प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के बनासकांठा जिले के भिलडी में 325 करोड़ रुपये के पशु प्रजनन केंद्र का उद्घाटन किया। भारत बोवाइन ब्रीडिंग एंड रिसर्च सेंटर (BBBRC) बनास डेयरी की ओर से तैयार केंद्र है, जो 127 एकड़ में फैला है. इसे नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड (NDDB) की तकनीकी दिशानिर्देशन और केंद्र राष्ट्रीय गोकुल मिशन की मदद से तैयार किया गया है. इस सेंटर का मकसद हर साल 25 हजार हाई क्वालिटी वाले भ्रूण तैयार करना है, ताकि देसी गाय-भैंसों की नस्लों में सुधार के साथ दूध उत्पादन बढ़ाया जा सके.
बनास डेयरी के चेयरमैन शंकर चौधरी का कहना है कि इस सेंटर में हाई क्वालिटी वाले पशुओं के प्रजनन को बढ़ाने के लिए उन्नत प्रजनन तकनीकों का इस्तेमाल होगा. इनमें ओवम पिकअप और इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (OPU-IVF) के अलावा भ्रूण स्थानांतरण (embryo transfer) जैसी तकनीकें भी शामिल हैं. आमतौर पर एक अच्छी नस्ल की गाय साल में केवल एक बछड़े को जन्म देती है, लेकिन नई तकनीक एक ही साल में एक बेहतरीन गाय से कई बछड़े मिल सकते हैं. इस सेंटर में सालाना 25 हजार बेहतरीन भ्रूण तैयार करने का टारगेट है. जानवरों की अगली पीढ़ियों की नस्लों की आनुवांशिक गुणवत्ता सुधार कर उन्हें ज्यादा दुधारू बनाया जाएगा. इसमें थारपारकर, कांकरेज, गिर, साहीवाल जैसी देसी नस्ल की गायों के साथ मेहसाणी, मुर्रा, बन्नी, जाफराबादी जैसी भैंस की नस्लों में सुधार किया जाएगा. ये एक नेशनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के तौर पर डिजाइन किया गया है.
सेंटर मुख्य तौर पर देसी गायों की नस्लों जैसे साहीवाल, कांकरेज, गिर और थारपारकर के अलावा भैंसों की प्रमुख नस्लों मेहसाणी, बन्नी और मुर्रा पर फोकस रहेगा. देसी नस्लों में भयंकर गर्मी और कीड़ों से होने वाली बीमारियों को सहने की ताकत होती है. इनके आनुवंशिक गुणों को बढ़ावा देने से ऐसे पशु तैयार होंगे, जो बिना किसी महंगी कूलर या इलाज की रूरत के अधिक दूध दे सकते हैं.
ये सेंटर ऐसे छोटे किसानों की मदद करेगा.छोटे पशुपालकों और गांव-कस्बों की महिलाओं को लाभ दिया जाएगा. बनास डेयरी के अनुसार, इस क्षेत्र में 70 फीसदी काम महिलाएं ही करती हैं. किसानों को बेहतर नस्लों के बीमारी मुक्त सांड, अच्छी गुणवत्ता वाला वीर्य और भ्रूण किफायती दरों पर उपलब्ध कराए जाएंगे. जानवरों की बेहतरीन नस्ल की आनुवंशिक क्षमता से दूध का उत्पादन बढ़ेगा. पशुओं को पालने की लागत कम होगी. बनास डेयरी किसानों की सहकारी संस्था है. इस सेंटर के जरिये वैज्ञानिक प्रजनन तरीकों को मजबूत दी जाएगी. पशुपालन की उत्पादकता और मुनाफे को बढ़ाया जाएगा. भारतीय मवेशी नस्लों को दुनिया में भी बढ़ावा दिया जाएगा. देसी गायों और भैंसों की एक बड़ी बात है कि वे ज्यादातर गर्मी के मौसम को सह सकती हैं. भारतीय हालातों में कम चारा खाने के साथ अच्छा दूध दे सकती हैं.