नयी दिल्ली. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने मंगलवार को दावा किया कि नए संसद भवन के शीर्ष पर स्थापित राष्ट्रीय प्रतीक चिह्न वाराणसी के पास सारनाथ में स्थित प्रतीक चिह्न की ही प्रतिकृति है. भाजपा ने विपक्षी दलों पर आरोप लगाया कि वह जानबूझकर राजनीतिक कारणों से एक के बाद विवाद पैदा करने की कोशिश कर रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को इस राष्ट्रीय प्रतीक का अनावरण किया था.
विपक्षी दलों के सदस्यों और कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सरकार पर अशोक की लाट के ‘मोहक और राजसी शान वाले’ शेरों की जगह ‘उग्र’ शेरों का चित्रण कर राष्ट्रीय प्रतीक के रूप को बदलने का आरोप लगाया है. उन्होंने इसे तत्काल बदलने की मांग भी की.
भाजपा के मुख्य प्रवक्ता और राज्यसभा के सदस्य अनिल बलूनी ने कहा कि विपक्ष के आरोपों की मूल वजह उनकी कुंठा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के कार्यकाल में अंग्रेजों द्वारा 150 साल पहले बनाए गए संसद भवन की जगह भारत अपना नया संसद भवन बना रहा है.
उन्होंने कहा, ‘‘यह विरोध शुद्ध रुप से राजनीतिक कारणों से प्रेरित है. विपक्षी दल किसी ना किसी बहाने प्रधानमंत्री मोदी को निशाना बनाना चाहते हैं. यह लोगों को गुमराह कर वातावरण को दूषित करने का महज एक षड़यंत्र है.’’ बलूनी ने कहा कि आलोचक सोमवार को अनावृत राष्ट्रीय प्रतीक की तुलना सारनाथ स्थित राष्ट्रीय प्रतीक से कर रहे हैं और विभिन्न कोनों से ली गई उसकी तस्वीरें साझा कर विवाद पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि यह ध्यान देना भी जरूरी है कि संसद भवन पर स्थापित राष्ट्रीय प्रतीक की ऊंचाई 6.5 मीटर है जो कि सारनाथ स्थित राष्ट्रीय प्रतीक से तीन गुणा बड़ा है.
लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी ने ट्वीट किया, ‘‘नरेंद्र मोदी जी, कृपया शेर का चेहरा देखिए. यह महान सारनाथ की प्रतिमा को परिलक्षित कर रहा है या गिर के शेर का बिगड़ा हुआ स्वरूप है. कृपया इसे देखिए और जरूरत हो तो इसे दुरुस्त कीजिए.’’ भारत का राष्ट्रीय प्रतीक सम्राट अशोक के शेर राजधानी सारनाथ से अपनाया गया है. यह अब सारनाथ संग्रहालय में मौजूद है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को नये संसद भवन की छत पर राष्ट्रीय प्रतीक का अनावरण किया था. इस दौरान आयोजित समारोह में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और राज्यसभा के उप सभापति हरिवंश उपस्थित थे.
सारनाथ स्थित राष्ट्रीय प्रतीक और नयी संसद के ऊपर लगे प्रतीक एक समान : पुरी
राष्ट्रीय प्रतीक को लेकर चल रहे विवाद के बीच केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों के मंत्री हरदीप ंिसह पुरी ने मंगलवार को विपक्ष पर पलटवार करते हुए जोर दिया कि यदि सारनाथ स्थित राष्ट्रीय प्रतीक के आकार को बढ़ाया जाए या नए संसद भवन पर बने प्रतीक के आकार को छोटा किया जाए, तो दोनों में कोई अंतर नहीं होगा. विपक्षी दलों और कार्यकर्ताओं ने सरकार पर अशोक की लाट के ‘मोहक और राजसी शान वाले’ शेरों की जगह उग्र शेरों का चित्रण कर राष्ट्रीय प्रतीक के स्वरूप को बदलने का आरोप लगाया. उन्होंने इसे तत्काल बदलने की मांग की.
पुरी के मंत्रालय पर सेंट्रल विस्टा पुर्निवकास परियोजना के तहत नए संसद भवन के निर्माण का जिम्मा है. उन्होंने कहा कि दो संरचनाओं की तुलना करते समय कोण, ऊंचाई और माप के प्रभाव की सराहना करने की आवश्यकता है. मंत्री ने ट्वीट किया कि यदि कोई व्यक्ति नीचे से सारनाथ प्रतीक को देखता है, तो वह उतना ही शांत या क्रोधित दिखाई देगा, जितना बताया जा रहा है. उन्होंने कहा कि यदि मूल प्रतीक की वास्तविक प्रतिकृति नयी इमारत पर लगाई जाती है, तो वह दूर से नहीं दिखाई देगी. उन्होंने कहा कि ‘विशेषज्ञों’ को यह भी पता होना चाहिए कि सारनाथ में रखा गया मूल प्रतीक जमीन पर है जबकि नया प्रतीक जमीन से 33 मीटर की ऊंचाई पर है.
उन्होंने एक अन्य ट्वीट में कहा, “अगर सारनाथ स्थित प्रतीक चिन्ह के आकार को बढ़ाया जाए या नए संसद भवन पर लगे प्रतीक के आकार को छोटा कर दिया जाए तो दोनों में कोई फर्क नहीं दिखेगा.’’ पुरी ने सारनाथ स्थित प्रतीक चिन्ह की एक तस्वीर भी ट्वीट की.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को नये संसद भवन की छत पर राष्ट्रीय प्रतीक का अनावरण किया था. इस दौरान आयोजित समारोह में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और राज्यसभा के उप सभापति हरिवंश उपस्थित थे.