिका की नजर?
गुजरात के जामनगर में रिलायंस इंडस्ट्रीज का विशाल रिफाइनिंग परिसर स्थित है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस परिसर की कच्चे तेल को संसाधित करने की क्षमता लगभग 14 लाख बैरल प्रतिदिन है। इसे दुनिया के प्रमुख रिफाइनिंग केंद्रों में गिना जाता है।
रूबियो के जामनगर दौरे को ऊर्जा सहयोग के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। तेल शोधन, ऊर्जा आपूर्ति और निवेश जैसे विषय भारत-अमेरिका आर्थिक संबंधों में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
हालांकि, अमेरिकी विदेश विभाग ने जामनगर में होने वाली किसी विशेष बैठक, रिफाइनरी निरीक्षण या समझौते का विस्तृत ब्योरा नहीं दिया है। इसलिए इस यात्रा को किसी निश्चित सौदे से जोड़कर देखना अभी जल्दबाजी होगी।
अमेरिका में नई रिफाइनरी परियोजना से क्या है संबंध?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मार्च 2026 में दावा किया था कि रिलायंस इंडस्ट्रीज के निवेश से अमेरिका में नई तेल रिफाइनरी बनाने की योजना है। उनके अनुसार, यह परियोजना टेक्सास के ब्राउन्सविले में प्रस्तावित है।
इस घोषणा ने भारत और अमेरिका के बीच ऊर्जा क्षेत्र में संभावित निवेश को लेकर चर्चा बढ़ाई थी। हालांकि, रूबियो के जामनगर दौरे और इस अमेरिकी परियोजना के बीच किसी नए समझौते या प्रत्यक्ष संबंध की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
मुंबई में कारोबारी नेताओं से भी हो सकती है चर्चा
रूबियो के भारत दौरे में मुंबई और जामनगर दोनों शामिल हैं। मुंबई देश का प्रमुख वित्तीय और कारोबारी केंद्र है, जबकि जामनगर अपनी विशाल रिफाइनिंग क्षमता के लिए जाना जाता है।
भारतीय अधिकारियों और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत में रणनीतिक साझेदारी, व्यापार और ऊर्जा सहयोग से जुड़े मुद्दे उठ सकते हैं। इस यात्रा से दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को आगे बढ़ाने के अवसर तलाशे जाने की संभावना है।
मई के बाद दूसरी बार भारत आएंगे रूबियो
मार्को रूबियो इससे पहले मई 2026 में भारत आए थे। उस समय उन्होंने नई दिल्ली में विदेश मंत्री एस. जयशंकर की मेजबानी में आयोजित क्वाड देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लिया था।
अक्टूबर का यह दौरा मई के बाद उनकी दूसरी भारत यात्रा होगी। इस बार सरकारी अधिकारियों के साथ कारोबारी नेताओं से मुलाकात भी कार्यक्रम का हिस्सा है।
भारत से पहले उज्बेकिस्तान जाएंगे अमेरिकी विदेश मंत्री
भारत पहुंचने से पहले रूबियो उज्बेकिस्तान के समरकंद जाएंगे, जहां वह सी5+1 मंत्रिस्तरीय बैठक में हिस्सा लेंगे। इस मंच पर अमेरिका और मध्य एशिया के पांच देशों के बीच रणनीतिक सहयोग पर चर्चा होती है।
इस समूह में उज्बेकिस्तान, कजाखस्तान, ताजिकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान और किर्गिज गणराज्य शामिल हैं। रूबियो इन देशों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ द्विपक्षीय बातचीत भी करेंगे।
कुल मिलाकर, रूबियो की भारत यात्रा ऊर्जा सहयोग, रणनीतिक संबंधों और निवेश की संभावनाओं के लिहाज से महत्वपूर्ण है। हालांकि, जामनगर रिफाइनरी को लेकर किसी नए समझौते या निवेश की पुष्टि के लिए आधिकारिक घोषणाओं का इंतजार करना होगा।