बिलासपुर: रेलवे के लिए ली गई जमीन के बदले नाती को भी नौकरी का हक? हाई कोर्ट ने दिया बड़ा फैसला, बर्खास्त होमगार्ड की बहाली के भी आदेश

मुख्य न्यायाधीश की पीठ ने केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण के आदेश में दखल से किया इन्कार; PM सुरक्षा ड्यूटी से अनुपस्थित होमगार्ड की बर्खास्तगी भी रद
Author: www.navabharat.news
UPDATED: Wed, 04 Nov 2026 10:33 AM
बिलासपुर: रेलवे के लिए ली गई जमीन के बदले नाती को भी नौकरी का हक? हाई कोर्ट ने दिया बड़ा फैसला, बर्खास्त होमगार्ड की बहाली के भी आदेश
ऑडियो सुनें

रेलवे भूमि अधिग्रहण में नाती को माना पात्र: छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने रेलवे परियोजना के लिए अधिग्रहित जमीन के बदले पुनर्वास रोजगार में नाती को पात्र मानते हुए केंद्र सरकार की याचिका निरस्त कर दी। मुख्य न्यायाधीश कृष्ण राम महापात्र और न्यायमूर्ति संतोष शर्मा की पीठ ने स्पष्ट किया कि यदि जमीन मालिक के परिवार के किसी सदस्य को अब तक रोजगार नहीं मिला है, तो नाती के दावे पर विचार किया जा सकता है। कोर्ट ने केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट), जबलपुर के आदेश में दखल देने से इन्कार कर दिया।

जांजगीर-चांपा जिले का मामला

मामला जांजगीर-चांपा जिले के ग्राम कोसमंदा का है। यहां खसरा नंबर 487/5 की 0.004 हेक्टेयर जमीन महेश राम के नाम थी, जो 2012-13 से 2018 के बीच रेलवे लाइन विस्तार के लिए अधिग्रहित की गई। इसके बदले महेश राम की बेटी सावित्री बाई ने रोजगार मांगा, जिसे आयु सीमा का हवाला देकर खारिज कर दिया गया।

रेलवे ने ठुकराया था दावा

इसके बाद सावित्री बाई के बेटे सनत कुमार कश्यप ने नाना की जमीन के बदले नौकरी की मांग की। रेलवे ने 2 सितंबर 2011 की नीति का हवाला देते हुए दावा ठुकरा दिया। रेलवे का तर्क था कि नीति में नाती को नौकरी देने का प्रावधान नहीं है और एक जमीन के बदले बार-बार रोजगार नहीं दिया जा सकता।

अधिकरण के आदेश को दी थी चुनौती

सनत कुमार की अर्जी पर अधिकरण ने 31 जुलाई 2025 को ‘यशवंत मामले’ के आधार पर दावे पर पुनर्विचार करने का निर्देश दिया था। रेलवे ने इस आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी। आवेदकों के वरिष्ठ अधिवक्ता गोविंद राम मिरी ने तर्क दिया कि परिवार के किसी भी सदस्य को रोजगार नहीं मिला है। उन्होंने 21 जुलाई 2023 के ‘कुमारी प्रमिला यादव मामले’ का भी हवाला दिया, जिसमें अधिकरण का आदेश बरकरार रखा गया था।

बर्खास्त होमगार्ड को 10 साल बाद फिर मिलेगी नौकरी

एक अन्य मामले में हाई कोर्ट ने होमगार्ड जवान गजाधर कुमार नाग का बर्खास्तगी आदेश रद कर दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2016 में प्रदेश प्रवास के दौरान सुरक्षा ड्यूटी से अनुपस्थित रहने पर उन्हें सेवा से हटाया गया था। न्यायमूर्ति अमितेन्द्र किशोर प्रसाद ने लागू सेवा नियमों के अधीन बहाली के निर्देश दिए।

बीमारी के कारण नहीं पहुंच सका था ड्यूटी पर

कांकेर जिले के ग्राम कोड़ाभाट निवासी नाग छत्तीसगढ़ होमगार्ड में सैनिक थे। प्रधानमंत्री के 28 अक्टूबर से 1 नवंबर 2016 तक रायपुर प्रवास के दौरान उनकी सुरक्षा ड्यूटी लगी थी। आरोप था कि वह ड्यूटी पर नहीं पहुंचे। जवान का कहना था कि वह 26 अक्टूबर से 2 नवंबर 2016 तक मलेरिया और टाइफाइड से बीमार थे। कांकेर के शासकीय कोमल देव जिला अस्पताल में उन्हें 26 अक्टूबर को भर्ती किया गया और 27 अक्टूबर को छुट्टी मिली। 2 नवंबर को फिटनेस प्रमाणपत्र जारी हुआ।

बिना जांच सेवा समाप्त करना गलत

कोर्ट ने कहा कि अधिकारियों ने कारण बताओ नोटिस, आरोप पत्र या विभागीय जांच के बिना सेवा समाप्त की और जवान को अपना पक्ष रखने का अवसर नहीं दिया। जांच न कराने का कारण भी दर्ज नहीं था। अदालत ने राज्य सरकार की वैकल्पिक अपील वाली दलील को खारिज कर दिया। अनुपस्थिति की अवधि पर चिकित्सा दस्तावेजों और नियमों के अनुसार विचार किया जाएगा।

नोट: खबर कोर्ट के आदेश और पक्षकारों की दलीलों पर आधारित है। दोनों मामलों में आगे की कार्रवाई संबंधित विभागों के निर्णय पर निर्भर करेगी।

Breaking news. hindi news. Navabharat News. Latest news, in-depth analysis and opinion.
नवभारत न्यूज : छत्तीसगढ़, असम, ओडिशा, देश, दुनिया और राज्यों की खबरों का विश्वसनीय मंच.

लेखक के बारे में
By www.navabharat.news